राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक पर हंगामा: खड़गे बोले- अमित शाह करें पेश, नड्डा ने विपक्ष को बताया गुमराह करने वाला
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा में 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए जाने के दौरान जबरदस्त हंगामा हुआ, जब विपक्ष ने आपत्ति जताई कि यह विधेयक गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की बजाय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। सत्ता पक्ष ने विपक्ष के इस ऐतराज को सिरे से खारिज करते हुए इसे सदन को गुमराह करने की कोशिश करार दिया।
विधेयक पेश करने की प्रक्रिया
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बुधवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि वे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करने वाले विधेयक को विचार और पारित करने के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। यह विधेयक पहले ही लोकसभा से पारित हो चुका है। मोहोल के इस वक्तव्य के बाद विधेयक पर विचार की प्रक्रिया आरंभ हुई।
विपक्ष का विरोध और हंगामा
विधेयक पेश होते ही सदन में विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर आगे आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। उपसभापति हरिवंश ने नारेबाजी कर रहे सांसदों से पहले अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया। इसके बाद राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की अनुमति मिली।
खड़गे ने कार्य सूची का हवाला देते हुए कहा कि यह विधेयक अमित शाह के नाम से सूचीबद्ध था, इसलिए उन्हें ही इसे प्रस्तुत करना चाहिए था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि कोई मंत्री किसी अनिवार्य कारण से अनुपस्थित हो तो उनका कोई सहयोगी विधेयक पेश कर सकता है, परंतु उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'हर रोज़ ऐसा नहीं होना चाहिए।' खड़गे ने उपसभापति से अनुरोध किया कि गृहमंत्री को सदन में बुलाया जाए।
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने खड़गे की टिप्पणी का तत्काल खंडन किया। नड्डा ने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और विपक्ष के आरोप सदन को गुमराह करने वाले हैं। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि चर्चा से तो 'उल्टा आप भाग रहे हैं।'
विधेयक का महत्व
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में यह संशोधन देश की सहकारी संस्थाओं के ढाँचे और वित्त पोषण से जुड़े प्रावधानों को अद्यतन करने के उद्देश्य से लाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार सहकारिता क्षेत्र को नीतिगत प्राथमिकता दे रही है और अमित शाह इस मंत्रालय की सीधी निगरानी करते हैं।
आगे क्या
विधेयक पर राज्यसभा में विचार और मतदान की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है। विपक्ष का रुख देखते हुए सदन में आगे भी तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि राज्यसभा इसे पारित कर देती है, तो विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून बन जाएगा।