12 अगस्त 2026
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राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक पर हंगामा: खड़गे बोले- अमित शाह करें पेश, नड्डा ने विपक्ष को बताया गुमराह करने वाला

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राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक पर हंगामा: खड़गे बोले- अमित शाह करें पेश, नड्डा ने विपक्ष को बताया गुमराह करने वाला

सारांश

राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया — खड़गे की माँग थी कि अमित शाह खुद विधेयक पेश करें, जबकि नड्डा ने विपक्ष को ही चर्चा से भागने वाला करार दिया। सदन में यह टकराव सहकारिता क्षेत्र की राजनीतिक संवेदनशीलता को उजागर करता है।

मुख्य बातें

सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया।
विपक्ष का आरोप — कार्य सूची के अनुसार विधेयक गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को पेश करना चाहिए था।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उपसभापति से अमित शाह को सदन में बुलाने का अनुरोध किया।
राज्यसभा नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों को गुमराह करने वाला बताया और कहा कि सरकार हर चर्चा के लिए तैयार है।
यह विधेयक लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है; राज्यसभा में विचार और मतदान की प्रक्रिया जारी है।

राज्यसभा में 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए जाने के दौरान जबरदस्त हंगामा हुआ, जब विपक्ष ने आपत्ति जताई कि यह विधेयक गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की बजाय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। सत्ता पक्ष ने विपक्ष के इस ऐतराज को सिरे से खारिज करते हुए इसे सदन को गुमराह करने की कोशिश करार दिया।

विधेयक पेश करने की प्रक्रिया

सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बुधवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि वे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करने वाले विधेयक को विचार और पारित करने के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। यह विधेयक पहले ही लोकसभा से पारित हो चुका है। मोहोल के इस वक्तव्य के बाद विधेयक पर विचार की प्रक्रिया आरंभ हुई।

विपक्ष का विरोध और हंगामा

विधेयक पेश होते ही सदन में विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर आगे आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। उपसभापति हरिवंश ने नारेबाजी कर रहे सांसदों से पहले अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया। इसके बाद राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की अनुमति मिली।

खड़गे ने कार्य सूची का हवाला देते हुए कहा कि यह विधेयक अमित शाह के नाम से सूचीबद्ध था, इसलिए उन्हें ही इसे प्रस्तुत करना चाहिए था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि कोई मंत्री किसी अनिवार्य कारण से अनुपस्थित हो तो उनका कोई सहयोगी विधेयक पेश कर सकता है, परंतु उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'हर रोज़ ऐसा नहीं होना चाहिए।' खड़गे ने उपसभापति से अनुरोध किया कि गृहमंत्री को सदन में बुलाया जाए।

सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया

राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने खड़गे की टिप्पणी का तत्काल खंडन किया। नड्डा ने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और विपक्ष के आरोप सदन को गुमराह करने वाले हैं। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि चर्चा से तो 'उल्टा आप भाग रहे हैं।'

विधेयक का महत्व

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में यह संशोधन देश की सहकारी संस्थाओं के ढाँचे और वित्त पोषण से जुड़े प्रावधानों को अद्यतन करने के उद्देश्य से लाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार सहकारिता क्षेत्र को नीतिगत प्राथमिकता दे रही है और अमित शाह इस मंत्रालय की सीधी निगरानी करते हैं।

आगे क्या

विधेयक पर राज्यसभा में विचार और मतदान की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है। विपक्ष का रुख देखते हुए सदन में आगे भी तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि राज्यसभा इसे पारित कर देती है, तो विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून बन जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु इसके पीछे एक गहरा राजनीतिक संदेश है — सहकारिता मंत्रालय को अमित शाह का 'व्यक्तिगत एजेंडा' बताने की कोशिश। खड़गे की माँग तकनीकी रूप से सही हो सकती है, लेकिन संसदीय परंपरा में किसी सहयोगी मंत्री द्वारा विधेयक प्रस्तुत करना असामान्य नहीं है। असली सवाल यह है कि विपक्ष ने विधेयक की विषयवस्तु पर बहस करने की बजाय प्रक्रिया को मुद्दा क्यों बनाया — जो संकेत देता है कि NCDC संशोधन की मूल धाराओं पर उसके पास ठोस वैकल्पिक तर्क सीमित हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCDC संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
यह राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में बदलाव लाने वाला विधेयक है, जो देश की सहकारी संस्थाओं के ढाँचे और वित्त पोषण प्रावधानों को अद्यतन करता है। यह लोकसभा से पारित होने के बाद 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया।
विपक्ष ने विधेयक पेश किए जाने पर आपत्ति क्यों जताई?
विपक्ष का कहना था कि कार्य सूची के अनुसार यह विधेयक गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नाम से सूचीबद्ध था, इसलिए उन्हें ही इसे प्रस्तुत करना चाहिए था। राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा पेश किए जाने को विपक्ष ने संसदीय परंपरा के विरुद्ध बताया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में क्या माँग रखी?
खड़गे ने उपसभापति हरिवंश से अनुरोध किया कि गृहमंत्री अमित शाह को सदन में बुलाया जाए और वे स्वयं विधेयक पेश करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई मंत्री अनिवार्य कारण से अनुपस्थित हो तो सहयोगी विधेयक पेश कर सकता है, परंतु यह हर रोज़ नहीं होना चाहिए।
जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?
राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों को गुमराह करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष खुद चर्चा से भाग रहा है।
NCDC संशोधन विधेयक आगे किस प्रक्रिया से गुज़रेगा?
लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में विचार और मतदान के लिए रखा गया है। राज्यसभा की मंज़ूरी के बाद यह राष्ट्रपति की स्वीकृति से कानून बन जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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