नरेन तम्हाने: गेंदबाज से विकेटकीपर बने, 21 टेस्ट में 35 कैच और 16 स्टंपिंग से बनाई अमिट पहचान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज नरेन तम्हाने की कहानी संयोग और प्रतिभा का अनूठा संगम है। जो खिलाड़ी एक गेंदबाज के रूप में अपना करियर बनाने निकला था, वह अपनी बिजली-सी फुर्ती और पैने रिफ्लेक्स के बल पर भारत के सबसे भरोसेमंद विकेटकीपरों में शुमार हो गया — और उसकी तुलना ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज वैली ग्राउट से की जाने लगी।
संयोग ने बदली राह
नरेन तम्हाने का जन्म 4 अगस्त 1931 को मुंबई में हुआ। उनके पिता सरकारी कर्मचारी थे। बचपन से क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव रखने वाले नरेन शुरुआत में गेंदबाज के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। लेकिन क्लब क्रिकेट के एक मैच में नियमित विकेटकीपर की अनुपस्थिति में उन्हें दस्ताने थमा दिए गए। उस एक अवसर ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी।
विकेट के पीछे उनकी चपलता और सहज कौशल ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। 1951 में उन्होंने अपना प्रथम श्रेणी करियर आरंभ किया और जल्द ही घरेलू क्रिकेट में एक विश्वसनीय नाम बन गए।
घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन
1952-53 के सत्र में खेली गई रोहिंटन बारिया ट्रॉफी में तम्हाने ने 68.20 की औसत से 341 रन बनाए और टूर्नामेंट के सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। इस प्रदर्शन ने उन्हें अगले सत्र में फ्रैंक वॉरेल की कॉमनवेल्थ इलेवन के विरुद्ध अनौपचारिक टेस्ट मुकाबले में ऑल इंडिया टीम में जगह दिलाई। इसी दौरान उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी पदार्पण किया।
टेस्ट करियर और अंतरराष्ट्रीय पहचान
1955 में ढाका में पाकिस्तान के विरुद्ध तम्हाने को भारतीय जर्सी पहनने का अवसर मिला। बल्ले से वह पहले मैच में केवल 5 रन ही बना सके, किंतु विकेटकीपर के रूप में उनका डेब्यू ऐतिहासिक रहा — पहले ही मैच में उन्होंने 5 शिकार किए।
यह ऐसे समय में आया जब भारतीय विकेटकीपिंग में फारुख इंजीनियर और प्रोबीर सेन जैसे नाम चर्चा में थे। तम्हाने ने इन दिग्गजों के साथ अपना नाम दर्ज कराया। भारत के लिए कुल 21 टेस्ट मैचों में उन्होंने 225 रन बनाए, जिसमें 1 अर्धशतक शामिल था। विकेटकीपिंग में उन्होंने 35 कैच लपके और 16 स्टंपिंग कीं।
वैली ग्राउट से तुलना
तम्हाने की फुर्ती और विकेट के पीछे की सजगता इतनी असाधारण थी कि उनकी तुलना ऑस्ट्रेलिया के महान विकेटकीपर वैली ग्राउट से की जाती थी — जिन्हें 2016 में ऑस्ट्रेलियाई हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। गौरतलब है कि किसी भारतीय खिलाड़ी की तुलना उस युग के सर्वश्रेष्ठ विदेशी विकेटकीपर से होना उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण था।
प्रथम श्रेणी करियर और विरासत
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में तम्हाने ने 93 मैचों में 1,459 रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 5 अर्धशतक शामिल हैं। विकेट के पीछे उन्होंने 174 कैच लपके और 79 स्टंपिंग कीं — ये आँकड़े उनकी दीर्घकालिक निरंतरता की गवाही देते हैं।
2022 में 91 वर्ष की आयु में नरेन तम्हाने का निधन हो गया। उनकी विरासत यह है कि एक संयोगवश मिले अवसर को उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से भारतीय क्रिकेट के एक गौरवशाली अध्याय में बदल दिया।