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क्या डीबी देवधर दिग्गज क्रिकेटर्स के आइडल थे?

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क्या डीबी देवधर दिग्गज क्रिकेटर्स के आइडल थे?

सारांश

डीबी देवधर, भारतीय क्रिकेट के 'ग्रैंड ओल्ड मैन', ने रणजी ट्रॉफी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी क्रिकेट यात्रा और योगदान को जानें।

मुख्य बातें

डीबी देवधर का योगदान भारतीय क्रिकेट में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने रणजी ट्रॉफी की नींव रखी।
उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे पुरस्कार मिले।
डीबी देवधर के आदर्श खिलाड़ी थे।
उनकी फिजिकल फिटनेस हमेशा से बेहतरीन रही।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट के महान प्रशासक और दूरदर्शी व्यक्तित्व डीबी देवधर को भारतीय क्रिकेट का 'ग्रैंड ओल्ड मैन' माना जाता है, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

दिनकर बलवंत देवधर का जन्म 14 जनवरी 1892 को पुणे में हुआ था। एसपी कॉलेज में संस्कृत के प्रोफेसर देवधर को क्रिकेट का बहुत शौक था। यही कारण है कि उन्होंने 1911/12 में अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की।

आक्रामक बल्लेबाज डीबी देवधर एक बेहद सरल और सीधे-सादे कप्तान थे, जिन्हें 1930 के दशक में महाराष्ट्र को एक प्रमुख प्रथम श्रेणी टीम के रूप में स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है। हालांकि, वह कभी भी भारत के लिए टेस्ट मैच नहीं खेल सके।

भारत ने साल 1932 में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था, लेकिन उस समय तक देवधर की उम्र 40 वर्ष हो चुकी थी। ऐसे में उन्हें टीम के लिए बहुत बूढ़ा माना गया।

81 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 39.32 की औसत से 4,552 रन बनाने वाले देवधर ने 9 शतक भी लगाए। इस दौरान उन्होंने 246 रन की शानदार पारी खेली और गेंदबाजी में 11 विकेट भी लिए।

डीबी देवधर अपने दौर के इतने शानदार बल्लेबाज थे कि जब भारत ने 1932 में अपना पहला टेस्ट खेला, तब वह टीम के कई खिलाड़ियों के आदर्श बने। 1939-41 में देवधर ने महाराष्ट्र को रणजी ट्रॉफी जिताने में मदद की।

हालांकि 40 की उम्र में डीबी देवधर को भारतीय टीम में स्थान नहीं मिला, लेकिन 50 वर्ष की आयु में भी वह फिटनेस के मामले में युवा खिलाड़ियों को मात देते थे।

कुछ समय बाद, डीबी देवधर ने क्रिकेट से संन्यास लिया, लेकिन खेल के प्रति उनका प्यार कम नहीं हुआ। उन्होंने खेल पत्रकार के रूप में करियर की शुरुआत की और 1946 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के साथ यात्रा की। अगले वर्ष, जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया गई, तब भी देवधर वहां मौजूद थे।

क्रिकेट जगत में देवधर का योगदान अविस्मरणीय है। इसी कारण भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने उनके सम्मान में 1973 में 'डीबी देवधर ट्रॉफी' की शुरुआत की, जो भारत में प्रतिभा को निखारने का एक प्रमुख मंच बन गई। 1956 में उन्हें 'पद्म श्री' और 1991 में 'पद्म भूषण' जैसे सम्मान मिले।

इस महानतम बल्लेबाज को बीसीसीआई का उपाध्यक्ष और महाराष्ट्र क्रिकेट संघ का अध्यक्ष भी चुना गया। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल सेलेक्टर का पद भी संभाला। 24 अगस्त 1993 को 101 वर्ष की आयु में डीबी देवधर ने इस दुनिया को अलविदा कहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय क्रिकेट की नींव भी मजबूत की। हमें उनके कार्यों को याद रखना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों को inspire करना चाहिए।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीबी देवधर का जन्म कब हुआ?
डीबी देवधर का जन्म 14 जनवरी 1892 को पुणे में हुआ।
डीबी देवधर ने कितने फर्स्ट क्लास मैच खेले?
डीबी देवधर ने कुल 81 फर्स्ट क्लास मैच खेले।
डीबी देवधर को कौन से पुरस्कार मिले?
उन्हें 1956 में 'पद्म श्री' और 1991 में 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया।
डीबी देवधर ने किस वर्ष रणजी ट्रॉफी जीती थी?
डीबी देवधर ने 1939-41 के बीच महाराष्ट्र को रणजी ट्रॉफी जिताई।
डीबी देवधर का क्रिकेट से रिटायरमेंट कब हुआ?
डीबी देवधर ने कुछ समय बाद क्रिकेट से रिटायरमेंट लिया, लेकिन खेल के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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