द हेग में PM मोदी ने प्रवासी भारतीयों को किया संबोधित: '21वीं सदी का भारत अवसरों की भूमि है'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 मई 2026 को नीदरलैंड के द हेग में प्रवासी भारतीयों के एक विशाल समारोह को संबोधित किया और कहा कि 21वीं सदी का भारत अवसरों की भूमि है — तकनीक से संचालित और मानवता से प्रेरित। कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लोगों ने 'मोदी-मोदी', 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों से सभागार गुंजा दिया।
भाषण की मुख्य बातें
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ट्यूलिप और कमल की उपमा देते हुए कहा कि नीदरलैंड जिस तरह ट्यूलिप के लिए जाना जाता है, उसी तरह भारत कमल के लिए। उन्होंने कहा, 'ट्यूलिप और कमल, दोनों ही हमें यह सिखाते हैं कि चाहे जड़ें पानी में हों या जमीन में, व्यक्ति को सुंदरता और शक्ति — दोनों ही प्राप्त होती हैं।' मोदी ने असम और बंगाल की झालमुड़ी का भी जिक्र किया और कहा कि यह स्वाद अब नीदरलैंड तक पहुँच चुका है — एक सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक।
भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाएँ
मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत ने हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी और सफल AI समिट की मेज़बानी की, और उससे पहले G-20 शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि भारत ओलंपिक्स की मेज़बानी करना चाहता है, एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनना चाहता है, ग्रीन एनर्जी में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है और दुनिया का ग्रोथ इंजन बनने का लक्ष्य रखता है।
वैश्विक चुनौतियों पर चिंता
प्रधानमंत्री ने वैश्विक संकटों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पहले कोरोना महामारी आई, फिर दुनिया भर में युद्ध शुरू हो गए और अब ऊर्जा संकट गहरा रहा है। उनके अनुसार, यह दशक दुनिया के लिए 'आपदाओं का दशक' बनता जा रहा है और यदि इन परिस्थितियों को शीघ्र नहीं बदला गया, तो बीते दशकों की तमाम उपलब्धियाँ खतरे में पड़ सकती हैं।
प्रवासी भारतीयों की सांस्कृतिक विरासत की सराहना
मोदी ने प्रवासी भारतीयों की सांस्कृतिक निष्ठा की प्रशंसा करते हुए कहा कि मानवता के इतिहास में अनेक संस्कृतियाँ समय के साथ मिट गईं, लेकिन भारत की विविध संस्कृति आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। उन्होंने कहा, 'पीढ़ियाँ बदल गईं, देश बदल गए, परिवेश बदल गए, लेकिन परिवार के संस्कार नहीं बदले, अपनापन नहीं बदला, क्योंकि आपने अपने पुरखों की भाषा को छोड़ा नहीं।' उन्होंने इसे 'अत्यंत सराहनीय' बताया।
आगे की दिशा
यह संबोधन प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा का एक अहम हिस्सा रहा। प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ इस तरह का सीधा संवाद भारत की 'डायस्पोरा कूटनीति' को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से भी उल्लेखनीय है।