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3 अगस्त जन्मतिथि: घरेलू क्रिकेट में दशकों खेले ये 3 भारतीय क्रिकेटर, टीम इंडिया में मिला बेहद कम मौका

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3 अगस्त जन्मतिथि: घरेलू क्रिकेट में दशकों खेले ये 3 भारतीय क्रिकेटर, टीम इंडिया में मिला बेहद कम मौका

सारांश

3 अगस्त को जन्मे तीन भारतीय क्रिकेटर — बलविंदर संधू, गोपाल शर्मा और अपूर्व सेनगुप्ता — घरेलू क्रिकेट में दशकों तक चमके, लेकिन टीम इंडिया में इन्हें बेहद कम मौके मिले। संधू 1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे, जबकि सेनगुप्ता सिर्फ एक टेस्ट खेल सके।

मुख्य बातें

बलविंदर सिंह संधू (जन्म 3 अगस्त 1956 , मुंबई) ने 8 टेस्ट और 22 वनडे खेले; वनडे विश्व कप 1983 विजेता टीम के सदस्य रहे।
संधू ने टेस्ट में 10 और वनडे में 16 विकेट लिए; बल्ले से 214 रन (सर्वोच्च 71 ) बनाए।
गोपाल शर्मा (जन्म 3 अगस्त 1960 , कानपुर) ने 5 टेस्ट और 11 वनडे खेले; दोनों प्रारूपों में 10-10 विकेट लिए।
गोपाल के नाम 104 प्रथम श्रेणी मैचों में 353 विकेट और 2,309 रन दर्ज हैं।
अपूर्व कुमार सेनगुप्ता (जन्म 3 अगस्त 1939 , लखनऊ) ने केवल 1 टेस्ट (1959, चेन्नई, वेस्टइंडीज के विरुद्ध) खेला; 14 सितंबर 2013 को नोएडा में निधन।

बलविंदर सिंह संधू, गोपाल शर्मा और अपूर्व कुमार सेनगुप्ता — तीनों का जन्म 3 अगस्त को हुआ और तीनों ने घरेलू क्रिकेट में वर्षों तक अपनी प्रतिभा साबित की, लेकिन भारतीय टीम की जर्सी इन्हें बहुत कम समय के लिए नसीब हुई। भारतीय क्रिकेट की गहरी प्रतिस्पर्धा में ये खिलाड़ी अपनी पहचान बनाने से चूक गए, हालाँकि घरेलू मैदान पर इनका योगदान अविस्मरणीय रहा।

बलविंदर सिंह संधू: 1983 विश्व कप विजेता

बलविंदर सिंह संधू का जन्म 3 अगस्त 1956 को मुंबई में हुआ था। दाएं हाथ के तेज गेंदबाज और निचले क्रम के बल्लेबाज संधू ने जनवरी 1983 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 31 अक्टूबर 1984 को पाकिस्तान के विरुद्ध खेला गया।

इस छोटे से करियर में संधू ने भारत के लिए 8 टेस्ट और 22 वनडे मैच खेले। टेस्ट में उन्होंने 10 विकेट और वनडे में 16 विकेट अपने नाम किए। बल्ले से भी उन्होंने टेस्ट में 2 अर्धशतक सहित 214 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 71 रन रहा। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि वह वनडे विश्व कप 1983 का ऐतिहासिक खिताब जीतने वाली भारतीय टीम के अहम सदस्य थे।

घरेलू क्रिकेट में संधू ने मुंबई की ओर से 1980-81 से 1986-87 तक खेला। 55 प्रथम श्रेणी मैचों में उन्होंने 168 विकेट और 42 लिस्ट ए मैचों में 36 विकेट लिए।

गोपाल शर्मा: उत्तर प्रदेश के लंबे करियर वाले स्पिनर

गोपाल शर्मा का जन्म 3 अगस्त 1960 को कानपुर में हुआ था। दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज गोपाल उत्तर प्रदेश की ओर से घरेलू क्रिकेट में उतरते थे। 1985 से 1990 के बीच उन्होंने भारतीय टीम के लिए 5 टेस्ट और 11 वनडे मैच खेले। टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में उन्होंने 10-10 विकेट लेने का समान रिकॉर्ड बनाया।

घरेलू क्रिकेट में गोपाल शर्मा का सफर 1979-80 से 1993-94 तक लंबा रहा। 104 प्रथम श्रेणी मैचों में उन्होंने 2 शतक और 11 अर्धशतक की मदद से 2,309 रन और 353 विकेट हासिल किए। 44 लिस्ट ए मैचों में उन्होंने 157 रन बनाने के साथ 45 विकेट भी लिए।

