केंद्र-सीजेपी तीसरे दौर की वार्ता: सरकार को सौंपी तीन लंबित मांगें, मुआवजे और माफी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार और छात्र जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल के बीच शनिवार, 25 जुलाई को नई दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में तीसरे दौर की वार्ता संपन्न हुई। इस बैठक में परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के उपायों पर सीजेपी की लंबित मांगों को औपचारिक रूप से सरकार को सौंपा गया।
बैठक का घटनाक्रम
दोपहर 3:30 बजे शुरू हुई यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे। सीजेपी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौरभ दास और आशुतोष रांका ने किया, जिन्होंने सरकार को मांगों की अद्यतन सूची सौंपी।
सीजेपी की तीन प्रमुख लंबित मांगें
सीजेपी ने मूल रूप से चार मांगें रखी थीं। उनमें से एक — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग — पूरी हो चुकी है। शेष तीन मांगों पर प्रतिनिधिमंडल ने जोर दिया:
पहली, आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। दूसरी, किसी भी छात्र प्रदर्शनकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई न की जाए। तीसरी, आरएएफ और दिल्ली पुलिस की ओर से सार्वजनिक माफी माँगी जाए।
सौरभ दास ने कहा, 'जंतर-मंतर और पूरा देश बाकी मांगों की प्रतीक्षा कर रहा है।'
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री नड्डा ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'हम आंदोलनकारी लोगों के विषयों पर चर्चा करने के लिए यहाँ आए थे। हमने उनकी बातें सुनीं। हर विषय पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई।' उन्होंने यह भी बताया कि सीजेपी की 3 मुख्य मांगें और परीक्षाओं के लिए 5 सुधार सुझाव सरकार के समक्ष रखे गए।
गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को भी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उस बैठक के बाद नड्डा ने कहा था कि सरकार ने सीजेपी की मांगों को 'गंभीरता और धैर्यपूर्वक' सुना है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर छात्रों में गहरा असंतोष है। सरकार ने अभी तक शेष मांगों पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है। अगले दौर की वार्ता की तिथि की घोषणा अभी बाकी है, और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्र सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।