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क्या यूसीसी केवल कानून है, या समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव?

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क्या यूसीसी केवल कानून है, या समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव?

सारांश

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के एक साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे एक सशक्त नींव बताया। क्या यह सच में समानता और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है? जानें इस ऐतिहासिक पहल के बारे में।

मुख्य बातें

महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे।
सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा।
विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में तीव्रता आई है।
कानूनी बदलावों से न्याय की सुलभता बढ़ी है।
भाषाई सहायता प्रदान की जा रही है।

देहरादून, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून को एक वर्ष पूरा होने पर इसे 'समान नागरिक संहिता दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू हुई यह ऐतिहासिक पहल केवल एक कानून नहीं है, बल्कि समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की ठोस नींव है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाना है। यह व्यवस्था विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों में महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करते हुए उन्हें समान और न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करती है।"

उन्होंने आगे कहा, "पिछले एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत विवाह पंजीकरण और नागरिक सेवाओं में महत्वपूर्ण तेजी आई है। राज्य सरकार की ओर से 23 भाषाओं में सहायता और एआई-आधारित सपोर्ट की सुविधा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक इस सकारात्मक परिवर्तन का लाभ उठा सके।"

इससे पहले, सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून में एक महत्वपूर्ण संशोधन हुआ। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी।

इसमें, आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 लागू किया गया है। धारा 12 के अंतर्गत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है।

संशोधन के जरिए विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाना संभव हो गया है। विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी व विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक की ओर से समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान किया गया है।

अनुसूची-2 में 'विधवा' शब्द के स्थान पर 'जीवनसाथी' शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है। विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है। यह पहल देश भर में समानता और पारदर्शिता के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यूसीसी का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में समानता प्रदान करना है।
यूसीसी के अंतर्गत कौन-कौन से विषय शामिल हैं?
यूसीसी विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार के मुद्दों को शामिल करता है।
यूसीसी के माध्यम से कौनसी सेवाएं तेज हुई हैं?
यूसीसी के अंतर्गत विवाह पंजीकरण और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है।
राष्ट्र प्रेस
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