हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरे दो भारतीय एलपीजी जहाज, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रांसपोंडर बंद रखे
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 14 मई 2026 को दो भारतीय गंतव्य वाले एलपीजी जहाजों ने हॉर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार किया। दोनों जहाजों ने जलडमरूमध्य से गुजरते समय अपने ट्रांसपोंडर कुछ समय के लिए बंद रखे — एक सावधानी जो क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच समुद्री सुरक्षा जोखिमों को दर्शाती है।
कौन से जहाज और कहाँ से कहाँ
पहला जहाज, एलपीजी टैंकर सिमी, कतर के रस लाफान बंदरगाह से ईंधन लेकर गुजरात के कांडला बंदरगाह की ओर जा रहा है। हॉर्मुज स्ट्रेट पार करने के बाद इसे ओमान की खाड़ी में देखा गया, जहाँ इसने अपना ट्रांसपोंडर फिर से चालू किया।
दूसरा जहाज, एनवी सनशाइन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की रुवैस रिफाइनरी से एलपीजी लेकर मंगलुरु की ओर जाते हुए अंतिम बार देखा गया। इस जहाज ने भी स्ट्रेट पार करते समय ट्रांसपोंडर बंद रखने की वही रणनीति अपनाई।
हॉर्मुज स्ट्रेट का महत्व
हॉर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील गलियारा है। दुनिया के कच्चे तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और एलपीजी का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर है, इसलिए इस क्षेत्र में कोई भी व्यवधान भारतीय ऊर्जा आयात को सीधे प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि
इस महीने की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ युद्धविराम वार्ता 'लाइफ सपोर्ट' पर है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत शांति प्रस्ताव की समीक्षा की और उस पर असंतोष जताया।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका की ताज़ा शांति पहल पर अपनी प्रतिक्रिया पाकिस्तान के माध्यम से भेजी है, जो तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम और हॉर्मुज स्ट्रेट के नियंत्रण जैसे मुद्दों पर विवाद बना हुआ है।
भारत पर असर और आगे की स्थिति
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका के बीच भारतीय ऊर्जा कंपनियाँ वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों का मूल्यांकन कर रही हैं। दोनों जहाजों का सफलतापूर्वक गुजरना अल्पकालिक राहत देता है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव के बने रहने से भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बन सकता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय जहाजों को इस संवेदनशील जलमार्ग पर ट्रांसपोंडर बंद करके गुजरना पड़ा हो।