26 जून 2026
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क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान को बड़ा झटका दिया?

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क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान को बड़ा झटका दिया?

सारांश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान को उनके फर्जी पासपोर्ट और पैन कार्ड मामलों में बड़ा झटका दिया है। जानिए इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी और इसका प्रभाव क्या होगा।

मुख्य बातें

अब्दुल्ला आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका मिला।
दो याचिकाएं खारिज हुईं।
फर्जी पासपोर्ट और पैन कार्ड से संबंधित मामले हैं।
रामपुर कोर्ट में ट्रायल जारी रहेगा।
जस्टिस समीर जैन ने फैसला सुनाया।

प्रयागराज, 23 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता और पूर्व विधायक आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान को एक बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

अब्दुल्ला आजम खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो याचिकाएं प्रस्तुत की थीं। पहला मामला उनके फर्जी पासपोर्ट से संबंधित है और दूसरा मामला दो पैन कार्ड बनवाने से जुड़ा है।

इन मामलों में अब्दुल्ला आजम ने हाईकोर्ट का सहारा लिया और रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे ट्रायल की संपूर्ण कार्यवाही को रद्द करने की मांग की।

पक्षों की सुनवाई के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जुलाई 2025 को दोनों याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस समीर जैन की एकल बेंच ने बुधवार को निर्णय सुनाते हुए अब्दुल्ला आजम खान की दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं। याचिकाएं खारिज होने के बाद, अब एमपी-एमएलए कोर्ट, रामपुर में दोनों मामलों का ट्रायल आगे बढ़ेगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील शरद शर्मा ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह मामला अब्दुल्ला आजम खान के फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड बनवाने से संबंधित है। हाईकोर्ट में दो याचिकाएं प्रस्तुत की गई थीं। 1 जुलाई 2025 को जस्टिस समीर जैन की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रखा था। अदालत ने उनकी दोनों याचिकाएं निरस्त कर दीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अब्दुल्ला आजम खान की याचिकाएं क्यों खारिज हुईं?
याचिकाएं फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड बनाने से संबंधित थीं।
हाईकोर्ट का फैसला कब आया?
हाईकोर्ट ने 23 जुलाई को अपना फैसला सुनाया।
क्या अब्दुल्ला आजम खान की कानूनी स्थिति पर कोई असर पड़ेगा?
हां, हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनके मामलों का ट्रायल जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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