क्या यूसीसी की घोषणा से लेकर प्रभावी क्रियान्वयन तक गौरव की अनुभूति हुई है?

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क्या यूसीसी की घोषणा से लेकर प्रभावी क्रियान्वयन तक गौरव की अनुभूति हुई है?

सारांश

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का प्रभावी क्रियान्वयन, सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे लागू करने के लिए किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला है। जानें इस कानून के पीछे की सोच और इसके सामाजिक प्रभाव के बारे में।

Key Takeaways

  • समान नागरिक संहिता ने उत्तराखंड में सामाजिक न्याय को बढ़ावा दिया है।
  • महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा में यह कानून महत्वपूर्ण है।
  • यूसीसी का उद्देश्य कुप्रथाओं को समाप्त करना है, न कि धर्म की मान्यताओं को बदलना।
  • लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
  • समान नागरिक संहिता का प्रभाव पूरे देश में समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

देहरादून, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित पहले 'समान नागरिक संहिता दिवस' को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने समान नागरिक संहिता को विकसित करने वाली समिति के सदस्यों, कुशल कार्यान्वयन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी का भी सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने यूसीसी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने समारोह में कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा। इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संविधानिक मूल्यों की स्थापना संभव हुई है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपरा हमेशा समरसता और समानता की वाहक रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है 'समोहम सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योस्ति न प्रियः', जिसका अर्थ है कि मैं सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता हूं। यही सनातन संस्कृति की महानता है, जिसने सदियों से दुनिया को समानता, न्याय और मानवता का मार्ग दिखाया है।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और सभी संविधान निर्माताओं ने 'समान नागरिक संहिता' को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में समाहित किया था। उनका मानना था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। इसी कारण, प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले, अपने दृष्टिपत्र में 'समान नागरिक संहिता' को लागू करने का संकल्प लिया। देवभूमि की जनता ने भी इस 'देवकार्य' के लिए भाजपा को अपार समर्थन दिया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्होंने सत्ता संभालते ही पहले दिन से ही उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी क्रम में 7 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता विधेयक को राज्य विधानसभा में पारित कर राष्ट्रपति को भेजा गया। इसे 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। इसके बाद सभी आवश्यक नियमावली एवं प्रक्रियाओं को पूरी कर राज्य सरकार ने 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को विधिवत रूप से लागू कर दिया।

उन्होंने कहा कि कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी। यूसीसी लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं और प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत हुई है। अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया। यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात कई दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण, यूसीसी को लागू करने का साहस नहीं दिखाया गया। जबकि दुनिया के सभी विकसित और सभ्य देशों, साथ ही प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह तो समाज की कुप्रथाओं को खत्म करके सभी नागरिकों में 'समानता से समरसता' स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है। इस कानून के माध्यम से किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को नहीं बदला गया है, केवल कुप्रथाओं को समाप्त किया गया है। यूसीसी में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद एवं उत्तराधिकार आदि से संबंधित नियमों को एक समान किया गया है।

सीएम धामी ने कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए युवक-युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार उनके माता-पिता या अभिभावक को देगा, यह जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी। लिव-इन के दौरान जन्में बच्चों को उस युगल का बच्चा मानते हुए, उन्हें जैविक संतान के समान सभी अधिकार प्रदान किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्होंने समान नागरिक संहिता को घोषणा से लेकर धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता के माध्यम से नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं की पहुंच को और अधिक सरल, सुलभ और पारदर्शी बना दिया है। जहां यूसीसी लागू होने से पहले हमारे राज्य में औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण होता था, वह संख्या आज बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक हो गई है। राज्य की 30 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। पिछले एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत लगभग 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण भी किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में राज्य सरकार ने यूसीसी में आवश्यक संशोधनों से संबंधित विधेयक पारित किया था, जिसे एक दिन पहले ही राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके अंतर्गत विवाह के समय यदि अपनी पहचान छिपाने या गलत तथ्य बताने पर ऐसे विवाहों को निरस्त करने का प्रावधान है। इसके साथ ही, विवाह एवं लिव-इन संबंधों में किसी भी प्रकार के बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जनसंघ की स्थापना के समय से ही कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति और समान नागरिक संहिता को लागू करने का संकल्प लिया था, अब यह संकल्प साकार हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सिद्ध हुआ है कि मजबूत फैसले देश को तोड़ते नहीं, बल्कि जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर समान नागरिक संहिता को लेकर भ्रांतियाँ फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर कभी इसे मूल निवासी तो कभी लिव-इन पंजीकरण के बारे में भ्रमित किया गया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति राज्य का 'मूल निवासी' नहीं बन सकता। इसी प्रकार लिव-इन संबंध पंजीकरण का प्रावधान बहनों-बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार मां गंगा देवभूमि उत्तराखंड से निकलकर पूरे भारत को अभिसिंचित करती है, उसी प्रकार उत्तराखंड से निकलने वाली यह 'समान नागरिक संहिता' की धारा भी देश के अन्य राज्यों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अभी कुछ मामले बहुविवाह और विवाह विच्छेद से संबंधित सामने आए हैं, ऐसे मामलों में अलग से प्रावधान करते हुए, सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में अमेरिका के एक एनजीओ ने उन्हें हेट स्पीच का जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन यदि धर्मांतरण, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ बोलना हेट स्पीच है तो यह तो अच्छा ही है।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर, सुरेश गड़िया, बृज भूषण गैरोला, सचिव गृह शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, यूसीसी समिति के सदस्य पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह, दून विवि की वीसी प्रो सुरेखा डंगवाल, मनु गौड़, अजय मिश्रा, विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

Point of View

जो समाज में समानता और न्याय की स्थापना की दिशा में उठाया गया है। यह कदम न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

समान नागरिक संहिता क्या है?
समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों के लिए समान कानूनों का एक सेट है, जिसमें विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से संबंधित नियम शामिल हैं।
यूसीसी के लागू होने से क्या लाभ हुए हैं?
यूसीसी के लागू होने से सामाजिक न्याय और समानता बढ़ी है, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा में।
क्या यूसीसी किसी धर्म के खिलाफ है?
नहीं, यूसीसी का उद्देश्य समाज की कुप्रथाओं को समाप्त करना है, न कि किसी धर्म की मूल मान्यताओं को बदलना।
क्या लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य है?
हाँ, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य है, जिससे सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा हो सके।
यूसीसी का प्रभाव सामाजिक न्याय पर क्या है?
यूसीसी का प्रभाव सामाजिक न्याय पर सकारात्मक है, जिससे सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर मिलते हैं।
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