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टीएमसी सांसद <b>कीर्ति आजाद</b> के बयान पर <b>मंदिर के पुजारी</b> की प्रतिक्रिया: आस्था का महत्व

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टीएमसी सांसद <b>कीर्ति आजाद</b> के बयान पर <b>मंदिर के पुजारी</b> की प्रतिक्रिया: आस्था का महत्व

सारांश

पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने वर्ल्ड कप ट्रॉफी को हनुमान मंदिर ले जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मंदिर के पुजारी ने आस्तिकता और नास्तिकता पर अपने विचार साझा किए। जानिए दोनों का क्या कहना है!

मुख्य बातें

कीर्ति आजाद का बयान विवादित है।
मंदिर के पुजारी ने आस्था का महत्व बताया।
खेल को धर्म से न जोड़ने की बात की गई।
फाइनल से पहले जय शाह ने मंदिर में दर्शन किए।
यह मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा है।

अहमदाबाद, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीतने के बाद ट्रॉफी को हनुमान मंदिर ले जाने के विषय पर पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी है। इस पर मंदिर के पुजारी ईश्वरदास त्यागी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि संसार में दो प्रकार के लोग होते हैं। एक आस्तिक होते हैं और दूसरे नास्तिक। जिनका प्रभु में विश्वास नहीं है, वे ऐसी बातें करेंगे। आस्तिक लोग हमेशा प्रभु से प्रेम करते हैं।

पुजारी ने बताया कि फाइनल मुकाबले से पहले जय शाह दर्शन करने आए थे। आश्रम और स्टेडियम का एक ही प्रांगण है। जब भी बड़े मुकाबले होते हैं, कोई न कोई खिलाड़ी दर्शन करने आते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जब फाइनल से पहले जय शाह और खिलाड़ी दर्शन करने आए थे, शायद उनके मन में था कि वे अच्छे से खेलें और टीम को जीत दिला सकें।

पुजारी ने साझा किया कि फाइनल जीतने के बाद जय शाह, कोच गौतम गंभीर, कप्तान सूर्यकुमार यादव और अन्य लोगों ने दर्शन किए। सभी का स्वागत किया गया और टीम इंडिया के वर्ल्ड चैंपियन बनने पर खुशियाँ मनाई गई।

उन्होंने कहा कि जब भी यहाँ मैच होता है, श्रद्धा रखने वाले खिलाड़ी प्रार्थना करने आते हैं। दुनिया कुछ न कुछ कहती रहती है। यदि हार जाते हैं तो कहते हैं कि हनुमान जी से प्रार्थना की और हार गए और जब जीत गए तो कहते हैं कि हनुमान जी ने जीत दिलाई। यह सब अपनी-अपनी आस्था और सोच की बात है।

गौरतलब है कि टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि हम सभी के लिए खेलते हैं। देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। सभी उस टीम का हिस्सा हैं। जब हमने 1983 में विश्व कप जीता था, तब भी सभी धर्मों के खिलाड़ी टीम में थे। खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं होता, वे अपनी टीम के लिए खेलते हैं। इन खिलाड़ियों ने हमें गर्व महसूस कराया है। उन्होंने संजू सैमसन और मोहम्मद शिराज की तारीफ की और कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम पूरी हिंदुस्तान की टीम है।

आजाद ने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर कहा कि फिर भारत और पाकिस्तान में क्या अंतर रह गया? उन्होंने कहा कि मैं खुद हिन्दू हूं, लेकिन खेल के समय कभी धर्म को नहीं जोड़ा। खेल का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए मैंने इसका विरोध किया। हर मैच से पहले और बाद में मैं भी मंदिर जाता था। उन्होंने कहा, "हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था।"

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं मंदिर के पुजारी का कहना है कि श्रद्धा का अपना महत्व है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो भारतीय समाज में आस्था और धर्म के स्थान को दर्शाता है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने क्या कहा?
कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को हनुमान मंदिर ले जाने पर अपनी असहमति व्यक्त की और खेल को धर्म से न जोड़ने की बात कही।
मंदिर के पुजारी ने क्या प्रतिक्रिया दी?
ईश्वरदास त्यागी ने कहा कि आस्तिक और नास्तिक के बीच भेद करना आवश्यक है और सभी का अपनी-अपनी आस्था है।
क्या जय शाह ने मंदिर में दर्शन किए?
जय शाह और अन्य खिलाड़ियों ने फाइनल मैच से पहले दर्शन किए थे।
क्या यह मामला धार्मिक विवाद का हिस्सा है?
हाँ, यह मामला धार्मिक आस्था और खेल के बीच के संबंध को लेकर विवादित हो गया है।
क्या कीर्ति आजाद ने अपने बयान पर खेद व्यक्त किया?
नहीं, कीर्ति आजाद ने अपने बयान का समर्थन किया है।
राष्ट्र प्रेस
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