जुको वैली: मणिपुर और नगालैंड की अनदेखी प्राकृतिक खूबसूरती और ट्रैकिंग का अद्भुत अनुभव
सारांश
Key Takeaways
- जुको वैली का प्राकृतिक सौंदर्य हर मौसम में बदलता है।
- यहां ट्रैकिंग का अनुभव अद्भुत है।
- जुकाऊ नदी घाटी की खूबसूरती को और बढ़ाती है।
- बरसात के मौसम में घाटी दुर्लभ फूलों से खिल उठती है।
- मणिपुरी संस्कृति का अनुभव करने का मौका मिलता है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत में प्राकृतिक सौंदर्य से भरी घाटियां हैं, लेकिन मणिपुर और नगालैंड की सीमा पर एक ऐसी घाटी है जो हर मौसम में अपने रंग बदलती है। जुको वैली की खूबसूरती मौसम के साथ बदलती रहती है, पर यहां तक पहुंचना हर किसी के लिए सरल नहीं है।
यदि आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं और ऐसी जगहों की तलाश कर रहे हैं जिनकी प्राकृतिक सुंदरता आपको मंत्रमुग्ध कर दे, तो जुको वैली सबसे उपयुक्त स्थान है। यहां पर्यटकों की संख्या भी कम है, जिससे यह घाटी अनछुई प्राकृतिक सुंदरता का स्वर्ग बन जाती है।
इस घाटी में जुकाऊ नाम की एक ठंडी और साफ नदी बहती है, जिसके कारण इसे जुको नाम दिया गया है। 'जुको' का अर्थ है 'ठंडा पानी।' घाटी में हरी ढलान वाली पहाड़ियां हैं, जिनका दृश्य देखकर मन को सुकून मिलता है।
अगर आप सुंदर दृश्यों का असली आनंद लेना चाहते हैं, तो बरसात के मौसम में यहां आना सबसे अच्छा रहेगा। इस दौरान घाटी विभिन्न और दुर्लभ फूलों से खिल उठती है। हर तरफ मनमोहक और विशाल फूलों का दृश्य होता है। ट्रैकिंग के दौरान चारों ओर हरियाली नजर आती है, जहां विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे बिखरे होते हैं। इसके अलावा, आप मणिपुरी संस्कृति और कुछ नागा जनजातियों की परंपराओं से भी परिचित हो सकते हैं, जो सदियों से घाटी की सुंदरता को संजोए हुए हैं।
अगर आप नगालैंड के विश्वेमा से यात्रा करते हैं, तो घाटी तक पहुंचने के लिए आपको दो रास्ते मिलेंगे। इन दोनों रास्तों पर कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसमें लगभग 2 किलोमीटर की चढ़ाई और कई सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। जुको घाटी में होम-स्टे की सुविधाएं भी हैं, जहां आप मणिपुरी के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं। इसके अलावा, आप इम्फाल के स्थानीय बाजारों का भी दौरा कर सकते हैं और खोनोमा, भारत के पहले हरित गांव, भी जा सकते हैं, जो नगालैंड की राजधानी कोहिमा से मात्र 20 किलोमीटर दूर है।