नमन ओझा: रणजी ट्रॉफी में 351 शिकार का रिकॉर्ड, फिर भी इंटरनेशनल क्रिकेट में मौके रहे कम
सारांश
मुख्य बातें
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में विकेटकीपर के रूप में सर्वाधिक शिकार करने वाले नमन ओझा घरेलू क्रिकेट के सबसे चमकदार नामों में से एक हैं। मध्य प्रदेश की तरफ से खेलते हुए उन्होंने जो रिकॉर्ड बनाए, वे आज भी अटूट हैं — लेकिन भारतीय टीम की जर्सी में उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिले।
शुरुआती जीवन और घरेलू करियर की नींव
नमन ओझा का जन्म 20 जुलाई, 1983 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ। बचपन से क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि ने उन्हें इस खेल को पेशेवर रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया। साल 2000 में घरेलू क्रिकेट में कदम रखते ही उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
रिकॉर्ड तोड़ घरेलू प्रदर्शन
मध्य प्रदेश की ओर से खेलते हुए नमन ने 146 प्रथम श्रेणी मैचों में 9,753 रन बनाए, जिसमें 22 शतक, 55 अर्धशतक और एक दोहरा शतक शामिल हैं। बतौर विकेटकीपर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 351 शिकार किए — यह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में एक विकेटकीपर द्वारा सर्वाधिक शिकार का रिकॉर्ड है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि उन्हें भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे सफल विकेटकीपर बल्लेबाजों की श्रेणी में स्थापित करती है।
इंटरनेशनल करियर: अवसर कम, प्रदर्शन सीमित
लगातार शानदार घरेलू प्रदर्शन के बाद नमन को 5 जून, 2010 को श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में भारतीय टीम में डेब्यू का मौका मिला। उन्होंने भारत के लिए कुल एक वनडे, दो टी20 और एक टेस्ट मैच खेला। तीनों फॉर्मेट मिलाकर उन्होंने केवल 69 रन बनाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई अर्धशतक या शतक नहीं जड़ सके। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय विकेटकीपिंग की भूमिका के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी थी। साल 2021 में नमन ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की।
देबाशीष मोहंती: ओडिशा का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर
20 जुलाई, 1976 को जन्मे देबाशीष मोहंती ओडिशा की ओर से भारतीय टीम में जगह बनाने वाले पहले क्रिकेटर थे। मध्यम गति के इस तेज गेंदबाज ने अपने करियर के शुरुआती वर्षों में स्विंग गेंदबाजी से बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। 1999 विश्व कप में इंग्लैंड की परिस्थितियों में वे बेहद प्रभावी रहे और 6 मुकाबलों में 10 विकेट चटकाए। जवागल श्रीनाथ के साथ उनकी जोड़ी ने भारत को कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत दिलाई।
मोहंती का करियर: प्रतिभा और गुमनामी के बीच
देबाशीष ने भारत के लिए कुल 45 वनडे मैच खेले और 57 विकेट लिए। 2 टेस्ट मैचों में उन्होंने 4 विकेट हासिल किए। एक समय उन्हें टेस्ट क्रिकेट का उभरता सितारा माना जा रहा था, लेकिन गति में कमी और जहीर खान तथा आशीष नेहरा जैसे युवा गेंदबाजों के उदय ने उनकी राह रोक दी। साल 2001 में उन्होंने भारतीय जर्सी में अपना अंतिम मैच खेला — इस तरह उनका अंतरराष्ट्रीय करियर महज 4 वर्षों में सिमट गया। दोनों तरफ गेंद को स्विंग कराने की काबिलियत रखने वाले मोहंती का इस तरह छोटा करियर भारतीय क्रिकेट की उन अनकही कहानियों में से एक है जहाँ प्रतिभा और अवसर का तालमेल नहीं बैठ सका।