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क्या नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव का आगाज हुआ?

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क्या नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव का आगाज हुआ?

सारांश

नैनीताल में मां नंदा देवी महोत्सव का भव्य आगाज हो चुका है। कदली वृक्ष की परंपरागत यात्रा ने नगर को भक्तिमय बना दिया है। इस विशेष आयोजन में स्थानीय लोगों का भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

मुख्य बातें

नंदा देवी महोत्सव का आगाज नैनीताल में हुआ।
कदली वृक्ष की यात्रा ने नगर को भक्तिमय बना दिया है।
स्थानीय लोग इस महोत्सव का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
यह महोत्सव आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया नयना देवी मंदिर में होगी।

नैनीताल, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के नैनीताल में मां नंदा देवी महोत्सव का भव्य आगाज हो चुका है। शुक्रवार को परंपरागत रूप से ज्योलीकोट के चोपड़ा गांव से केले का पेड़ (कदली वृक्ष) नैनीताल लाया गया। जैसे ही वृक्ष नगर में पहुंचा, पूरा वातावरण “जय मां नंदा देवी” के जयकारों से गूंज उठा और शहर भक्तिमय हो गया।

कदली वृक्ष के नगर आगमन पर सबसे पहले सूखाताल स्थित वैष्णो देवी मंदिर में पूजन-अर्चन किया गया। धार्मिक विधि पूरी करने के बाद नगर भ्रमण और शोभायात्रा की गई। भक्तों ने परंपरा के अनुसार कदली वृक्ष को अपने कंधों पर रखकर नगर की परिक्रमा की। इस दौरान वृक्ष के साथ सफेद और लाल झंडे भी श्रद्धालुओं ने धारण किए। नगर भ्रमण के बाद कदली वृक्ष को नयना देवी मंदिर पहुंचाया गया, जहां मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। नन्दा अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में मां की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा होगी और भक्तों के लिए दर्शन खोले जाएंगे।

स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों में महोत्सव को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। परंपरा का पालन करते हुए महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। स्थानीय महिला कमला कुंजवाल ने बताया कि भक्तों को नंदा देवी महोत्सव का साल भर इंतजार रहता है। यह मेला साल में केवल एक बार आयोजित होता है और इसके लिए लोग पूरे वर्ष उत्साहित रहते हैं।

इस महोत्सव का आयोजन राम सेवक सभा के सहयोग से भव्य तरीके से किया जा रहा है। सभा के पदाधिकारी कैलाश जोशी ने बताया कि कदली वृक्ष लाने के लिए एक विशेष टीम भेजी गई थी और चोपड़ा गांव में रातभर भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। उन्होंने कहा कि आज नैनीताल में कदली वृक्ष का आगमन हुआ है। जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ और मां के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान हो गया। कल से कदली वृक्ष से मूर्ति निर्माण का कार्य प्रारंभ होगा।

नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में नंदा देवी महोत्सव आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय निवासी कमला ने बताया कि मां नंदा देवी की अपार शक्ति मानी जाती है और भक्तों का गहरा विश्वास है। माता के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। आज पूरा शहर भक्तिमय हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्थानीय संस्कृति को भी जीवंत किया है। इसे देखकर स्पष्ट होता है कि हमारे देश में धार्मिक महोत्सवों का स्थान कितना महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नंदा देवी महोत्सव कब मनाया जाता है?
नंदा देवी महोत्सव हर साल नंदा अष्टमी के अवसर पर मनाया जाता है।
इस महोत्सव में कौन-कौन सी परंपराएं शामिल हैं?
इस महोत्सव में कदली वृक्ष की यात्रा, पूजा, और शोभायात्रा शामिल हैं।
क्या इस महोत्सव में स्थानीय लोग भाग लेते हैं?
जी हां, स्थानीय महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में इस महोत्सव में भाग लेते हैं।
नंदा देवी महोत्सव का महत्व क्या है?
यह महोत्सव आस्था और विश्वास का प्रतीक है और भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है।
कदली वृक्ष का क्या महत्व है?
कदली वृक्ष को मां नंदा देवी का प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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