25 जुलाई 2026
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केंद्र-सीजेपी तीसरे दौर की वार्ता: सरकार को सौंपी तीन लंबित मांगें, मुआवजे और माफी पर जोर

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केंद्र-सीजेपी तीसरे दौर की वार्ता: सरकार को सौंपी तीन लंबित मांगें, मुआवजे और माफी पर जोर

सारांश

केंद्र और सीजेपी के बीच तीसरे दौर की वार्ता में तीन लंबित मांगें — ₹1 करोड़ मुआवजा, छात्रों पर कार्रवाई न हो, और पुलिस माफी — औपचारिक रूप से सरकार को सौंपी गईं। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो चुका है; अब जंतर-मंतर पर बैठे छात्र बाकी मांगों के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

मुख्य बातें

25 जुलाई को कांस्टिट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में केंद्र-सीजेपी के बीच तीसरे दौर की वार्ता हुई।
सीजेपी की मूल 4 मांगों में से एक — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा — पहले ही पूरी हो चुकी है।
शेष तीन मांगें: आत्महत्या पीड़ित छात्र परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा , छात्र प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं , और आरएएफ व दिल्ली पुलिस की सार्वजनिक माफी ।
सरकार की ओर से जे.पी.
जितेंद्र सिंह ने बैठक में भाग लिया।
सीजेपी ने परीक्षा प्रणाली के लिए 5 सुधार सुझाव भी सरकार को सौंपे।

केंद्र सरकार और छात्र जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल के बीच शनिवार, 25 जुलाई को नई दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में तीसरे दौर की वार्ता संपन्न हुई। इस बैठक में परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के उपायों पर सीजेपी की लंबित मांगों को औपचारिक रूप से सरकार को सौंपा गया।

बैठक का घटनाक्रम

दोपहर 3:30 बजे शुरू हुई यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे। सीजेपी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौरभ दास और आशुतोष रांका ने किया, जिन्होंने सरकार को मांगों की अद्यतन सूची सौंपी।

सीजेपी की तीन प्रमुख लंबित मांगें

सीजेपी ने मूल रूप से चार मांगें रखी थीं। उनमें से एक — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग — पूरी हो चुकी है। शेष तीन मांगों पर प्रतिनिधिमंडल ने जोर दिया:

पहली, आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। दूसरी, किसी भी छात्र प्रदर्शनकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई न की जाए। तीसरी, आरएएफ और दिल्ली पुलिस की ओर से सार्वजनिक माफी माँगी जाए।

सौरभ दास ने कहा, 'जंतर-मंतर और पूरा देश बाकी मांगों की प्रतीक्षा कर रहा है।'

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री नड्डा ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'हम आंदोलनकारी लोगों के विषयों पर चर्चा करने के लिए यहाँ आए थे। हमने उनकी बातें सुनीं। हर विषय पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई।' उन्होंने यह भी बताया कि सीजेपी की 3 मुख्य मांगें और परीक्षाओं के लिए 5 सुधार सुझाव सरकार के समक्ष रखे गए।

गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को भी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उस बैठक के बाद नड्डा ने कहा था कि सरकार ने सीजेपी की मांगों को 'गंभीरता और धैर्यपूर्वक' सुना है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर छात्रों में गहरा असंतोष है। सरकार ने अभी तक शेष मांगों पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है। अगले दौर की वार्ता की तिथि की घोषणा अभी बाकी है, और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्र सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकार का 'सौहार्दपूर्ण सुनना' अब तक ठोस प्रतिबद्धता में नहीं बदला है। ₹1 करोड़ मुआवजे और पुलिस माफी जैसी मांगें राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं, और इन पर सरकार की चुप्पी यह संकेत देती है कि वार्ता अभी लंबी खिंच सकती है। गौरतलब है कि परीक्षा सुधार की माँग नई नहीं — पेपर लीक की घटनाएँ वर्षों से चली आ रही हैं, और हर बार वार्ता के बाद ठोस नतीजे सीमित रहे हैं। जब तक सरकार शेष मांगों पर समयबद्ध और लिखित आश्वासन नहीं देती, जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहने की संभावना है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र और सीजेपी के बीच तीसरे दौर की वार्ता में क्या हुआ?
25 जुलाई को नई दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में हुई इस बैठक में सीजेपी ने सरकार को अपनी लंबित मांगों की अद्यतन सूची सौंपी। बैठक लगभग दो घंटे चली और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा व डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार का प्रतिनिधित्व किया।
सीजेपी की तीन लंबित मांगें क्या हैं?
सीजेपी की तीन शेष मांगें हैं — आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा, किसी भी छात्र प्रदर्शनकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं, और आरएएफ व दिल्ली पुलिस की ओर से सार्वजनिक माफी। इनमें से एक मांग — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा — पहले ही पूरी हो चुकी है।
सरकार ने सीजेपी की मांगों पर क्या रुख अपनाया?
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार ने सभी मांगें 'गंभीरता और धैर्यपूर्वक' सुनी हैं और बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। हालाँकि, शेष मांगों पर सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिबद्धता सार्वजनिक नहीं की है।
यह वार्ता क्यों महत्वपूर्ण है?
देशभर में पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच यह वार्ता छात्र आंदोलन को संस्थागत प्रतिक्रिया देने का प्रयास है। जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी छात्र सरकार के ठोस जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
आगे की वार्ता कब होगी?
अगले दौर की वार्ता की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है। सीजेपी के प्रतिनिधि सौरभ दास ने कहा है कि जंतर-मंतर और पूरा देश बाकी मांगों पर सरकार के जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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