PSU OFS से केंद्र ने 2026 में जुटाए ₹25,491 करोड़, एक दशक में सबसे बड़ी वसूली
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 2026 में अब तक आठ सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) में अपनी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के ज़रिए बेचकर लगभग ₹25,491 करोड़ जुटाए हैं। प्राइम डेटाबेस के आँकड़ों के अनुसार, यह 2015 के बाद PSU OFS के माध्यम से एक कैलेंडर वर्ष में जुटाई गई सबसे बड़ी राशि है।
मुख्य आँकड़े और पृष्ठभूमि
प्राइम डेटाबेस के डेटा के मुताबिक, निजी क्षेत्र के इश्यू को मिलाकर इस साल अब तक कुल 24 सूचीबद्ध कंपनियों ने OFS के ज़रिए लगभग ₹29,445 करोड़ जुटाए हैं। यह आँकड़ा 2024 में 28 कंपनियों द्वारा जुटाए गए ₹30,178 करोड़ के करीब है। तुलना के लिए, 2015 में 19 कंपनियों ने OFS के माध्यम से ₹35,566 करोड़ जुटाए थे — जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है।
सरकार ने 2015 में पाँच सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर ₹35,291 करोड़ जुटाए थे, जो PSU OFS का अब तक का रिकॉर्ड है।
किन कंपनियों में बेची हिस्सेदारी
केंद्र ने जिन सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेची उनमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, NHPC, NLC इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं। इसके साथ ही निजी क्षेत्र ने भी OFS बाज़ार का उपयोग किया है।
OFS के बाद PSU शेयरों का प्रदर्शन
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद OFS लॉन्च के बाद PSU शेयरों का प्रदर्शन सामान्यतः औसत रहा है।
हाल ही में विनिवेश किए गए PSU शेयरों में BHEL सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा, जो अपने OFS फ्लोर प्राइस से लगभग 62% ऊपर कारोबार कर रहा है। कोल इंडिया और NHPC अपने-अपने OFS फ्लोर प्राइस से लगभग 9% ऊपर हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने मई में जारी होने के बाद से लगभग 6% की बढ़त दर्ज की है।
दूसरी ओर, IRFC अपने फरवरी के OFS फ्लोर प्राइस से लगभग 3% नीचे बना हुआ है। NLC इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने क्रमशः लगभग 1% और 4% की बढ़त दर्ज की है।
सब्सिडी खर्च पर असर
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि साल की शुरुआत में हिस्सेदारी बेचकर जुटाई गई यह राशि सरकार को खाद्य, उर्वरक और खाना पकाने वाली गैस से जुड़ी सब्सिडी के अतिरिक्त बोझ को वहन करने में सहायक हो सकती है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राजकोषीय प्रबंधन पर दबाव बना हुआ है।
आगे की संभावनाएँ
गौरतलब है कि 2026 का यह OFS संग्रह वर्ष के अभी केवल पहले छह महीनों का है, और यदि दूसरी छमाही में भी सरकार PSU हिस्सेदारी बिक्री जारी रखती है तो वार्षिक आँकड़ा 2015 के रिकॉर्ड के करीब पहुँच सकता है। बाज़ार विश्लेषकों की नज़र इस बात पर होगी कि आने वाले महीनों में सरकार अपने विनिवेश कार्यक्रम को किस गति से आगे बढ़ाती है।