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जीईएम का 10 साल का सफर: ₹400 करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक, सीईओ मिहिर कुमार ने गिनाई उपलब्धियाँ

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जीईएम का 10 साल का सफर: ₹400 करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक, सीईओ मिहिर कुमार ने गिनाई उपलब्धियाँ

सारांश

₹400 करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक — जीईएम का एक दशक सिर्फ संख्याओं की कहानी नहीं है। 40,000 स्टार्टअप्स, 2.16 लाख महिला उद्यमी और 66,000 से अधिक SC/ST उद्यम अब सीधे सरकारी खरीद से जुड़े हैं। यह भारत के सबसे बड़े डिजिटल समावेश प्रयोगों में से एक है।

मुख्य बातें

जीईएम का कारोबार 2016 के पहले वर्ष में ₹400-422 करोड़ से बढ़कर अब ₹5 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।
जीईएम पर एमएसई भागीदारी सरकारी लक्ष्य 25% से कहीं अधिक, लगभग 45% तक पहुँची; पंजीकृत एमएसई संख्या 2,396 से बढ़कर 11.9 लाख हुई।
महिला उद्यमियों का कारोबार ₹70 करोड़ से उछलकर ₹80,000 करोड़ से अधिक; पंजीकृत महिला एमएसई 268 से 2.16 लाख हुईं।
स्टार्टअप्स की संख्या 88 से 40,000+ और उनसे खरीद ₹2 करोड़ से ₹61,400 करोड़ से अधिक।
SC/ST एमएसई 38 से 66,000+ हुए; इनसे खरीद ₹21,800 करोड़ से ज़्यादा।
प्लेटफॉर्म के ज़रिये 324 करोड़+ वैक्सीन डोज़ और 199 करोड़ सिरिंज की खरीद भी हुई।

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने अपने 10 वर्षों के सफर में सरकारी खरीद की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है — पहले वर्ष के ₹400 करोड़ के कारोबार से आज ₹5 लाख करोड़ से अधिक तक पहुँचकर यह मंच छोटे व्यापारियों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए आर्थिक समावेश का प्रमुख स्तंभ बन चुका है। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार ने 9 जून 2026 को नई दिल्ली में इस उपलब्धि का विस्तृत ब्यौरा साझा किया।

₹400 करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक का सफर

मिहिर कुमार के अनुसार, 2016 में जीईएम की शुरुआत के पहले वर्ष में कुल कारोबार मात्र ₹400 से ₹422 करोड़ के आसपास था। आज यह आँकड़ा ₹5 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। यह वृद्धि दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज़ और समावेशी बनाया है।

उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल है — विक्रेता पंजीकरण से लेकर ऑर्डर की डिलीवरी और भुगतान तक की समूची प्रक्रिया ऑनलाइन संपन्न होती है। मानव हस्तक्षेप न्यूनतम होने से भ्रष्टाचार की गुंजाइश घटी है और जवाबदेही बढ़ी है।

एमएसई और समावेशी विकास

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जीईएम पर पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) की संख्या 2016-17 में मात्र 2,396 थी, जो अब बढ़कर 11.9 लाख से अधिक हो गई है। एमएसई से सरकारी खरीद का कुल मूल्य ₹69 करोड़ से उछलकर ₹8.69 लाख करोड़ से अधिक पहुँच चुका है, और ऑर्डरों की संख्या 2,994 से बढ़कर 2.17 करोड़ से ज़्यादा हो गई है।

सरकारी नीति के तहत सरकारी खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा एमएसई से किया जाना अनिवार्य है, लेकिन मिहिर कुमार ने बताया कि जीईएम पोर्टल पर यह अनुपात करीब 45 प्रतिशत तक पहुँच चुका है — नीतिगत लक्ष्य से लगभग दोगुना।

महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स की बड़ी छलाँग

जीईएम पर महिला स्वामित्व वाले एमएसई की संख्या 2016-17 में 268 थी, जो अब 2.16 लाख से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद का मूल्य ₹8 करोड़ से बढ़कर ₹93,327 करोड़ से ज़्यादा हो गया है। मिहिर कुमार ने कहा कि महिला उद्यमियों का कारोबार ₹70 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक पहुँच चुका है।

