12 अगस्त 2026
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राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक पारित, विपक्ष ने किया वॉकआउट; 8 लाख सहकारी संस्थाओं को मिलेगी नई ताकत

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राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक पारित, विपक्ष ने किया वॉकआउट; 8 लाख सहकारी संस्थाओं को मिलेगी नई ताकत

सारांश

राज्यसभा ने 12 अगस्त को NCDC संशोधन विधेयक पारित किया — विपक्ष के वॉकआउट के बीच। 8 लाख सहकारी संस्थाओं और 30 करोड़ सदस्यों को जोड़ने वाले इस क्षेत्र को आधुनिक बनाने की कोशिश में सरकार ने 163 पहलें गिनाईं, लेकिन राज्यों की स्वायत्तता पर सवाल अभी भी बने हैं।

मुख्य बातें

राज्यसभा ने 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन विधेयक पारित किया।
कांग्रेस और सहयोगी विपक्षी दलों ने राज्यों की स्वायत्तता की आशंका जताते हुए सदन से वॉकआउट किया।
देश में 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएँ सक्रिय हैं, जिनसे 30 करोड़ सदस्य जुड़े हैं।
₹3,000 करोड़ की लागत से 80,000 पैक्स का कंप्यूटरीकरण; 2 लाख नई पैक्स का लक्ष्य, अब तक 40,000 गठित।
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के माध्यम से अगले पाँच वर्षों में 17 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने की योजना।
'स्वेत क्रांति 2.0' के तहत दूध उत्पादन 660 लाख किग्रा/दिन से बढ़ाकर 1,000 लाख किग्रा/दिन करने का लक्ष्य।

राज्यसभा ने 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) अधिनियम, 1962 में संशोधन से जुड़ा विधेयक पारित कर दिया। सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा सदन में पेश किए गए इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए। यह विधेयक देश के 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विधेयक की मुख्य विशेषताएँ

मंत्री मोहोल ने सदन में बताया कि NCDC पिछले छह दशकों से कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, भंडारण और ग्रामीण आजीविका को वित्तीय सहायता देता आया है। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र में नई तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और लॉजिस्टिक्स के नए अवसर उभर रहे हैं, इसलिए 1962 के अधिनियम को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, 'पिछले केवल पाँच वर्षों में 163 से अधिक पहल की गई हैं' और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम का कार्यक्षेत्र बढ़ाना इन्हीं पहलों का हिस्सा है।

सहकारी क्षेत्र में प्रगति के आँकड़े

मोहोल ने बताया कि देश में फिलहाल 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएँ सक्रिय हैं, जिनसे करीब 30 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं। ₹3,000 करोड़ की लागत से देश की 80,000 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा, 2 लाख नई बहुउद्देश्यीय पैक्स बनाने का लक्ष्य है, जिनमें से अब तक करीब 40,000 का गठन हो चुका है।

मंत्री ने यह भी बताया कि 'स्वेत क्रांति 2.0' के तहत दूध उत्पादन को प्रतिदिन 660 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 1,000 लाख किलोग्राम करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को बीज से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला उपलब्ध कराने के लिए तीन नई बहुराज्यीय सहकारी समितियाँ गठित की गई हैं, जिनसे अब तक 70,000 से अधिक सहकारी समितियाँ जुड़ चुकी हैं।

विपक्ष की आपत्तियाँ और सरकार का जवाब

विपक्षी दलों ने राज्यों की स्वायत्तता पर आशंका जताते हुए सदन से वॉकआउट किया। इस पर मोहोल ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का कभी भी राज्यों की सहकारी नीतियों में हस्तक्षेप का इरादा नहीं रहा। उन्होंने पैक्स कंप्यूटरीकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि यह योजना गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल में भी समान रूप से लागू की जा रही है — बिना यह देखे कि किस राज्य में किस दल की सरकार है।

मोहोल ने कहा, 'हमारी नीति स्पष्ट है — सहकारिता को बढ़ावा देना और इसके माध्यम से किसानों के जीवन को समृद्ध करना।'

नई संस्थाएँ और मानव संसाधन विकास

शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक शीर्ष संगठन गठित किया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 'सहकार सारथी' की स्थापना की गई है। सहकारी क्षेत्र को प्रशिक्षित मानव संसाधन देने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से अगले पाँच वर्षों में 17 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा सहकारिता की भावना पर आधारित भारत टैक्सी सेवा भी शुरू की गई है।

आगे की राह

यह विधेयक अब लोकसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। गौरतलब है कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद से यह क्षेत्र नीतिगत प्राथमिकता में आया है और यह संशोधन उस दिशा में एक और संरचनात्मक कदम है। विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद, सरकार का कहना है कि यह विधेयक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के हित में दीर्घकालिक बदलाव लाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विपक्ष की 'राज्यों की स्वायत्तता' वाली चिंता को महज राजनीतिक वॉकआउट कहकर खारिज करना उचित नहीं होगा — सहकारिता संविधान की समवर्ती सूची का विषय है और केंद्रीय वित्तपोषण के साथ नीतिगत प्रभाव की आशंका स्वाभाविक है। सरकार के आँकड़े प्रभावशाली हैं — 8 लाख संस्थाएँ, 30 करोड़ सदस्य, 163 पहलें — लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये पहलें ग्रामीण आय में मापनीय वृद्धि में तब्दील हो रही हैं। 2 लाख नई पैक्स के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 40,000 का गठन यह बताता है कि क्रियान्वयन की गति घोषणाओं से पीछे है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) संशोधन विधेयक क्या है?
यह विधेयक NCDC अधिनियम, 1962 में संशोधन करता है, जिससे निगम का कार्यक्षेत्र बढ़ाया जा सके और सहकारी क्षेत्र में नई तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात व लॉजिस्टिक्स के उभरते अवसरों को समाहित किया जा सके। इसे 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा ने पारित किया।
विपक्ष ने इस विधेयक पर वॉकआउट क्यों किया?
कांग्रेस और सहयोगी दलों ने राज्यों की सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता पर केंद्रीय हस्तक्षेप की आशंका जताते हुए वॉकआउट किया। हालाँकि सरकार ने यह कहते हुए इन आशंकाओं को खारिज किया कि पैक्स कंप्यूटरीकरण जैसी योजनाएँ सभी राज्यों में बिना राजनीतिक भेदभाव के लागू हो रही हैं।
इस विधेयक से देश के सहकारी क्षेत्र पर क्या असर होगा?
विधेयक से NCDC का दायरा बढ़ेगा, जिससे देश की 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं और उनसे जुड़े 30 करोड़ सदस्यों को बेहतर वित्तीय सहायता और आधुनिक व्यावसायिक अवसर मिल सकेंगे। कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन और ग्रामीण आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
पैक्स कंप्यूटरीकरण योजना क्या है और इसकी प्रगति कहाँ तक है?
इस योजना के तहत देश की 80,000 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) का कंप्यूटरीकरण ₹3,000 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। इसके अलावा 2 लाख नई बहुउद्देश्यीय पैक्स बनाने का लक्ष्य है, जिनमें से अब तक करीब 40,000 का गठन हो चुका है।
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की क्या भूमिका होगी?
यह विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र को प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से अगले पाँच वर्षों में 17 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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