जीईएम ने डिजिटल सार्वजनिक खरीद में 18.4 लाख करोड़ रुपए का जीएमवी हासिल किया

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जीईएम ने डिजिटल सार्वजनिक खरीद में 18.4 लाख करोड़ रुपए का जीएमवी हासिल किया

सारांश

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने 18.4 लाख करोड़ रुपए का जीएमवी पार कर लिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा भी शामिल है। जानें कैसे यह डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत की अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है।

Key Takeaways

  • जीईएम ने 18.4 लाख करोड़ रुपए का जीएमवी हासिल किया।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करना।
  • पारदर्शी और कुशल खरीद प्रक्रिया।
  • महिला उद्यमियों को 28,000 करोड़ रुपए के ऑर्डर।
  • एमएसई की भागीदारी 68 प्रतिशत

नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने अब तक कुल 18.4 लाख करोड़ रुपए का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) प्राप्त किया है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 5 लाख करोड़ रुपए जीएमवी का आंकड़ा पार करना शामिल है। यह जानकारी वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को साझा की।

मंत्रालय के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल सार्वजनिक खरीद प्रणाली के रूप में लगातार विकसित हो रहा है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहा है।

यह उपलब्धि सरकारी संस्थाओं में खरीद प्रक्रिया को सक्षम बनाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में जीईएम की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। यह प्लेटफॉर्म खरीद निर्णयों को सरल बनाता है, विभिन्न क्षेत्रों के उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़ता है और सार्वजनिक व्यय में आर्थिक समावेशन, स्थिरता और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 18.4 लाख करोड़ रुपए का संचयी जीएमवी प्राप्त करना एक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-संचालित खरीद प्रणाली में खरीदारों, विक्रेताओं और संस्थानों के विश्वास को दर्शाता है।

मंत्रालय के अनुसार, जीईएम ने सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई), महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमों और स्टार्टअप उद्यमों के लिए पहुँच बढ़ाने के लिए एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, कुल ऑर्डरों में से 68 प्रतिशत एमएसई द्वारा निष्पादित किए गए, जो कुल जीएमवी का 47.1 प्रतिशत था।

इस प्लेटफॉर्म पर 11 लाख से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसई) पंजीकृत हैं और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन्हें 2.36 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं। पोर्टल पर 2.1 लाख से अधिक महिला नेतृत्व वाले एमएसई पंजीकृत हैं और इन्हें 28,000 करोड़ रुपए से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जो लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं।

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के एमएसई को 6,000 करोड़ रुपए से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जो लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं। स्टार्टअप उद्यमों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इसी अवधि के दौरान 19,000 करोड़ रुपए से अधिक के ऑर्डर प्राप्त किए हैं, जो 36 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं।

Point of View

बल्कि समावेशी दृष्टिकोण के माध्यम से महिला उद्यमियों और एमएसई को भी सशक्त बनाता है। यह भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है।
NationPress
09/04/2026

Frequently Asked Questions

जीईएम क्या है?
जीईएम, या गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस, एक डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच है जो सरकारी संस्थाओं के लिए विभिन्न उत्पादों और सेवाओं की खरीद को सुगम बनाता है।
जीईएम का जीएमवी क्या है?
जीईएम ने अब तक 18.4 लाख करोड़ रुपए का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) हासिल किया है।
जीईएम ने महिला उद्यमियों के लिए क्या किया है?
जीईएम ने महिला नेतृत्व वाले एमएसई को विशेष प्राथमिकता दी है, जिससे उन्हें 28,000 करोड़ रुपए से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।
जीईएम का उद्देश्य क्या है?
जीईएम का उद्देश्य सरकारी खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और कुशल बनाना है, साथ ही आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देना है।
क्या जीईएम में एमएसई की भागीदारी है?
हां, जीईएम में एमएसई की भागीदारी महत्वपूर्ण है, जिसमें 68 प्रतिशत ऑर्डर एमएसई द्वारा निष्पादित किए गए हैं।
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