विनिवेश प्राप्तियां अप्रैल-जून तिमाही में ₹15,000 करोड़ पार करने की राह पर, OFS से मिली रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की विनिवेश प्राप्तियां वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में ₹15,000 करोड़ का आँकड़ा पार करने की ओर अग्रसर हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) में ऑफर फॉर सेल (OFS) के ज़रिए हिस्सेदारी बेचने की सरकार की रणनीति इस तेज़ी के पीछे प्रमुख कारण है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ईंधन और उर्वरकों पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ा है।
अब तक कितनी राशि जुटाई
रिपोर्टों के अनुसार, सरकार इस तिमाही में विनिवेश के माध्यम से अब तक लगभग ₹14,000 करोड़ जुटा चुकी है। कोल इंडिया, NHPC, NLC इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) में OFS के ज़रिए हिस्सेदारी बेची गई है। शेष लंबित लेनदेन के जुड़ने पर यह आँकड़ा और ऊपर जाने की उम्मीद है।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक गैर-कर पूंजीगत प्राप्तियों के ज़रिए कुल ₹21,732.23 करोड़ जुटाए गए हैं। इसमें विनिवेश से ₹13,389.42 करोड़, एसेट मोनेटाइजेशन से ₹6,366.93 करोड़ और लाभांश (डिविडेंड) से ₹1,975.88 करोड़ शामिल हैं।
₹80,000 करोड़ का एसेट मोनेटाइजेशन लक्ष्य
केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹80,000 करोड़ के एसेट मोनेटाइजेशन कार्यक्रम पर काम कर रही है, जिसके कारण हिस्सेदारी बिक्री की गति तेज़ हुई है। इस कार्यक्रम के तहत IDBI बैंक में रणनीतिक विनिवेश और आंशिक हिस्सेदारी की बिक्री प्रमुख घटक हैं। इसके साथ ही, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) सहित चुनिंदा सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी घटाना मध्यम अवधि का एक विकल्प बना हुआ है।
राजकोषीय घाटे पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-कर पूंजीगत प्राप्तियों में यह वृद्धि केंद्र सरकार के वित्त को उस समय सहारा देती है जब खर्च का दबाव बढ़ रहा हो। विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से अधिक आय होने पर राजकोषीय बोझ का एक हिस्सा कम हो सकता है। इससे सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि सब्सिडी का बोझ और वैश्विक अनिश्चितता सरकार के राजस्व प्रबंधन को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में विनिवेश की यह रफ्तार बनाए रखना सरकार के लिए वित्तीय संतुलन की दृष्टि से अहम होगा। IDBI बैंक के रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया पूरी होने पर आने वाली तिमाहियों में यह आँकड़ा और बड़ा हो सकता है।