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प्रवीण आमरे: डेब्यू में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शतक, फिर भी भारत के लिए सीमित मौके — कोचिंग में मिली असली पहचान

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प्रवीण आमरे: डेब्यू में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शतक, फिर भी भारत के लिए सीमित मौके — कोचिंग में मिली असली पहचान

सारांश

डेब्यू टेस्ट में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शतक, फिर भी सिर्फ 11 टेस्ट — प्रवीण आमरे की कहानी उस प्रतिभा की है जिसे मैदान पर पूरा मौका नहीं मिला, लेकिन कोचिंग में उन्होंने रहाणे, अय्यर जैसे सितारे गढ़े और भारत को 2012 U-19 विश्व कप दिलाया।

मुख्य बातें

प्रवीण आमरे का जन्म 14 अगस्त 1968 को मुंबई में हुआ; उन्होंने क्रिकेट की शिक्षा रमाकांत आरेकर से ली।
टेस्ट डेब्यू में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 103 रन बनाए; वनडे डेब्यू में 74 गेंदों पर 55 रन से भारत को 3 विकेट से जीत दिलाई।
भारत के लिए कुल 11 टेस्ट ( 425 रन, औसत 42 ) और 37 वनडे ( 513 रन ) खेले; 1994 में अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच।
86 प्रथम श्रेणी मैचों में 5,815 रन , 17 शतक , 25 अर्धशतक ; औसत 48 ।
कोच के रूप में 2012 अंडर-19 विश्व कप जिताया; मुंबई को तीन रणजी ट्रॉफी खिताब दिलाए।
अजिंक्य रहाणे , श्रेयस अय्यर और अभिषेक नायर को अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करने में अहम भूमिका।

भारत के पूर्व बल्लेबाज प्रवीण आमरे उन चुनिंदा क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ी के रूप में सीमित अवसर पाने के बावजूद, कोचिंग के क्षेत्र में भारतीय क्रिकेट पर गहरी छाप छोड़ी। 14 अगस्त 1968 को मुंबई में जन्मे आमरे ने टेस्ट डेब्यू में ही साउथ अफ्रीका के खिलाफ 103 रनों की पारी खेलकर सबका ध्यान खींचा, लेकिन करियर में पर्याप्त मौके न मिलने की कसक उनके साथ रही।

संघर्ष से शुरू हुआ सफर

मुंबई के एक साधारण परिवार में पले-बढ़े प्रवीण आमरे को शुरुआती दिनों में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने क्रिकेट की बारीकियाँ उस्ताद रमाकांत आरेकर की देखरेख में सीखीं — वही कोच जिन्होंने सचिन तेंदुलकर को भी तराशा था। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने मुंबई के अलावा रेलवे, राजस्थान, बंगाल और गोवा का प्रतिनिधित्व किया।

86 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में आमरे ने 48 की औसत से 5,815 रन बनाए, जिनमें 17 शतक और 25 अर्धशतक शामिल रहे। यह आँकड़े उनकी घरेलू क्रिकेट में निरंतरता और तकनीकी दक्षता का प्रमाण हैं।

यादगार अंतरराष्ट्रीय डेब्यू

घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद 1991 में उन्हें पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली। वनडे डेब्यू में उन्होंने 74 गेंदों में 55 रन बनाकर भारत को रोमांचक मुकाबले में 3 विकेट से जीत दिलाई।

टेस्ट डेब्यू और भी यादगार रहा — साउथ अफ्रीका के कड़े गेंदबाजी आक्रमण के सामने उन्होंने 103 रन की परिपक्व पारी खेली, हालाँकि मैच ड्रॉ रहा। गौरतलब है कि डेब्यू टेस्ट में शतक जड़ना भारतीय क्रिकेट इतिहास में दुर्लभ उपलब्धि रही है।

सीमित मौकों की कसक

भारत के लिए प्रवीण आमरे ने कुल 11 टेस्ट मैच खेले और 42 की औसत से 425 रन बनाए, जिनमें 1 शतक और 3 अर्धशतक शामिल रहे। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 37 मैचों में 513 रन जोड़े।

अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें नियमित रूप से टीम में जगह नहीं मिल सकी और 1994 में उन्होंने भारतीय जर्सी में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय बल्लेबाजी क्रम में प्रतिस्पर्धा अत्यंत कड़ी थी।

कोचिंग में मिली असली पहचान

खिलाड़ी के रूप में जो मौके छूटे, वह कमी प्रवीण आमरे ने कोचिंग में पूरी कर दिखाई। उनकी अगुवाई में भारत ने 2012 में अंडर-19 विश्व कप का खिताब जीता — भारतीय युवा क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक पल।

इसके अलावा, मुंबई क्रिकेट टीम ने उनकी कोचिंग में तीन बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। अजिंक्य रहाणे, श्रेयस अय्यर और अभिषेक नायर जैसे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करने में उनकी भूमिका को क्रिकेट जगत में व्यापक रूप से सराहा गया है। आमरे की कोचिंग विरासत इस बात का प्रमाण है कि क्रिकेट में योगदान केवल मैदान पर बनाए रनों से नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी को गढ़ने से भी मापा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनकी कोचिंग विरासत — रणजी खिताब, U-19 विश्व कप और रहाणे-अय्यर जैसे सितारे — यह साबित करती है कि खेल में योगदान का माप सिर्फ कैप्स की संख्या नहीं होती। भारतीय क्रिकेट को ऐसे कोचों की जरूरत है जो खुद की अनदेखी के बावजूद अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने में जुटे रहें।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रवीण आमरे ने टेस्ट डेब्यू में कितने रन बनाए थे?
प्रवीण आमरे ने अपने टेस्ट डेब्यू में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 103 रनों की पारी खेली थी। यह मैच ड्रॉ रहा, लेकिन उनकी पारी ने सबका ध्यान खींचा।
प्रवीण आमरे ने भारत के लिए कितने टेस्ट और वनडे मैच खेले?
उन्होंने भारत के लिए 11 टेस्ट मैचों में 42 की औसत से 425 रन बनाए, जिनमें 1 शतक और 3 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 37 मैच खेले और 513 रन बनाए।
प्रवीण आमरे ने कोच के रूप में क्या उपलब्धियाँ हासिल कीं?
प्रवीण आमरे की कोचिंग में भारत ने 2012 में अंडर-19 विश्व कप का खिताब जीता। इसके अलावा मुंबई क्रिकेट टीम ने उनकी देखरेख में तीन बार रणजी ट्रॉफी जीती।
प्रवीण आमरे ने किन खिलाड़ियों को तराशने में मदद की?
अजिंक्य रहाणे, श्रेयस अय्यर और अभिषेक नायर जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार करने में प्रवीण आमरे की कोचिंग की अहम भूमिका रही। इन खिलाड़ियों ने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रवीण आमरे ने क्रिकेट की शिक्षा किससे ली?
प्रवीण आमरे ने क्रिकेट की बारीकियाँ कोच रमाकांत आरेकर की देखरेख में सीखीं, जो सचिन तेंदुलकर के भी गुरु थे। मुंबई के साधारण परिवार से आने के बावजूद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 86 प्रथम श्रेणी मैचों में 5,815 रन बनाए।
राष्ट्र प्रेस
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