क्या उत्तराखंड में यूसीसी से विवाह पंजीकरण आसान हुआ है?
सारांश
Key Takeaways
- यूसीसी ने विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया है।
- पंजीकरण में औसतन 1400 विवाह प्रतिदिन हो रहे हैं।
- यूसीसी से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिला है।
- यूसीसी के तहत 5 दिन में प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा रहा है।
- यह कानून अन्य राज्यों के लिए उदाहरण है।
देहरादून, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने को 27 जनवरी को एक वर्ष होने वाला है। महिला सशक्तीकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समानता को बढ़ावा देने के साथ ही यूसीसी ने प्रक्रियाओं को सरल बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसी कारण, यूसीसी के लागू होने के एक वर्ष के भीतर 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण हो चुका है। अब पति-पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन तरीके से विवाह पंजीकरण करवा सकते हैं, जबकि पहले उन्हें दो गवाहों के साथ रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।
समान नागरिक संहिता के लागू होने से पहले, ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन थी। लेकिन अब यूसीसी के तहत लगभग सभी विवाह पंजीकरण ऑनलाइन हो रहे हैं, जिसमें दंपत्ति या गवाह कहीं से भी अपने बयान देकर पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसी प्रकार, यूसीसी लागू होने के बाद, 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण पूरा किया गया है। इसका मतलब यह है कि प्रतिदिन औसत पंजीकरण की संख्या 1400 के करीब पहुँच गई है, जबकि पिछले अधिनियम के तहत यह संख्या 67 थी। इस दौरान, 316 लोगों ने ऑनलाइन विवाह विच्छेद किया और 68 ने लिव-इन रिलेशनशिप का प्रमाण पत्र प्राप्त किया।
यूसीसी के तहत आवेदन करने के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है, लेकिन औसतन पाँच दिन में ही प्रमाण पत्र मिल रहा है। पुराने अधिनियम में आवेदकों को भौतिक रूप से पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था और समय सीमा का कोई प्रावधान नहीं था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू कर अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। पिछले एक वर्ष में यूसीसी के प्रावधानों को जो पारदर्शिता और सरलता से लागू किया गया है, उससे लोगों का विश्वास बढ़ा है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण करवा रहे हैं। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता हर दृष्टि से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।