स्टार्टअप्स की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। 2016-17 में जहाँ केवल 88 स्टार्टअप्स जीईएम से जुड़े थे, वहीं अब उनकी संख्या 40,000 से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद ₹2 करोड़ से बढ़कर ₹61,400 करोड़ से ज़्यादा पहुँच चुकी है।

अनुसूचित जाति-जनजाति और स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान

अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से जुड़े पंजीकृत एमएसई की संख्या 38 से बढ़कर 66,000 से अधिक हो गई है, और इनसे की गई खरीद का मूल्य ₹21,800 करोड़ से ज़्यादा हो चुका है। मंत्रालय के अनुसार यह आँकड़ा सरकारी खरीद में हाशिये के वर्गों की भागीदारी में आई ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी जीईएम की भूमिका अहम रही है। इस प्लेटफॉर्म के ज़रिये 324 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज़ और 199 करोड़ सिरिंज की खरीद हुई है। इसके अलावा वंदे भारत ट्रेनों के लिए मेडिकल किट, डायग्नोस्टिक उपकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उत्पाद भी इसी मंच के ज़रिये खरीदे गए हैं।

तकनीक और वैश्विक पहचान

जीईएम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूल्स, एडवांस एनालिटिक्स, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं का उपयोग कर रहा है। मिहिर कुमार ने कहा कि दक्षिण कोरिया के केओएनईपीएस पोर्टल को छोड़ दें तो दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण हैं जहाँ सरकारी खरीद को एक पूर्ण डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में इतने बड़े पैमाने पर विकसित किया गया हो।

मंत्रालय ने कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में जीईएम नवाचार, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव और वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाते हुए डिजिटल खरीद प्रणाली को और मज़बूत करने पर काम कर रहा है — और अगले दशक में यह मंच और अधिक समावेशी व कुशल होने की राह पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि वास्तविक प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता सुनिश्चित कर रही है या केवल पंजीकरण की संख्या बढ़ रही है। 40,000 स्टार्टअप्स और 2.16 लाख महिला उद्यमियों का पंजीकरण उत्साहजनक है, पर सक्रिय विक्रेताओं और वास्तविक ऑर्डर पाने वाले उद्यमों का अनुपात अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। दक्षिण कोरिया के केओएनईपीएस से तुलना सही दिशा में है, लेकिन वैश्विक बेंचमार्क की असली कसौटी विक्रेता संतुष्टि और भुगतान समयसीमा है — जिन पर जीईएम को अभी और पारदर्शिता दिखानी होगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
जीईएम भारत सरकार का डिजिटल खरीद मंच है जिसकी शुरुआत 2016 में हुई थी। इस पर विक्रेता पंजीकरण से लेकर ऑर्डर, डिलीवरी और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है, जिससे सरकारी खरीद में पारदर्शिता और दक्षता आई है।
जीईएम का कारोबार 10 साल में कितना बढ़ा?
जीईएम सीईओ मिहिर कुमार के अनुसार, पहले वर्ष में कारोबार ₹400-422 करोड़ था जो अब ₹5 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। एमएसई से खरीद ₹69 करोड़ से बढ़कर ₹8.69 लाख करोड़ से अधिक पहुँची है।
जीईएम पर महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को कितना फायदा हुआ?
महिला स्वामित्व वाले एमएसई 268 से बढ़कर 2.16 लाख हुए और उनसे खरीद ₹8 करोड़ से ₹93,327 करोड़ से ज़्यादा हो गई। स्टार्टअप्स की संख्या 88 से 40,000+ हुई और उनसे खरीद ₹2 करोड़ से ₹61,400 करोड़ से अधिक पहुँची।
जीईएम पर एमएसई की भागीदारी सरकारी लक्ष्य से कितनी अधिक है?
सरकारी नीति के तहत सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी कम से कम 25 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन जीईएम पर यह अनुपात करीब 45 प्रतिशत तक पहुँच चुका है — निर्धारित लक्ष्य से लगभग दोगुना।
जीईएम को वैश्विक स्तर पर कैसे देखा जाता है?
जीईएम सीईओ मिहिर कुमार के अनुसार, दक्षिण कोरिया के केओएनईपीएस पोर्टल को छोड़कर दुनिया में बहुत कम उदाहरण हैं जहाँ सरकारी खरीद को इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में विकसित किया गया हो। वाणिज्य मंत्रालय इसे 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल मानता है।
राष्ट्र प्रेस
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