30 जुलाई 2026
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अजिंक्य रहाणे के संन्यास पर याद करें करियर की 5 ऐतिहासिक पारियाँ — लॉर्ड्स से मेलबर्न तक

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अजिंक्य रहाणे के संन्यास पर याद करें करियर की 5 ऐतिहासिक पारियाँ — लॉर्ड्स से मेलबर्न तक

सारांश

संन्यास के साथ रहाणे ने छोड़ा एक अमिट निशान — लॉर्ड्स पर 28 साल बाद जीत, 36 पर ऑलआउट के बाद मेलबर्न में 112 रन और अजेय कप्तानी। संकट में सबसे ज़्यादा चमकने वाले इस बल्लेबाज की विरासत भारतीय टेस्ट क्रिकेट में हमेशा जीवित रहेगी।

मुख्य बातें

अजिंक्य रहाणे ने 30 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।
2014 में लॉर्ड्स पर 154 गेंदों में 103 रन की पारी से भारत ने 28 साल बाद जीत दर्ज की।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 में मेलबर्न टेस्ट में 112 रन बनाए और कप्तान के रूप में भारत को सीरीज 2-1 से जिताया।
2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक ही टेस्ट की दोनों पारियों में शतक ( 127 व 100 नाबाद ) — नंबर 5 या नीचे बल्लेबाजी करते हुए ऐसा करने वाले एकमात्र भारतीय ।
बतौर कप्तान 6 टेस्ट में 4 जीत, 2 ड्रॉ — एक भी हार नहीं।

अजिंक्य रहाणे ने 30 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, जिससे भारतीय टेस्ट क्रिकेट के एक समर्पित अध्याय का अंत हुआ। मध्यक्रम के इस भरोसेमंद बल्लेबाज ने अपने करियर में कई ऐसी पारियाँ खेलीं जो भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हैं। यहाँ उनके करियर की 5 सबसे बड़ी उपलब्धियाँ जो उन्हें हमेशा अमर रखेंगी।

मेलबर्न में 147 रनों की दमदार पारी (2014)

2014 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध रहाणे ने मिचेल जॉनसन, रयान हैरिस, जोश हेजलवुड और शेन वॉटसन जैसे खतरनाक तेज गेंदबाजों का डटकर सामना करते हुए 147 रनों की शानदार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने विराट कोहली के साथ मिलकर 262 रनों की अहम साझेदारी निभाई, जिसकी बदौलत भारतीय टीम यह टेस्ट मैच ड्रॉ कराने में सफल रही।

लॉर्ड्स पर 28 साल बाद जीत का सूत्रधार (2014)

लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ जब भारतीय टीम 145 रन पर 7 विकेट गँवाकर संकट में थी, तब रहाणे ने एक छोर थामे रखा। उन्होंने स्विंग होती गेंदों के बीच 154 गेंदों में 103 रन की दृढ़ पारी खेलते हुए भारत को 295 रन के स्कोर तक पहुँचाया। भारत ने वह टेस्ट 95 रनों से जीता — और रहाणे की इस पारी के दम पर भारत ने 28 साल बाद लॉर्ड्स पर विजय पताका फहराई।

मेलबर्न टेस्ट 2020-21: कप्तान और बल्लेबाज दोनों रूपों में नायक

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 में एडिलेड टेस्ट में भारत 36 रनों पर ऑलआउट होकर शर्मनाक हार झेल चुका था। नियमित कप्तान विराट कोहली के शिशु के जन्म के कारण स्वदेश लौटने के बाद रहाणे ने सीरीज की कमान संभाली। मेलबर्न में दूसरे टेस्ट में उन्होंने बतौर कप्तान शानदार रणनीति के साथ-साथ बल्ले से 112 रनों की निर्णायक पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई। रहाणे की प्रेरक कप्तानी में भारत ने जबरदस्त वापसी करते हुए वह सीरीज 2-1 से जीती — जिसे भारतीय क्रिकेट की सबसे ऐतिहासिक श्रृंखला जीतों में गिना जाता है।

