जीईएम का 10 साल का सफर: ₹400 करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक, सीईओ मिहिर कुमार ने गिनाई उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने अपने 10 वर्षों के सफर में सरकारी खरीद की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है — पहले वर्ष के ₹400 करोड़ के कारोबार से आज ₹5 लाख करोड़ से अधिक तक पहुँचकर यह मंच छोटे व्यापारियों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए आर्थिक समावेश का प्रमुख स्तंभ बन चुका है। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार ने 9 जून 2026 को नई दिल्ली में इस उपलब्धि का विस्तृत ब्यौरा साझा किया।
₹400 करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक का सफर
मिहिर कुमार के अनुसार, 2016 में जीईएम की शुरुआत के पहले वर्ष में कुल कारोबार मात्र ₹400 से ₹422 करोड़ के आसपास था। आज यह आँकड़ा ₹5 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। यह वृद्धि दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज़ और समावेशी बनाया है।
उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल है — विक्रेता पंजीकरण से लेकर ऑर्डर की डिलीवरी और भुगतान तक की समूची प्रक्रिया ऑनलाइन संपन्न होती है। मानव हस्तक्षेप न्यूनतम होने से भ्रष्टाचार की गुंजाइश घटी है और जवाबदेही बढ़ी है।
एमएसई और समावेशी विकास
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जीईएम पर पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) की संख्या 2016-17 में मात्र 2,396 थी, जो अब बढ़कर 11.9 लाख से अधिक हो गई है। एमएसई से सरकारी खरीद का कुल मूल्य ₹69 करोड़ से उछलकर ₹8.69 लाख करोड़ से अधिक पहुँच चुका है, और ऑर्डरों की संख्या 2,994 से बढ़कर 2.17 करोड़ से ज़्यादा हो गई है।
सरकारी नीति के तहत सरकारी खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा एमएसई से किया जाना अनिवार्य है, लेकिन मिहिर कुमार ने बताया कि जीईएम पोर्टल पर यह अनुपात करीब 45 प्रतिशत तक पहुँच चुका है — नीतिगत लक्ष्य से लगभग दोगुना।
महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स की बड़ी छलाँग
जीईएम पर महिला स्वामित्व वाले एमएसई की संख्या 2016-17 में 268 थी, जो अब 2.16 लाख से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद का मूल्य ₹8 करोड़ से बढ़कर ₹93,327 करोड़ से ज़्यादा हो गया है। मिहिर कुमार ने कहा कि महिला उद्यमियों का कारोबार ₹70 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक पहुँच चुका है।
स्टार्टअप्स की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। 2016-17 में जहाँ केवल 88 स्टार्टअप्स जीईएम से जुड़े थे, वहीं अब उनकी संख्या 40,000 से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद ₹2 करोड़ से बढ़कर ₹61,400 करोड़ से ज़्यादा पहुँच चुकी है।
अनुसूचित जाति-जनजाति और स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान
अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से जुड़े पंजीकृत एमएसई की संख्या 38 से बढ़कर 66,000 से अधिक हो गई है, और इनसे की गई खरीद का मूल्य ₹21,800 करोड़ से ज़्यादा हो चुका है। मंत्रालय के अनुसार यह आँकड़ा सरकारी खरीद में हाशिये के वर्गों की भागीदारी में आई ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी जीईएम की भूमिका अहम रही है। इस प्लेटफॉर्म के ज़रिये 324 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज़ और 199 करोड़ सिरिंज की खरीद हुई है। इसके अलावा वंदे भारत ट्रेनों के लिए मेडिकल किट, डायग्नोस्टिक उपकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उत्पाद भी इसी मंच के ज़रिये खरीदे गए हैं।
तकनीक और वैश्विक पहचान
जीईएम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूल्स, एडवांस एनालिटिक्स, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं का उपयोग कर रहा है। मिहिर कुमार ने कहा कि दक्षिण कोरिया के केओएनईपीएस पोर्टल को छोड़ दें तो दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण हैं जहाँ सरकारी खरीद को एक पूर्ण डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में इतने बड़े पैमाने पर विकसित किया गया हो।
मंत्रालय ने कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में जीईएम नवाचार, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव और वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाते हुए डिजिटल खरीद प्रणाली को और मज़बूत करने पर काम कर रहा है — और अगले दशक में यह मंच और अधिक समावेशी व कुशल होने की राह पर है।