राजिंदर गोयल: रणजी ट्रॉफी में 637 विकेट, फिर भी टीम इंडिया में एक भी मैच नहीं
सारांश
मुख्य बातें
बाएं हाथ के दिग्गज स्पिनर राजिंदर गोयल रणजी ट्रॉफी के सर्वकालिक सबसे सफल गेंदबाज हैं — 637 विकेट के साथ — और यह रिकॉर्ड उनके अंतिम मैच के 41 साल बाद भी अटूट है। भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में इतना बड़ा नाम होने के बावजूद गोयल को कभी भी भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी नसीब नहीं हुई — यह भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक है।
शुरुआती जीवन और क्रिकेट की नींव
राजिंदर गोयल का जन्म 20 सितंबर 1942 को हरियाणा के नरवाना में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव क्रिकेट की तरफ था और उन्होंने बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाज़ी को अपना हथियार बनाया। स्थानीय स्तर पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के बाद 1958-59 के सत्र में उन्हें हरियाणा की तरफ से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण का अवसर मिला।
करियर की बुलंदी: विकेटों का अंबार
गोयल की गेंदबाज़ी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे बल्लेबाज़ी के लिए अनुकूल मानी जाने वाली पिचों पर भी घातक टर्न हासिल कर लेते थे। उनकी घूमती हुई गेंदें अनुभवी से अनुभवी बल्लेबाज़ों के लिए भी पहेली बनती थीं। उनका प्रथम श्रेणी करियर करीब 26 वर्षों तक चला और उन्होंने अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मुकाबला 1985 में खेला।
कुल 157 प्रथम श्रेणी मैचों में गोयल ने 750 विकेट झटके। इनमें से 637 विकेट अकेले रणजी ट्रॉफी में लिए — जो आज भी इस टूर्नामेंट का सर्वोच्च विकेट रिकॉर्ड है। एक पारी में 5 या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा उन्होंने 59 बार किया, जबकि एक मैच में 10 या उससे अधिक विकेट लेने की दुर्लभ उपलब्धि उन्होंने 18 बार हासिल की।
राष्ट्रीय टीम से अनदेखी: एक अनसुलझा सवाल
गोयल का करियर ऐसे दौर में चला जब भारत के पास बिशन सिंह बेदी और ईरापल्ली प्रसन्ना जैसे विश्वस्तरीय स्पिनर मौजूद थे, जो राष्ट्रीय टीम में स्थापित थे। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय चयनकर्ताओं के सामने विकल्पों की भरमार थी और घरेलू आँकड़े हमेशा चयन की कसौटी नहीं बनते थे। आलोचकों का कहना है कि गोयल के साथ हुई अनदेखी भारतीय चयन प्रणाली की एक बड़ी खामी को उजागर करती है।
गौरतलब है कि घरेलू क्रिकेट में इतने विकेट लेने के बावजूद उन्हें एक भी टेस्ट या एकदिवसीय मैच में मौका नहीं दिया गया। यह भारतीय क्रिकेट इतिहास की उन विडंबनाओं में शामिल है, जिन पर क्रिकेट के जानकार आज भी बहस करते हैं।
विरासत और अंतिम विदाई
21 जून 2020 को 77 वर्ष की आयु में रोहतक, हरियाणा में राजिंदर गोयल का निधन हो गया। उनके जाने के बाद भी रणजी ट्रॉफी में उनके 637 विकेटों का रिकॉर्ड अभी तक कोई नहीं तोड़ पाया है — यह उनकी महानता का सबसे बड़ा प्रमाण है। भारतीय घरेलू क्रिकेट का इतिहास राजिंदर गोयल के बिना अधूरा है, और उनकी कहानी हर उस खिलाड़ी के लिए प्रेरणा और पीड़ा दोनों है जो अपनी पूरी ज़िंदगी देकर भी सपना पूरा नहीं कर पाता।