NSE IPO GMP लिस्टिंग से पहले ₹43 पर आया, 2.41% प्रीमियम के साथ सीमित लाभ के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 24 सितंबर 2026 को होने वाली BSE लिस्टिंग से ठीक एक दिन पहले घटकर ₹43 प्रति शेयर पर आ गया है, जो लिस्टिंग पर सीमित मुनाफ़े के संकेत दे रहा है। ताज़ा GMP के आधार पर शेयर की अनुमानित लिस्टिंग कीमत ₹1,828 प्रति शेयर आँकी जा रही है — आईपीओ के ऊपरी इश्यू प्राइस ₹1,785 की तुलना में यह महज़ 2.41 प्रतिशत का प्रीमियम है।
जीएमपी में गिरावट का क्रम
ग्रे मार्केट में निवेशकों का उत्साह पिछले कुछ दिनों में तेज़ी से ठंडा पड़ा है। आईपीओ खुलने से पहले GMP ₹145 प्रति शेयर के करीब पहुँच गया था, जिससे 8 प्रतिशत से अधिक लिस्टिंग गेन की उम्मीद थी। हालाँकि इश्यू बंद होने के बाद से प्रीमियम लगातार नरम होता रहा है।
गौरतलब है कि GMP एक अनौपचारिक बाज़ार संकेतक है और यह वास्तविक लिस्टिंग मूल्य की गारंटी नहीं देता। विशेषज्ञों का कहना है कि लिस्टिंग के दिन की बाज़ार परिस्थितियाँ और संस्थागत माँग, अंतिम कीमत तय करने में कहीं अधिक निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
सब्सक्रिप्शन और आवंटन के आंकड़े
17 सितंबर से 21 सितंबर 2026 तक खुले इस आईपीओ को निवेशकों की मज़बूत प्रतिक्रिया मिली। ₹22,568.94 करोड़ के इस सार्वजनिक निर्गम को कुल मिलाकर 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 50.58 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए आवेदन प्राप्त हुए। कुल बोलियों का मूल्य ₹90,287.33 करोड़ रहा।
शेयरों का आवंटन 22 सितंबर 2026 को पूरा किया गया। निवेशक श्रेणियों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने सबसे अधिक रुचि दिखाई — इस हिस्से को 12.68 गुना सब्सक्राइब किया गया। गैर-संस्थागत निवेशक (NII) श्रेणी को 6.55 गुना और रिटेल निवेशक (RII) श्रेणी को 1.39 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।
आईपीओ की संरचना
NSE ने इस आईपीओ के लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) था, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारकों ने 12.64 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे। इस आईपीओ में कंपनी ने कोई नया शेयर जारी नहीं किया, यानी प्राप्त राशि सीधे बिकवाली करने वाले शेयरधारकों के पास जाएगी — न कि कंपनी के खाते में।
NSE का कारोबारी मॉडल और बाज़ार हिस्सेदारी
NSE की आय का बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से आता है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन शुल्क से प्राप्त हुआ, जिसमें अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग का योगदान परिचालन आय में 60 प्रतिशत से अधिक रहा — जो डेरिवेटिव कारोबार पर कंपनी की गहरी निर्भरता को उजागर करता है।
बाज़ार हिस्सेदारी के मामले में NSE की पकड़ काफी मज़बूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में एक्सचेंज की इक्विटी कैश सेगमेंट में लगभग 93 प्रतिशत, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.79 प्रतिशत, करेंसी फ्यूचर्स में 99.48 प्रतिशत और इक्विटी ऑप्शंस में प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर 74.71 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। हालाँकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इक्विटी ऑप्शंस बाज़ार में यह हिस्सेदारी घटकर 68.48 प्रतिशत रह गई, जो बढ़ती प्रतिस्पर्धा की ओर संकेत करती है।
आगे क्या देखना होगा
लिस्टिंग के दिन 24 सितंबर 2026 को BSE पर NSE के शेयर की चाल पर निवेशकों की नज़र रहेगी। GMP में गिरावट निराशाजनक संकेत है, लेकिन संस्थागत निवेशकों की मज़बूत भागीदारी लिस्टिंग को स्थिर रख सकती है। यह देखना होगा कि ऑप्शंस कारोबार में घटती बाज़ार हिस्सेदारी दीर्घकालिक मूल्यांकन पर किस प्रकार असर डालती है।