NSE IPO सब्सक्रिप्शन का आखिरी दिन: GMP गिरकर ₹59 पर, इश्यू प्राइस से सिर्फ 3.31% प्रीमियम
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का सोमवार, 21 सितंबर 2026 को अंतिम दिन है, लेकिन इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगातार दबाव में है और अब ₹59 प्रति शेयर पर आ गया है — जो इश्यू प्राइस का महज 3.31 प्रतिशत प्रीमियम है। बाज़ार रिपोर्टों के अनुसार, 11 सितंबर को प्राइस बैंड के ऐलान के समय जीएमपी ₹218 प्रति शेयर था, तब से यह तेज़ी से लुढ़क चुका है।
जीएमपी में गिरावट का सफर
जब 17 सितंबर को एनएसई आईपीओ के लिए सब्सक्रिप्शन खुला, उस दिन जीएमपी ₹142 प्रति शेयर यानी 7.96 प्रतिशत था। एक सप्ताह के भीतर यह आधे से भी कम होकर ₹59 पर आ गया है। यह गिरावट निवेशकों की घटती उत्साह को दर्शाती है, जो मुख्यतः कंपनी के कमज़ोर वित्तीय आँकड़ों से जुड़ी है।
गौरतलब है कि जीएमपी एक अनाधिकारिक संकेतक है, जो इश्यू प्राइस से ऊपर बाज़ार द्वारा लगाए जा रहे प्रीमियम को दर्शाता है। विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि यह लिस्टिंग प्रीमियम की कोई गारंटी नहीं है।
आईपीओ की संरचना और इश्यू साइज़
एनएसई आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर निर्धारित किया गया है। ऊपरी बैंड के अनुसार, इसका कुल इश्यू साइज़ ₹22,561.57 करोड़ है, जिसमें 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।
यह संपूर्ण आईपीओ ऑफर-फॉर-सेल (OFS) है, जिसका अर्थ है कि इश्यू से जुटाई गई समस्त राशि मौजूदा निवेशकों के पास जाएगी — कंपनी के खाते में कोई नई पूँजी नहीं आएगी। यह पहलू कुछ संस्थागत निवेशकों की हिचकिचाहट का एक कारण बताया जा रहा है।
वित्तीय प्रदर्शन: चिंता का असली स्रोत
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता एनएसई का हालिया वित्तीय प्रदर्शन है। वित्त वर्ष 2026 में परिचालन से आय ₹16,601.31 करोड़ रही, जो वित्त वर्ष 2025 की ₹17,140.67 करोड़ की तुलना में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है।
इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि कंपनी के राजस्व का मुख्य स्तंभ — ट्रांजैक्शन चार्जेज — भी दबाव में है। यह मद ₹13,635.76 करोड़ से घटकर ₹13,057.01 करोड़ पर आ गई, जो सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की गिरावट है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पूँजी बाज़ार में खुदरा भागीदारी ऐतिहासिक ऊँचाई पर मानी जाती है — यानी वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद राजस्व घटना एक संरचनात्मक प्रश्न खड़ा करता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, पूरी तरह OFS आधारित इश्यू और गिरते जीएमपी का संयोजन निवेशकों को सतर्क कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब कंपनी खुद नई पूँजी नहीं जुटा रही, तो लिस्टिंग के बाद शेयर मूल्य को सहारा देने वाला विकास-प्रेरित कथानक कमज़ोर पड़ जाता है।
हालाँकि, एनएसई का एकाधिकार-जैसा बाज़ार स्थान और उसकी नियामकीय पहचान दीर्घकालिक निवेशकों के लिए आकर्षण बनाए हुए है। अंतिम सब्सक्रिप्शन आँकड़े आज शाम उपलब्ध होंगे, जो लिस्टिंग की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण होंगे।