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PSU OFS से केंद्र ने 2026 में जुटाए ₹25,491 करोड़, एक दशक में सबसे बड़ी वसूली

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PSU OFS से केंद्र ने 2026 में जुटाए ₹25,491 करोड़, एक दशक में सबसे बड़ी वसूली

सारांश

केंद्र सरकार ने 2026 में आठ PSU में OFS के ज़रिए ₹25,491 करोड़ जुटाकर एक दशक का रिकॉर्ड तोड़ा। BHEL फ्लोर प्राइस से 62% ऊपर है, जबकि IRFC 3% नीचे। विशेषज्ञों के अनुसार यह राशि खाद्य, उर्वरक और गैस सब्सिडी के बढ़ते बोझ को संभालने में मददगार होगी।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 2026 में आठ PSU में OFS के ज़रिए लगभग ₹25,491 करोड़ जुटाए — 2015 के बाद सबसे बड़ी राशि।
निजी क्षेत्र सहित 24 सूचीबद्ध कंपनियों ने मिलकर OFS से ₹29,445 करोड़ जुटाए।
BHEL OFS फ्लोर प्राइस से 62% ऊपर — सबसे बेहतर प्रदर्शन; IRFC 3% नीचे।
हिस्सेदारी बेची गई कंपनियाँ: BHEL, IRFC, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, NHPC, NLC इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ।
विशेषज्ञों के अनुसार जुटाई गई राशि खाद्य, उर्वरक और गैस सब्सिडी के अतिरिक्त खर्च को पूरा करने में सहायक होगी।

केंद्र सरकार ने 2026 में अब तक आठ सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) में अपनी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के ज़रिए बेचकर लगभग ₹25,491 करोड़ जुटाए हैं। प्राइम डेटाबेस के आँकड़ों के अनुसार, यह 2015 के बाद PSU OFS के माध्यम से एक कैलेंडर वर्ष में जुटाई गई सबसे बड़ी राशि है।

मुख्य आँकड़े और पृष्ठभूमि

प्राइम डेटाबेस के डेटा के मुताबिक, निजी क्षेत्र के इश्यू को मिलाकर इस साल अब तक कुल 24 सूचीबद्ध कंपनियों ने OFS के ज़रिए लगभग ₹29,445 करोड़ जुटाए हैं। यह आँकड़ा 2024 में 28 कंपनियों द्वारा जुटाए गए ₹30,178 करोड़ के करीब है। तुलना के लिए, 2015 में 19 कंपनियों ने OFS के माध्यम से ₹35,566 करोड़ जुटाए थे — जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है।

सरकार ने 2015 में पाँच सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर ₹35,291 करोड़ जुटाए थे, जो PSU OFS का अब तक का रिकॉर्ड है।

किन कंपनियों में बेची हिस्सेदारी

केंद्र ने जिन सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेची उनमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, NHPC, NLC इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं। इसके साथ ही निजी क्षेत्र ने भी OFS बाज़ार का उपयोग किया है।

OFS के बाद PSU शेयरों का प्रदर्शन

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद OFS लॉन्च के बाद PSU शेयरों का प्रदर्शन सामान्यतः औसत रहा है।

हाल ही में विनिवेश किए गए PSU शेयरों में BHEL सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा, जो अपने OFS फ्लोर प्राइस से लगभग 62% ऊपर कारोबार कर रहा है। कोल इंडिया और NHPC अपने-अपने OFS फ्लोर प्राइस से लगभग 9% ऊपर हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने मई में जारी होने के बाद से लगभग 6% की बढ़त दर्ज की है।

दूसरी ओर, IRFC अपने फरवरी के OFS फ्लोर प्राइस से लगभग 3% नीचे बना हुआ है। NLC इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने क्रमशः लगभग 1% और 4% की बढ़त दर्ज की है।

सब्सिडी खर्च पर असर

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि साल की शुरुआत में हिस्सेदारी बेचकर जुटाई गई यह राशि सरकार को खाद्य, उर्वरक और खाना पकाने वाली गैस से जुड़ी सब्सिडी के अतिरिक्त बोझ को वहन करने में सहायक हो सकती है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राजकोषीय प्रबंधन पर दबाव बना हुआ है।

आगे की संभावनाएँ

गौरतलब है कि 2026 का यह OFS संग्रह वर्ष के अभी केवल पहले छह महीनों का है, और यदि दूसरी छमाही में भी सरकार PSU हिस्सेदारी बिक्री जारी रखती है तो वार्षिक आँकड़ा 2015 के रिकॉर्ड के करीब पहुँच सकता है। बाज़ार विश्लेषकों की नज़र इस बात पर होगी कि आने वाले महीनों में सरकार अपने विनिवेश कार्यक्रम को किस गति से आगे बढ़ाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

491 करोड़ का यह OFS संग्रह प्रभावशाली दिखता है, लेकिन यह 2015 के ₹35,291 करोड़ के PSU OFS रिकॉर्ड से अभी भी काफी पीछे है — और वह भी तब जब बाज़ार का समग्र आकार उस समय से कहीं बड़ा हो चुका है। असली सवाल यह है कि क्या यह विनिवेश रणनीतिक पुनर्गठन का हिस्सा है या केवल राजकोषीय दबाव में हिस्सेदारी बेचना। BHEL का 62% रिटर्न उत्साहजनक है, लेकिन IRFC का फ्लोर प्राइस से नीचे रहना बताता है कि OFS मूल्य निर्धारण हमेशा बाज़ार की वास्तविकता से मेल नहीं खाता। सब्सिडी बिल के लिए विनिवेश पर निर्भरता एक दीर्घकालिक राजकोषीय रणनीति नहीं है — यह तात्कालिक ज़रूरत की स्वीकृति है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में PSU OFS के ज़रिए केंद्र ने कितनी राशि जुटाई?
प्राइम डेटाबेस के आँकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2026 में आठ सूचीबद्ध PSU में हिस्सेदारी बेचकर लगभग ₹25,491 करोड़ जुटाए हैं। यह 2015 के बाद PSU OFS के ज़रिए एक वर्ष में जुटाई गई सबसे बड़ी राशि है।
किन सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेची गई?
केंद्र ने BHEL, IRFC, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, NHPC, NLC इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में OFS के ज़रिए हिस्सेदारी बेची है।
OFS के बाद PSU शेयरों का प्रदर्शन कैसा रहा?
BHEL सबसे बेहतर रहा और OFS फ्लोर प्राइस से लगभग 62% ऊपर कारोबार कर रहा है। कोल इंडिया और NHPC लगभग 9% ऊपर हैं, जबकि IRFC फरवरी के फ्लोर प्राइस से 3% नीचे है।
यह राशि सरकार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञों के अनुसार, साल की शुरुआत में जुटाई गई यह राशि खाद्य, उर्वरक और खाना पकाने वाली गैस सब्सिडी से जुड़े अतिरिक्त खर्च को वहन करने में सरकार की मदद कर सकती है। यह राजकोषीय प्रबंधन के नज़रिए से भी अहम है।
2026 का OFS संग्रह पिछले वर्षों से कैसे तुलनीय है?
2026 में PSU OFS से ₹25,491 करोड़ जुटाए गए, जो 2015 के ₹35,291 करोड़ के रिकॉर्ड से कम है लेकिन 2015 के बाद सर्वाधिक है। कुल OFS (निजी क्षेत्र सहित) ₹29,445 करोड़ रहा, जो 2024 के ₹30,178 करोड़ के करीब है।
राष्ट्र प्रेस
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