12 अगस्त 2026
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कानगांव में 16 अगस्त से आमरण अनशन: रैयत क्रांति संगठन की आठ मांगें, सरकार पर किसानों का दबाव

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कानगांव में 16 अगस्त से आमरण अनशन: रैयत क्रांति संगठन की आठ मांगें, सरकार पर किसानों का दबाव

सारांश

दौंड के कानगांव में 16 अगस्त से रैयत क्रांति संगठन का आमरण अनशन — कृषि पंप, बिजली, कर्ज माफी और औद्योगिक प्रदूषण की आठ मांगें लेकर। सरकार ने पहले समिति बनाने का वादा किया था, पर जमीन पर कुछ नहीं हुआ। संगठन ने चेताया: बातचीत नहीं तो पूरे महाराष्ट्र में आंदोलन।

मुख्य बातें

रैयत क्रांति संगठन ने 16 अगस्त 2026 से दौंड तालुका के कानगांव में आमरण अनशन की घोषणा की।
राज्य प्रवक्ता भानुदास शिंदे के नेतृत्व में आठ मांगें — कृषि पंप, बिजली, कर्ज माफी और फसल बीमा प्रमुख।
कानगांव की औद्योगिक कंपनियों पर प्रदूषण और स्थानीय भूमिपुत्रों को रोजगार न देने का आरोप।
पूर्व में सदाभाऊ खोत ने विधानसभा में मुद्दा उठाया था; सरकार ने स्थानीय समिति का वादा किया लेकिन क्रियान्वयन नहीं हुआ।
संगठन ने चेतावनी दी — सरकार ने बातचीत नहीं की तो आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में फैलाया जाएगा।

रैयत क्रांति संगठन ने 16 अगस्त 2026 से दौंड तालुका के कानगांव में आमरण अनशन की घोषणा की है। संगठन के राज्य प्रवक्ता भानुदास शिंदे ने 12 अगस्त को दौंड में आयोजित पत्रकार परिषद में यह ऐलान करते हुए कहा कि कृषि पंप, बिजली संकट, कर्ज माफी और फसल बीमा सहित आठ प्रमुख मांगों के पूरा होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

शिंदे ने आरोप लगाया कि 2014 के बाद से किसानों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में किसानों में आक्रोश चरम पर पहुँच गया है और 'अच्छे दिन' के वादे के बावजूद सरकारी स्तर पर ठोस राहत नहीं मिली। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई हिस्सों में किसान आंदोलन फिर से सक्रिय हो रहे हैं।

आठ मांगों का ब्यौरा

संगठन की मांगों में कृषि पंपों से जुड़े मुद्दों का समाधान सबसे प्राथमिक है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति में सुधार, कर्ज माफी और फसल बीमा के क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया है। शिंदे ने स्पष्ट किया, 'जब तक हमारी आठों मांगें पूरी नहीं होती हैं, खासकर कृषि पंप से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।'

प्रदूषण और रोजगार का मुद्दा

कानगांव क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक कंपनियों को लेकर भी संगठन ने गहरी नाराजगी जताई। शिंदे के अनुसार, इन उद्योगों से निकलने वाली धूल और प्रदूषित पानी के कारण खेती बर्बाद हो रही है और किसानों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय भूमिपुत्रों को इन कंपनियों में रोजगार नहीं मिल रहा और भारी वाहनों की आवाजाही से गाँव की सड़कें जर्जर हो गई हैं।

विधानसभा में उठा था मुद्दा, जमीन पर नहीं हुआ काम

गौरतलब है कि यह मुद्दा पहले सदाभाऊ खोत ने विधानसभा में उठाया था। उस समय राज्य सरकार ने क्षेत्र में नियंत्रण के लिए स्थानीय समिति गठित करने पर सहमति जताई थी, लेकिन संगठन का कहना है कि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह पहली बार नहीं है कि सरकारी आश्वासन के बाद भी क्रियान्वयन नहीं हुआ — आलोचकों का कहना है कि यह एक पुरानी प्रवृत्ति है।

आगे क्या होगा

शिंदे ने चेतावनी दी कि यदि अनशन के दौरान सरकार ने बातचीत की पहल नहीं की, तो रैयत क्रांति संगठन इस आंदोलन को पूरे महाराष्ट्र में फैलाएगा। उन्होंने कहा, 'इन सभी समस्याओं का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। अगर सरकार किसानों की बात नहीं सुनेगी तो हमें आंदोलन तेज करना पड़ेगा।' संगठन की यह घोषणा महाराष्ट्र की राजनीति में किसान आंदोलनों की नई लहर का संकेत मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकारी आश्वासन मिलते हैं और फिर ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। सदाभाऊ खोत द्वारा विधानसभा में उठाए गए मुद्दे पर स्थानीय समिति का वादा और उसके बाद की निष्क्रियता इसी पैटर्न को दोहराती है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार इस बार केवल बातचीत की मेज तक सीमित रहेगी या ठोस नीतिगत बदलाव करेगी — क्योंकि बिना जवाबदेही के आश्वासन किसानों का भरोसा और कम करते हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रैयत क्रांति संगठन का आमरण अनशन कब और कहाँ होगा?
यह आमरण अनशन 16 अगस्त 2026 से महाराष्ट्र के दौंड तालुका स्थित कानगांव में शुरू होगा। संगठन के राज्य प्रवक्ता भानुदास शिंदे ने 12 अगस्त को दौंड में पत्रकार परिषद में यह घोषणा की।
रैयत क्रांति संगठन की मुख्य मांगें क्या हैं?
संगठन ने आठ मांगें रखी हैं, जिनमें कृषि पंपों से जुड़े मुद्दों का समाधान सबसे प्राथमिक है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति में सुधार, कर्ज माफी और फसल बीमा के प्रभावी क्रियान्वयन की माँग भी शामिल है।
कानगांव में औद्योगिक प्रदूषण का किसानों पर क्या असर पड़ रहा है?
संगठन के अनुसार, क्षेत्र की कंपनियों से निकलने वाली धूल और प्रदूषित पानी के कारण खेती बर्बाद हो रही है और किसानों के सामने जीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। इसके अतिरिक्त स्थानीय भूमिपुत्रों को इन कंपनियों में रोजगार नहीं मिल रहा और भारी वाहनों से गाँव की सड़कें जर्जर हो गई हैं।
पहले इस मुद्दे पर सरकार ने क्या कदम उठाए थे?
सदाभाऊ खोत ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने क्षेत्र में नियंत्रण के लिए स्थानीय समिति गठित करने पर सहमति जताई थी। हालाँकि, संगठन का कहना है कि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अगर सरकार ने बातचीत नहीं की तो संगठन क्या करेगा?
भानुदास शिंदे ने स्पष्ट किया कि यदि अनशन के दौरान सरकार ने बातचीत की पहल नहीं की, तो रैयत क्रांति संगठन इस आंदोलन को पूरे महाराष्ट्र में विस्तारित करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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