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रहाणे के संन्यास पर पुजारा भावुक: मेलबर्न शतक को बताया चरित्र की परिभाषा, कप्तानी की तारीफ

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रहाणे के संन्यास पर पुजारा भावुक: मेलबर्न शतक को बताया चरित्र की परिभाषा, कप्तानी की तारीफ

सारांश

एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद मेलबर्न में कप्तानी करते हुए शतक जड़ना — यही वह पल था जिसे पुजारा ने रहाणे के पूरे व्यक्तित्व की परिभाषा बताया। संन्यास के बाद आई यह श्रद्धांजलि बताती है कि रहाणे की असली विरासत आँकड़ों से कहीं ज़्यादा उनके नेतृत्व में थी।

मुख्य बातें

अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया; आखिरी मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ।
टेस्ट करियर में 85 मैच , 38.46 की औसत से 5,077 रन और 12 शतक ।
पुजारा ने मेलबर्न बॉक्सिंग डे 2020 शतक को रहाणे के चरित्र को परिभाषित करने वाली पारी बताया।
रहाणे की कप्तानी में भारत ने एडिलेड 36 रन के सदमे के बाद 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीती।
6 टेस्ट में कप्तानी — 4 जीत, 2 ड्रॉ ; कोई हार नहीं।

पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने अजिंक्य रहाणे के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के बाद उनकी कप्तानी और इंसानी बड़प्पन को खुले दिल से सराहा। पुजारा ने दिसंबर 2020 के मेलबर्न बॉक्सिंग डे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रहाणे की मैच जिताऊ सेंचुरी को उनके व्यक्तित्व को परिभाषित करने वाली पारी करार दिया।

रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर: आँकड़ों में

अजिंक्य रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ था। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 38.46 की औसत से 5,077 रन बनाए, जिनमें 12 शतक शामिल हैं। वनडे में 35.26 की औसत से 2,962 रन और 3 शतक उनके नाम हैं, जबकि टी20 इंटरनेशनल में 113 के स्ट्राइक रेट से 375 रन बनाए।

कप्तान के रूप में रहाणे ने 6 टेस्ट में भारत की अगुवाई की — 4 जीत और 2 ड्रॉ के साथ उनका रिकॉर्ड बेदाग रहा। वह 2015 वनडे वर्ल्ड कप और 20142016 टी20 वर्ल्ड कप टीमों का भी हिस्सा रहे।

मेलबर्न शतक: दबाव में चरित्र की परीक्षा

पुजारा ने 'ईएसपीएन क्रिकइंफो' में अपने कॉलम में लिखा, "अगर आप अजिंक्य रहाणे को एक इंसान, खिलाड़ी, व्यक्तित्व, लीडर और टीम मैन के तौर पर समझना चाहते हैं, तो 2020 में बॉक्सिंग डे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी सेंचुरी देखें। रहाणे का वह शतक उनके चरित्र को परिभाषित करने वाली पारी थी।"

पुजारा ने उस संदर्भ को भी रेखांकित किया जिसमें यह पारी खेली गई थी। उन्होंने लिखा, "यह बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का दूसरा टेस्ट था — इससे ठीक पहले वाले हफ्ते में एडिलेड में भारत की टीम महज 36 रन पर ऑलआउट हो गई थी। विराट कोहली के अपने बच्चे के जन्म के लिए भारत लौटने के बाद रहाणे मेलबर्न में टीम की कप्तानी कर रहे थे।"

"दबाव था, लेकिन रहाणे ने बैटिंग करते समय इसे खुद पर हावी नहीं होने दिया। वह बस अपना खेल खेलते रहे। हम विकेट गंवा रहे थे, लेकिन वह डटे रहे और आखिरकार उन्होंने अपना शतक पूरा किया। मेरे लिए यह दबाव में खेली गई सबसे अच्छी पारियों में से एक थी — एक कप्तान के तौर पर टीम की अगुवाई करना और यह दिखाना कि ऐसी परिस्थितियों में कैसे बैटिंग की जाती है।"

लीडरशिप शैली: अहंकार से परे

पुजारा ने रहाणे की उस लीडरशिप की भी प्रशंसा की जो वरिष्ठ और युवा खिलाड़ियों के बीच की दूरी मिटाती थी। उन्होंने लिखा, "रहाणे ने हमसे कहा कि हम युवा खिलाड़ियों से जैसे चाहें वैसे बात कर सकते हैं और उन्हें जो भी सलाह देना चाहें, दे सकते हैं। इससे ऐसा माहौल बनता है जहाँ हर किसी की बात सुनी जाती है और भले ही आप लीडरशिप रोल में न हों, फिर भी आप योगदान दे रहे होते हैं।"

"एक कप्तान के तौर पर उनकी खूबी चीजों को बहुत आसान रखना था। टीम में कौन सबसे अच्छा है, इसे लेकर कोई अहंकार नहीं था। सब कुछ इस बात पर केंद्रित था कि सभी खिलाड़ियों से बेस्ट प्रदर्शन कैसे निकलवाया जाए।"

ऐतिहासिक जीत का सिलसिला

गौरतलब है कि 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में रहाणे की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी — और यह तब, जब टीम एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के सदमे से उबर रही थी। रहाणे की यह जीत भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार अध्यायों में से एक मानी जाती है।

पुजारा की यह श्रद्धांजलि एक साथी की ओर से उस नेता के लिए आई है जिसने विपरीत परिस्थितियों में भारतीय क्रिकेट की नींव को थामे रखा — और रहाणे की विरासत को शब्दों में उकेरने की यह कोशिश उनके अवदान को चिरस्थायी बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उन्हें नियमित कप्तानी कभी नहीं मिली। पुजारा की श्रद्धांजलि यह सवाल उठाती है कि क्या भारतीय चयन प्रक्रिया उन नेताओं को उचित सम्मान देती है जो शोर के बिना टीम को जोड़े रखते हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास कब लिया?
रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, जबकि उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ था। उन्होंने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले।
पुजारा ने रहाणे के मेलबर्न शतक को इतना खास क्यों बताया?
पुजारा के अनुसार, एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने और विराट कोहली की अनुपस्थिति जैसे भारी दबाव के बीच रहाणे ने मेलबर्न बॉक्सिंग डे टेस्ट में शतक जड़ा और टीम को जीत दिलाई। पुजारा ने इसे दबाव में खेली गई सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक करार दिया।
कप्तान के रूप में रहाणे का रिकॉर्ड कैसा रहा?
रहाणे ने 6 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें 4 जीत और 2 ड्रॉ रहे — एक भी हार नहीं। उनकी सबसे यादगार उपलब्धि 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराना रही।
रहाणे की लीडरशिप स्टाइल को पुजारा ने कैसे वर्णित किया?
पुजारा ने बताया कि रहाणे ने वरिष्ठ खिलाड़ियों को युवाओं को गाइड करने के लिए प्रोत्साहित किया और टीम में अहंकार-मुक्त माहौल बनाया। उनकी खूबी यह थी कि वे चीजों को सरल रखते थे और हर खिलाड़ी से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकालने पर ध्यान देते थे।
अजिंक्य रहाणे का टेस्ट करियर आँकड़ों में कैसा रहा?
रहाणे ने 85 टेस्ट मैचों में 38.46 की औसत से 5,077 रन बनाए, जिनमें 12 शतक शामिल हैं। वनडे में 35.26 की औसत से 2,962 रन और 3 शतक, तथा टी20 इंटरनेशनल में 113 के स्ट्राइक रेट से 375 रन उनके नाम हैं।
राष्ट्र प्रेस
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