कविंद्र गुप्ता ने चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर जोर दिया

Click to start listening
कविंद्र गुप्ता ने चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर जोर दिया

सारांश

ग्रेटर नोएडा में आयोजित 51वें राष्ट्रीय चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के योगदान को उजागर किया। उन्होंने इसे नई संभावनाओं का द्वार बताया, साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और प्रभावशीलता पर बल दिया।

Key Takeaways

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाता है।
  • उपचार प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और सटीक हुई है।
  • एआई डिजिटल प्लेटफॉर्म 24×7 सहायता प्रदान करते हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य में सामाजिक कलंक को समाप्त करने की आवश्यकता है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग मानव मूल्यों के साथ संतुलित होना चाहिए।

ग्रेटर नोएडा, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 51वें राष्ट्रीय चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे चिकित्सा क्षेत्र में नई आशा और संभावनाओं का द्वार बताया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और व्यक्तिगत बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एआई तकनीकों के माध्यम से समय रहते मानसिक समस्याओं की पहचान करना और उचित उपचार प्रदान करना संभव हो रहा है। इसके साथ ही, रोगों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और सटीक हो गई है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा पी सिंह ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। विषय था 'मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका।' इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में एआई-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशनों द्वारा व्यक्ति की भावनाओं, व्यवहार और भाषा का विश्लेषण कर प्रारंभिक स्तर पर मानसिक समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि 'टेली-मानस' जैसी सेवाएं दूरदराज के क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके साथ ही, देश में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक सहयोग का भी विषय है।

राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति को समय पर सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि एआई आधारित वर्चुअल थेरेपिस्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म 24×7 सहायता प्रदान कर रहे हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञों की कमी है। इसके अलावा, न्यूरोफीडबैक, ब्रेन इमेजिंग और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग मानसिक विकारों को बेहतर समझने और नए उपचार विकसित करने में सहायक हो रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय संवाद का विकल्प नहीं बन सकती। इसलिए इन तकनीकों का उपयोग मानवीय मूल्यों के साथ संतुलित रूप से किया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने डेटा गोपनीयता, नैतिकता और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि यदि एआई का उपयोग सही दिशा में किया जाए, तो यह मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस अवसर पर कुलपति प्रो राणा पी सिंह ने सम्मेलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे उच्च अकादमिक मानकों से युक्त आयोजन बताया। सम्मेलन संयोजक एवं मनोविज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद पी सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया।

कार्यक्रम में प्रोफेसर माधव गोविंद, प्रोफेसर गौरी शंकर कालोइया, प्रोफेसर आशा श्रीवास्तव, डॉ. निशी मिश्रा और डॉ. आलोक मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किए। वहीं, इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स (आईएसीपी) के पूर्व अध्यक्ष एवं संस्थापक सदस्य डॉ. मनोरंजन सहाय ने सम्मेलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।

Point of View

वे मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करती हैं। यह आवश्यक है कि हम तकनीकी विकास के साथ-साथ मानव संवेदनाओं को भी ध्यान में रखें।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानसिक स्वास्थ्य में कैसे मदद कर सकता है?
यह समय पर मानसिक समस्याओं की पहचान करने और उचित उपचार उपलब्ध कराने में सहायक होता है।
क्या एआई मानव संवेदनाओं का विकल्प बन सकता है?
नहीं, एआई मानव संवेदनशीलता और सहानुभूति का विकल्प नहीं हो सकता।
राज्यपाल ने किस अवसर पर एआई की भूमिका पर बात की?
उन्होंने 51वें राष्ट्रीय चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन में एआई की भूमिका पर चर्चा की।
क्या एआई आधारित प्लेटफॉर्म हमेशा उपलब्ध होते हैं?
हाँ, एआई आधारित वर्चुअल थेरेपिस्ट 24×7 सहायता प्रदान करते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य में एआई से जुड़ी कुछ चुनौतियाँ क्या हैं?
डेटा गोपनीयता, नैतिकता और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
Nation Press