हकीकत का डरावना चेहरा: लंदन में 250 कुत्तों की दर्दनाक कहानी
सारांश
Key Takeaways
- 250 पूडल कुत्तों की दुर्दशा ने सबको चौंका दिया।
- आरएसपीसीए ने वास्तविकता की पुष्टि की।
- अनियंत्रित प्रजनन और लापरवाही मुख्य कारण।
- अवशिष्ट कुत्तों को चिकित्सा सहायता मिली।
- ब्रिटेन में 'मल्टी-एनिमल' मामलों में वृद्धि।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। यह एक असाधारण कहानी है लंदन के एक घर में रहने वाले 250 पूडल कुत्तों की। छोटे-छोटे कमरों में, ये प्यारे दोस्त कैमरे की ओर हसरत भरी नजरों से देख रहे थे। ब्रिटेन की पशु कल्याण संस्था, 'रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स' (आरएसपीसीए) ने 2 अप्रैल को इन कुत्तों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर एक विस्तृत नोट के साथ साझा की। इसका उद्देश्य इन कुत्तों को बचाना और उन दुर्दशाओं के बारे में जागरूक करना था, जिनमें ये जीने के लिए मजबूर थे। कुछ कुत्तों की हालत गंभीर थी जबकि अन्य कुपोषण का सामना कर रहे थे।
जिन लोगों ने इन तस्वीरों को देखा, उन्होंने सोचा कि यह किसी तकनीक का कमाल है, जैसे कि एआई टूल। लेकिन जब वास्तविकता सामने आई, तो स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर और चिंताजनक निकली।
आरएसपीसीए के अनुसार, कुछ अधिकारियों को एक घर में अत्यधिक संख्या में कुत्तों के होने की सूचना मिली थी। जब टीम मौके पर पहुंची, तो उन्होंने देखा कि छोटे कमरों में बड़ी संख्या में कुत्ते ठुसे हुए थे। गंदगी, बदबू और अव्यवस्था के बीच इन कुत्तों की हालत देख कर तस्वीरें देखने वाले यकीन नहीं कर पा रहे थे कि यह असली हैं।
जब तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तो कई लोगों ने इन्हें “एआई-जनरेटेड” मान लिया। इसके बाद आरएसपीसीए को स्पष्ट करना पड़ा कि ये तस्वीरें वास्तविक हैं और इनमें किसी प्रकार की डिजिटल हेरफेर नहीं की गई है। संस्था ने इसे “ओवरक्राउडिंग और लापरवाही का चरम उदाहरण” बताया।
जांच में यह पाया गया कि इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों की संख्या में वृद्धि अनियंत्रित प्रजनन और मालिक की क्षमता से अधिक जानवरों को पालने के कारण हुई है। संस्था के अनुसार कई मामलों में आर्थिक दबाव और देखभाल की कमी भी ऐसी स्थितियों का कारण बनती है।
राहत कार्य के दौरान कई कुत्तों को तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए ले जाया गया, जबकि अन्य को विभिन्न पशु संगठनों की सहायता से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। संस्था के मुताबिक, ऐसे मामलों में जानवर लंबे समय तक तनाव, कुपोषण और संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करते हैं, जिनसे उबरने में समय लगता है।
यह घटना उस समय सामने आई है जब ब्रिटेन में “मल्टी-एनिमल” मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। पशु कल्याण संगठनों का मानना है कि पालतू जानवर रखना केवल एक भावनात्मक निर्णय नहीं है, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे नजरअंदाज करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
आरएसपीसीए के अनुसार पिछले एक साल में उनके सामने लगभग 75 मामले आए हैं, जिनमें से हर मामले में करीब 100 कुत्तों को बचाया गया है।