ईरान से रोजाना 20 लाख बैरल तेल के नाकाबंदी के कारण वैश्विक सप्लाई पर पड़ेगा असर
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नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू होते ही, हर दिन लगभग 20 लाख बैरल ईरानी तेल के वैश्विक बाजारों से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इससे वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ेगा और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
नोमुरा में इस क्षेत्र के विश्लेषक बिनीत बांका ने अपने नोट में उल्लेख किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकाबंदी से भारत के लिए एलपीजी सप्लाई पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। पिछले महीने में भारत ने इस मार्ग से कम से कम 8 एलपीजी टैंकर सुरक्षित पार कराए हैं।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी यह स्पष्ट किया है कि अमेरिका किसी भी जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को टोल चुकाने की अनुमति नहीं देगा। हालाँकि भारत ने हाल ही में अपने एलपीजी जहाजों के लिए कोई टोल नहीं चुकाया है, लेकिन आगे की स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है।
नोमुरा ने अपने नोट में कहा है, "अगर यह संघर्ष लम्बा चलता है, तो रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से सप्लाई संतुलित करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है, जिससे तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।"
इस बीच, ऐसी जानकारी मिली है कि अमेरिका और ईरान पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में हुई वार्ता के किसी नतीजे पर नहीं पहुंचने के बाद बातचीत के दूसरे दौर पर विचार कर रहे हैं। इसी कारण कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं, हालाँकि मंगलवार को संभावित बातचीत की आशा के चलते कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं।
पिछले हफ्ते में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और यह लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है।
नोमुरा का मानना है कि शांति वार्ता विफल रहने पर तेल की कीमतों में 'वॉर रिस्क प्रीमियम' और बढ़ सकता है।
अगर अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद कर देता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई की स्थिति और खराब हो सकती है।
हाल के हफ्तों में तेल की कीमतों में हुई वृद्धि ने सऊदी अरब के निर्यात में आई कमी की भरपाई कर दी है। मार्च 2026 में सऊदी अरब की तेल आय सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढ़ी है।
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के माध्यम से 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की पूरी क्षमता हासिल कर ली है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करती है और रेड सी तक जाती है।
अनुमान है कि इसमें से 2 मिलियन बैरल घरेलू रिफाइनरी में उपयोग किया जाएगा, जबकि लगभग 5 मिलियन बैरल निर्यात के लिए उपलब्ध रह सकता है, जो मार्च 2026 के 4.4 मिलियन बैरल से अधिक है।
वहीं यूएई ने भी अन्य खाड़ी देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां तेल राजस्व में केवल 3 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई।
बांका के अनुमान के अनुसार, युद्ध आरंभ होने के बाद से तेल राजस्व के मामले में ईरान को सबसे अधिक लाभ हुआ है। मार्च 2026 में ईरान की तेल आय सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 5.7 अरब डॉलर हो गई है।