20 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप कोयला क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ-बीपीसीएल ने कार्यशाला आयोजित की?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप कोयला क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ-बीपीसीएल ने कार्यशाला आयोजित की?

सारांश

भारत की आर्थिक प्रगति को तेज करने के लिए सीआईएसएफ और बीसीसीएल ने कोयला क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर एक कार्यशाला आयोजित की। इसमें भविष्य के सुरक्षा रोडमैप और उभरती चुनौतियों पर चर्चा की गई। जानिए इस कार्यशाला के मुख्य बिंदुओं के बारे में!

मुख्य बातें

उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन कोयला संसाधनों की सुरक्षा बढ़ाने के उपाय तकनीकी परिवर्तन के प्रति जागरूकता सुरक्षा रोडमैप का निर्माण मानकीकृत सुरक्षा प्रोटोकॉल का महत्व

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। जब भारत अपनी आर्थिक प्रगति को तेज करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन में तेजी ला रहा है, तब केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने 15-16 दिसंबर को बीसीसीएल के मुख्यालय, कोयला नगर, धनबाद में कोयला क्षेत्र पर एक उच्चस्तरीय दो-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य थी बढ़ती मांग, तकनीकी परिवर्तन और उभरते सुरक्षा खतरे के संदर्भ में देश के कोयला संसाधनों की सुरक्षा को और सुदृढ़ करना।

कार्यशाला में सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी, कोयला क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों के प्रमुख, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, उद्योग के हितधारक और शिक्षाविद् एक साथ आए और चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार सुरक्षा रोडमैप पर विचार-विमर्श किया।

कोयला भारत की ऊर्जा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह देश की कुल विद्युत उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा प्रदान करता है। यह इस्पात, सीमेंट और अन्य प्रमुख उद्योगों के लिए भी आवश्यक है। वर्ष 2030 तक, विशेष रूप से पूर्वी और मध्य भारत के कोयला क्षेत्रों से, लगभग 1.5 अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य है, जिसके लिए सुरक्षित और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है।

इस कार्यशाला में यह भी बताया गया कि आर्थिक महत्व के साथ-साथ कोयला पारिस्थितिकी तंत्र कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें अवैध खनन, कोयला चोरी, पिल्फरेज, असुरक्षित परिचालन, भ्रष्टाचारपरित्यक्त खदानों का दुरुपयोग शामिल हैं। ये सभी कारक राजस्व, सुरक्षा और जनविश्वास पर प्रभाव डालते हैं। इसके साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म, एकीकृत कमांड सिस्टम और रिमोट मॉनिटरिंग तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण साइबर एवं सिस्टम-स्तरीय जोखिमों पर भी चिंता व्यक्त की गई।

दो दिनों के दौरान विशेषज्ञों ने उन्नत खनन प्रौद्योगिकियों, एकीकृत निगरानी प्रणालियों, ड्रोन आधारित सर्विलांस, मानव संसाधन आधारित सुरक्षा पहलों, भ्रष्टाचार-निरोधक तंत्र, आपदा प्रबंधन और आईसीएमएस एवं एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्रों के माध्यम से रीयल-टाइम निगरानी जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए। आउटसोर्स्ड एवं माइन डेवलपर-ऑपरेटर परियोजनाओं के लिए मानकीकृत सुरक्षा प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि सभी परिचालन मॉडल में समान सुरक्षा मानक सुनिश्चित किए जा सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कार्यशाला न केवल कोयला क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा भविष्य को भी मजबूत बनाती है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी हितधारकों के बीच समन्वय और सहयोग बढ़े ताकि हम एक सुरक्षित और स्थायी ऊर्जा प्रणाली स्थापित कर सकें।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था?
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देश के कोयला संसाधनों की सुरक्षा को बढ़ाना था, विशेषकर बढ़ती मांग और तकनीकी परिवर्तन के संदर्भ में।
इस कार्यशाला में कौन-कौन शामिल हुआ?
इस कार्यशाला में सीआईएसएफ के अधिकारी, बीसीसीएल के प्रमुख, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, उद्योग के हितधारक और शिक्षाविद शामिल हुए।
कोयला उत्पादन का भारत की अर्थव्यवस्था में क्या महत्व है?
कोयला भारत की ऊर्जा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश के कुल विद्युत उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले