क्या उत्तराखंड में यूसीसी संशोधन बिल राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू हुआ?

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क्या उत्तराखंड में यूसीसी संशोधन बिल राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू हुआ?

सारांश

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) संशोधन बिल को राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू किया गया है, जिससे नागरिकों के अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण सुधार होंगे। जानिए इसके प्रमुख बिंदुओं के बारे में।

Key Takeaways

  • समान नागरिक संहिता में प्रक्रियात्मक सुधार
  • राज्यपाल की अनुमति से तत्काल प्रभावी लागू
  • नागरिक अधिकारों की सुरक्षा में सुधार
  • लिव-इन संबंधों के लिए कानूनी प्रावधान
  • कठोर दंडात्मक प्रावधान

देहरादून, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल की स्वीकृति के बाद लागू कर दिया है। यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा जारी किया गया है, जिसके बाद यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

इस अध्यादेश के माध्यम से संहिता के विभिन्न प्रावधानों में प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक एवं दंडात्मक सुधार किए गए हैं ताकि समान नागरिक संहिता का प्रभावी, पारदर्शी एवं सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। यूसीसी के प्रमुख बिंदुओं की बात करें तो इसमें...

आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 को लागू किया गया है।

धारा 12 के अंतर्गत 'सचिव' के स्थान पर 'अपर सचिव' को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है।

उप-पंजीयक द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई न किए जाने की स्थिति में प्रकरण स्वतः पंजीयक एवं पंजीयक जनरल को अग्रेषित किए जाने का प्रावधान किया गया है।

उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार प्रदान किया गया है तथा दंड की वसूली भूमि-राजस्व की भांति किए जाने का प्रावधान जोड़ा गया है।

विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत प्रस्तुति को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है।

विवाह एवं लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।

लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है।

अनुसूची-2 में 'विधवा' शब्द के स्थान पर 'जीवनसाथी' शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है।

विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध एवं उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।

इन संशोधनों का उद्देश्य समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, प्रभावी एवं व्यावहारिक बनाना, प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करना तथा नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

Point of View

NationPress
08/02/2026

Frequently Asked Questions

यूसीसी संशोधन बिल क्या है?
यूसीसी संशोधन बिल समान नागरिक संहिता के विभिन्न प्रावधानों में सुधार लाने के लिए बनाया गया है।
इस बिल के प्रमुख बिंदु क्या हैं?
इसमें प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक एवं दंडात्मक सुधार शामिल हैं।
राज्यपाल की भूमिका क्या है?
राज्यपाल ने इस बिल को संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत मंजूरी दी है।
क्या यह बिल तत्काल प्रभाव से लागू हुआ है?
जी हां, यह बिल तुरंत प्रभाव से लागू किया गया है।
इससे नागरिकों को क्या लाभ होगा?
यह नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगा।
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