अपूर्व कुमार सेनगुप्ता: एकमात्र टेस्ट खेलने वाले लेग स्पिनर

अपूर्व कुमार सेनगुप्ता का जन्म 3 अगस्त 1939 को लखनऊ में हुआ था। दाएं हाथ के बल्लेबाज और उपयोगी लेग स्पिनर सेनगुप्ता को भारतीय टीम में केवल एक ही मौका मिला। उन्होंने अपना एकमात्र टेस्ट 1959 में चेन्नई में वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेला, जिसमें उन्होंने 9 रन बनाए। इसके बाद राष्ट्रीय टीम का दरवाज़ा उनके लिए फिर कभी नहीं खुला।

घरेलू स्तर पर उन्होंने सर्विसेज की ओर से 1958-59 से 1967-68 तक क्रिकेट खेला। 45 प्रथम श्रेणी मैचों की 68 पारियों में 2 शतक और 8 अर्धशतक की मदद से उन्होंने 1,695 रन बनाए और 31 विकेट भी लिए। 14 सितंबर 2013 को नोएडा में उनका निधन हो गया।

आम जनता पर असर: प्रतिभा और अवसर का अंतर

इन तीनों खिलाड़ियों की कहानी भारतीय क्रिकेट की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जहाँ घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन भी राष्ट्रीय टीम में दीर्घकालिक जगह की गारंटी नहीं देता। भारत में क्रिकेट खेलने वाले लाखों युवाओं के लिए यह संघर्ष आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

यह ऐसे समय में याद करने योग्य है जब भारतीय घरेलू क्रिकेट ढाँचे की गहराई और राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया पर बहस जारी है। इन खिलाड़ियों का योगदान भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट को समृद्ध करने में इनकी भूमिका अमूल्य रही।

संपादकीय दृष्टिकोण

गोपाल शर्मा और अपूर्व सेनगुप्ता की कहानियाँ भारतीय क्रिकेट चयन प्रणाली की उस पुरानी विडंबना को रेखांकित करती हैं — जहाँ घरेलू स्तर पर सैकड़ों मैचों का अनुभव भी राष्ट्रीय टीम में स्थायित्व की गारंटी नहीं बन पाता। गोपाल शर्मा का 104 प्रथम श्रेणी मैचों में 353 विकेट का रिकॉर्ड और फिर भी मात्र 5 टेस्ट — यह आँकड़ा अपने आप में बहुत कुछ कह देता है। सवाल यह है कि क्या उस दौर की चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रदर्शन-आधारित थी, या क्षेत्रीय और व्यक्तिगत समीकरण भी भूमिका निभाते थे। इन खिलाड़ियों की विरासत को याद करना आज के युवा क्रिकेटरों के लिए भी प्रासंगिक है, जो बेहतर और अधिक जवाबदेह चयन ढाँचे की माँग करते हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलविंदर सिंह संधू कौन हैं और उनका क्रिकेट करियर कैसा रहा?
बलविंदर सिंह संधू मुंबई के दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं, जिनका जन्म 3 अगस्त 1956 को हुआ था। उन्होंने भारत के लिए 8 टेस्ट और 22 वनडे खेले और 1983 वनडे विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे।
गोपाल शर्मा ने भारत के लिए कितने मैच खेले?
गोपाल शर्मा ने 1985 से 1990 के बीच भारत के लिए 5 टेस्ट और 11 वनडे मैच खेले। उन्होंने टेस्ट और वनडे दोनों में 10-10 विकेट लिए और उत्तर प्रदेश की ओर से 104 प्रथम श्रेणी मैचों में 353 विकेट हासिल किए।
अपूर्व कुमार सेनगुप्ता ने कितने टेस्ट मैच खेले?
अपूर्व कुमार सेनगुप्ता ने केवल एक टेस्ट मैच खेला — 1959 में चेन्नई में वेस्टइंडीज के विरुद्ध, जिसमें उन्होंने 9 रन बनाए। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में दोबारा मौका नहीं मिला।
इन तीनों क्रिकेटरों का जन्मदिन एक ही दिन क्यों खास है?
बलविंदर संधू (1956), गोपाल शर्मा (1960) और अपूर्व सेनगुप्ता (1939) — तीनों का जन्म 3 अगस्त को हुआ। तीनों ने घरेलू क्रिकेट में लंबा करियर बिताया लेकिन भारतीय टीम में उन्हें बेहद सीमित अवसर मिले, जो भारतीय क्रिकेट की गहरी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
अपूर्व कुमार सेनगुप्ता का निधन कब हुआ?
अपूर्व कुमार सेनगुप्ता का निधन 14 सितंबर 2013 को नोएडा में हुआ। उन्होंने सर्विसेज की ओर से 1958-59 से 1967-68 तक घरेलू क्रिकेट खेला और 45 प्रथम श्रेणी मैचों में 1,695 रन बनाए।
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