एक ही टेस्ट की दोनों पारियों में शतक — दुर्लभ रिकॉर्ड (2015)

2015 में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध एक टेस्ट मैच में रहाणे ने दोनों पारियों में शतक लगाने का दुर्लभ कारनामा किया। पहली पारी में उन्होंने 127 रन बनाए, जिससे भारत 334 रन के स्कोर तक पहुँचा। दूसरी पारी में वे 100 रन नाबाद रहे। विशेष रूप से, रहाणे नंबर पाँच या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए एक ही टेस्ट की दोनों पारियों में शतक जड़ने वाले एकमात्र भारतीय बल्लेबाज हैं।

कप्तानी में अजेय — 6 टेस्ट, 4 जीत, 2 ड्रॉ

बतौर टेस्ट कप्तान रहाणे का रिकॉर्ड असाधारण रहा। उन्होंने 6 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की अगुवाई की, जिनमें 4 जीत और 2 ड्रॉ रहे। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि रहाणे की कप्तानी में भारत ने एक भी टेस्ट नहीं गँवाया — यह उपलब्धि उन्हें भारत के सबसे सफल अंशकालिक कप्तानों में शुमार करती है। रहाणे के संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट ने एक ऐसे खिलाड़ी को विदाई दी जो संकट में सबसे ज्यादा चमका।

संपादकीय दृष्टिकोण

औसत से बड़ा होता है। जब-जब भारत सबसे गहरे संकट में था — 36 पर ऑलआउट, 7 विकेट 145 पर — रहाणे ने मैदान पर जवाब दिया। फिर भी, उनका करियर अंत तक चयनकर्ताओं की प्राथमिकताओं में उतार-चढ़ाव का शिकार रहा, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय चयन प्रक्रिया में 'संकटमोचक' की भूमिका को पर्याप्त मूल्य नहीं मिलता। उनकी अजेय कप्तानी का रिकॉर्ड किसी भी नियमित कप्तान से तुलनीय है, फिर भी वे कभी स्थायी नेतृत्व के दावेदार नहीं बने — यह भारतीय क्रिकेट प्रशासन पर एक अनुत्तरित सवाल छोड़ता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजिंक्य रहाणे ने संन्यास कब लिया?
अजिंक्य रहाणे ने 30 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। इसके साथ ही भारतीय टेस्ट क्रिकेट में उनके लंबे और यादगार करियर का अंत हो गया।
रहाणे ने लॉर्ड्स पर क्या खास किया था?
2014 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में रहाणे ने 154 गेंदों में 103 रन बनाए, जब भारत 145 पर 7 विकेट खो चुका था। इस पारी की बदौलत भारत ने 95 रनों से जीत दर्ज की और 28 साल बाद लॉर्ड्स पर विजय पताका फहराई।
मेलबर्न टेस्ट 2020-21 में रहाणे की भूमिका क्यों ऐतिहासिक मानी जाती है?
एडिलेड में 36 रनों पर ऑलआउट होने की शर्मनाक हार के बाद रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न में 112 रन की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई। उनकी अगुवाई में भारत ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2-1 से जीती, जो भारतीय क्रिकेट की सबसे ऐतिहासिक सीरीज जीतों में गिनी जाती है।
रहाणे का कप्तानी रिकॉर्ड कैसा रहा?
बतौर टेस्ट कप्तान रहाणे ने 6 मैचों में भारत की अगुवाई की — 4 जीत और 2 ड्रॉ। उनकी कप्तानी में भारत ने एक भी टेस्ट नहीं गँवाया, जो उन्हें भारत के सबसे सफल अंशकालिक कप्तानों में शामिल करता है।
रहाणे का दोनों पारियों में शतक का रिकॉर्ड क्यों खास है?
2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक ही टेस्ट की पहली पारी में 127 और दूसरी पारी में 100 नाबाद रन बनाकर रहाणे ने दुर्लभ उपलब्धि हासिल की। नंबर पाँच या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए एक टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले वे एकमात्र भारतीय बल्लेबाज हैं।
राष्ट्र प्रेस
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