सहवाग की सलाह: रहाणे की 'जलन' टिप्पणी पर टकराव से बचें
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने खिलाड़ियों को यह सलाह दी है कि वे आईपीएल 2026 के दौरान अजिंक्य रहाणे की 'जलन' वाली टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने के बजाय बेवजह के टकराव से बचें। सहवाग का मानना है कि ऐसी बहसों में शामिल होना बेकार है, विशेषकर तब जब कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) पर सभी की निगाहें हैं, क्योंकि इस सीजन में उनकी शुरुआत बिना किसी जीत के हुई है।
अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में केकेआर ने अब तक 3 मैचों में से 2 गंवाए हैं, जबकि एक मैच बारिश के कारण रद्द हो गया। इस बीच, रहाणे ने 3 पारियों में 148.21 की स्ट्राइक रेट से 83 रन बनाए हैं। उन्होंने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 67 रन बनाए, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 8 रन की पारी खेली। बारिश से रद्द हुए मैच में रहाणे ने नाबाद 8 रन बनाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब रहाणे से उनकी स्ट्राइक रेट के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए आलोचकों को 'जलनखोर' कहा। उनका यह तीखा जवाब उनकी सामान्य शांत और संयमित छवि के विपरीत था।
केकेआर के अभियान के शुरुआती मैच के बाद, रहाणे ने यह सवाल बड़े धैर्य से संभाला कि कैमरून ग्रीन को गेंदबाज के रूप में क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यह निर्णय क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) के दिशा-निर्देशों से प्रभावित है। सहवाग ने इस जवाब को स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने लहजे में असंगति की ओर इशारा किया।
सहवाग ने 'क्रिकबज' से कहा, "मुझे नहीं लगता कि खिलाड़ियों को इस तरह की बातें करनी चाहिए। मुझे पता है कि वह कप्तान हैं और उनसे पूछा गया था कि कैमरून ग्रीन गेंदबाजी क्यों नहीं कर रहे हैं। उनके पास इसका कोई सीधा जवाब नहीं था, इसलिए उन्होंने कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से पूछो।"
उन्होंने कहा, "मैं यह समझ सकता हूं, लेकिन अगर कोई मेरे स्ट्राइक रेट या बल्लेबाजी के तरीके पर सवाल उठा रहा है, तो लोग आपकी प्रशंसा भी करेंगे और आपकी आलोचना भी, लेकिन आपको दोनों ही मामलों में तटस्थ रहना चाहिए। ऐसी लड़ाइयों में पड़ने की क्या आवश्यकता है?"
सहवाग ने भारत के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और बॉलीवुड के दिग्गज अमिताभ बच्चन का उदाहरण देते हुए कहा कि अक्सर चुप रहना, पलटकर जवाब देने से ज्यादा प्रभावी होता है। उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि वे आलोचकों को जवाब दे रहे हैं, लेकिन बच्चन साहब ने भी कभी अपने आलोचकों को जवाब नहीं दिया। तेंदुलकर से बड़ा उदाहरण कोई हो नहीं सकता। मुझे लगता है कि इंसान को चुप रहना चाहिए। एक शतक लगाओ और सब चुप हो जाएंगे। शांत रहो और अपना काम करो। और क्या? मुझे नहीं लगता कि इन बातों का जवाब देना जरूरी है।"