हॉर्मुज स्ट्रेट से बिना टोल गुज़रे भारत के 12 एलपीजी जहाज़, हरदीप पुरी ने बताई पूरी रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार, 29 जून को नई दिल्ली में बताया कि भारत के 12 एलपीजी जहाज़ों ने हॉर्मुज स्ट्रेट बिना कोई टोल चुकाए पार किया। साथ ही, कुकिंग गैस का उत्पादन तेज़ी से बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों में रिकॉर्ड समय में बदलाव किए गए। मंत्री के अनुसार, इन कदमों ने भारत को आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा आपूर्ति बाधा से सफलतापूर्वक निपटने में सक्षम बनाया।
संकट की पृष्ठभूमि
हॉर्मुज स्ट्रेट के चार महीने तक बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई। यह जलमार्ग दुनिया के कच्चे तेल और एलपीजी व्यापार का एक बड़ा हिस्सा वहन करता है, और इसके अवरुद्ध होने से भारत समेत कई देशों के सामने ऊर्जा सुरक्षा का गंभीर सवाल खड़ा हो गया। पुरी ने कहा, "जब दुनिया ऊर्जा के सबसे बुरे संकटों में से एक और बाधित आपूर्ति श्रृंखलाओं का सामना कर रही थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ऊर्जा उपभोक्ताओं को किसी भी नकारात्मक असर से प्रभावी ढंग से बचाया।"
सरकार के आपातकालीन उपाय
पेट्रोलियम मंत्रालय ने संकट से निपटने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम किया। कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाई गई, ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार किया गया और अल्जीरिया, जापान, कनाडा तथा अमेरिका जैसे देशों से एलपीजी की वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। संकट के दौरान मार्च में ईंधन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कटौती भी की गई, जिससे उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिली।
पुरी ने बताया कि जिन रिफाइनरियों में पहले कभी कुकिंग गैस का उत्पादन नहीं हुआ था, उनमें कुछ ही दिनों में बदलाव कर उत्पादन शुरू कराया गया। इसके परिणामस्वरूप एलपीजी उत्पादन 35 हज़ार मीट्रिक टन (टीएमटी) प्रतिदिन से बढ़कर 54 टीएमटी प्रतिदिन हो गया — यानी लगभग 54% की वृद्धि।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा और कालाबाज़ारी पर रोक
मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि घरों तक पहुँचने वाली कुकिंग गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित रखी गई। कालाबाज़ारी रोकने के लिए डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड अनिवार्य किया गया, ताकि इस संकट के दौरान मूल्यवान एलपीजी आपूर्ति की हेराफेरी न हो सके। उनके अनुसार, इन उपायों की बदौलत वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद घरेलू स्तर पर कुकिंग गैस और ईंधन की आपूर्ति स्थिर बनी रही।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि भारत अपनी एलपीजी ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, और हॉर्मुज स्ट्रेट इस आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। ऐसे में चार महीने की रुकावट का सीधा असर करोड़ों घरों की रसोई पर पड़ सकता था। सरकार के त्वरित हस्तक्षेप ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों और उपलब्धता को प्रभावित होने से बचाया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता पहले से ही उच्च स्तर पर है।
आगे की राह
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इस संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति की परीक्षा ली और देश उसमें खरा उतरा। विशेषज्ञों का मानना है कि आपूर्ति स्रोतों के विविधीकरण और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की यह नीति भविष्य में भी ऊर्जा सुरक्षा की आधारशिला बनी रहेगी। सरकार के इन कदमों का दीर्घकालिक प्रभाव भारत की ऊर्जा नीति की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।