नैनीताल में 124वाँ नंदा देवी महोत्सव शुरू, नंदाष्टमी पर मां नंदा-सुनंदा के दर्शन को उमड़ी भारी भीड़
सारांश
मुख्य बातें
नैनीताल के प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर में 19 सितंबर 2026 को नंदाष्टमी के पावन अवसर पर 124वें नंदा देवी महोत्सव का मुख्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही दरबार खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और दिनभर दर्शनार्थियों का तांता बना रहा।
महोत्सव का उद्घाटन और स्वरूप
श्री राम सेवक सभा के कार्यकारी सदस्य कैलाश जोशी ने बताया कि इस वर्ष के नंदा देवी महोत्सव की आधिकारिक शुरुआत 16 सितंबर को विधि-विधान से उद्घाटन के साथ हो गई थी। उन्होंने कहा, 'यह नंदा देवी महोत्सव का 124वाँ वर्ष है। आज अष्टमी के दिन सुबह पूजा-अर्चना शुरू की गई और सुबह से ही भक्तों के लिए दरबार खोल दिया गया है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि मां के दर्शन के लिए भक्तों को सालभर प्रतीक्षा रहती है।
सुबह तीन बजे से ही कतारें
सभा के पदाधिकारी मुकेश जोशी मंटू ने बताया कि मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा होते ही दरबार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। उन्होंने कहा, 'सुबह तीन बजे से ही लंबी-लंबी कतारें लगी हुई थीं। सभी लोग बारी-बारी से मां के दर्शन कर रहे हैं और मनोकामना पूरी करने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। यहाँ काफी भक्तिमय माहौल है।'
23 सितंबर तक चलेंगे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
मुकेश जोशी मंटू के अनुसार महोत्सव 23 सितंबर तक जारी रहेगा, जिसमें धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, भंडारा और प्रसाद वितरण भी होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कि ब्रह्म मुहूर्त में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद जताई।
श्रद्धालुओं की आस्था
मां नंदा-सुनंदा के दर्शन के लिए आईं श्रद्धालु प्रेमा ने कहा, 'सालभर में एक बार नंदाष्टमी का मेला आता है। इसे काफी उत्साह से मनाया जाता है। मेरा मानना है कि नैनीताल के सभी लोगों पर मां का आशीर्वाद बना रहता है।' रामनगर से आईं एक अन्य महिला श्रद्धालु ने कहा कि दूर-दूर से लोग यहाँ आते हैं और इस दिन का सालभर इंतजार रहता है।
परंपरा और महत्व
गौरतलब है कि नंदा देवी महोत्सव उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। 124 वर्षों की अटूट परंपरा के साथ यह मेला न केवल नैनीताल बल्कि आसपास के जिलों और राज्यों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। महोत्सव का समापन 23 सितंबर को होगा, जिसके बाद अगले वर्ष की प्रतीक्षा फिर आरंभ हो जाएगी।