राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक पारित, विपक्ष ने किया वॉकआउट; 8 लाख सहकारी संस्थाओं को मिलेगी नई ताकत
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा ने 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) अधिनियम, 1962 में संशोधन से जुड़ा विधेयक पारित कर दिया। सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा सदन में पेश किए गए इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए। यह विधेयक देश के 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विधेयक की मुख्य विशेषताएँ
मंत्री मोहोल ने सदन में बताया कि NCDC पिछले छह दशकों से कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, भंडारण और ग्रामीण आजीविका को वित्तीय सहायता देता आया है। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र में नई तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और लॉजिस्टिक्स के नए अवसर उभर रहे हैं, इसलिए 1962 के अधिनियम को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, 'पिछले केवल पाँच वर्षों में 163 से अधिक पहल की गई हैं' और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम का कार्यक्षेत्र बढ़ाना इन्हीं पहलों का हिस्सा है।
सहकारी क्षेत्र में प्रगति के आँकड़े
मोहोल ने बताया कि देश में फिलहाल 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएँ सक्रिय हैं, जिनसे करीब 30 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं। ₹3,000 करोड़ की लागत से देश की 80,000 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा, 2 लाख नई बहुउद्देश्यीय पैक्स बनाने का लक्ष्य है, जिनमें से अब तक करीब 40,000 का गठन हो चुका है।
मंत्री ने यह भी बताया कि 'स्वेत क्रांति 2.0' के तहत दूध उत्पादन को प्रतिदिन 660 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 1,000 लाख किलोग्राम करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को बीज से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला उपलब्ध कराने के लिए तीन नई बहुराज्यीय सहकारी समितियाँ गठित की गई हैं, जिनसे अब तक 70,000 से अधिक सहकारी समितियाँ जुड़ चुकी हैं।
विपक्ष की आपत्तियाँ और सरकार का जवाब
विपक्षी दलों ने राज्यों की स्वायत्तता पर आशंका जताते हुए सदन से वॉकआउट किया। इस पर मोहोल ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का कभी भी राज्यों की सहकारी नीतियों में हस्तक्षेप का इरादा नहीं रहा। उन्होंने पैक्स कंप्यूटरीकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि यह योजना गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल में भी समान रूप से लागू की जा रही है — बिना यह देखे कि किस राज्य में किस दल की सरकार है।
मोहोल ने कहा, 'हमारी नीति स्पष्ट है — सहकारिता को बढ़ावा देना और इसके माध्यम से किसानों के जीवन को समृद्ध करना।'
नई संस्थाएँ और मानव संसाधन विकास
शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक शीर्ष संगठन गठित किया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 'सहकार सारथी' की स्थापना की गई है। सहकारी क्षेत्र को प्रशिक्षित मानव संसाधन देने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से अगले पाँच वर्षों में 17 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा सहकारिता की भावना पर आधारित भारत टैक्सी सेवा भी शुरू की गई है।
आगे की राह
यह विधेयक अब लोकसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। गौरतलब है कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद से यह क्षेत्र नीतिगत प्राथमिकता में आया है और यह संशोधन उस दिशा में एक और संरचनात्मक कदम है। विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद, सरकार का कहना है कि यह विधेयक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के हित में दीर्घकालिक बदलाव लाएगा।