भाजपा ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को कमला नेहरू अस्पताल के स्थानांतरण के खिलाफ किया अवगत
सारांश
Key Takeaways
- कमला नेहरू अस्पताल का स्थानांतरण जनहित के लिए चिंताजनक है।
- भाजपा ने इसे 'जनविरोधी' करार दिया है।
- स्वास्थ्य सेवाओं में संभावित संकट की आशंका जताई गई है।
- राज्यपाल से पारदर्शी जांच की मांग की गई है।
- पार्टी का आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया है।
शिमला, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राजभवन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने राज्य सरकार के द्वारा उठाए गए दो महत्वपूर्ण निर्णयों का विरोध करते हुए एक ज्ञापन सौंपा, जिन्हें उन्होंने 'जनविरोधी और अव्यावहारिक' करार दिया।
भाजपा के नेताओं ने कमला नेहरू अस्पताल के स्त्री रोग विभाग को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (आईजीएमसीएच) में स्थानांतरित करने के प्रस्तावित कदम पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस कदम से राज्य में मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कमला नेहरू अस्पताल लगभग एक सदी से महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा संस्थान के रूप में कार्यरत है।
भाजपा ने कहा कि यह प्रक्रिया बिना किसी औपचारिक अधिसूचना या पर्याप्त योजना के 'चुपचाप स्थानांतरण' के माध्यम से की जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा, "आईजीएमसीएच पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। एक अतिभारित संस्थान में 300 बिस्तरों वाली विशेष सुविधा को स्थापित करने से स्वास्थ्य सेवा वितरण और रोगी सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।"
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कमला नेहरू अस्पताल के उन्नयन में 20 करोड़ रुपए से अधिक की सार्वजनिक धनराशि का निवेश किया गया था, जो अब अप्रभावी हो जाने का खतरा है।
भाजपा ने अस्पताल के जमीन के संभावित वैकल्पिक उपयोग पर चिंता जताई और मामले की पारदर्शी जांच की मांग की।
इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने शिमला में प्रतिबंधित और विनियमित सड़कों के लिए पास शुल्क में भारी वृद्धि पर भी आपत्ति जताई।
भाजपा के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन से प्रोसेसिंग शुल्क 100 रुपए से बढ़कर 500 रुपए और पास शुल्क 2,000 रुपए से बढ़कर 10,000 रुपए हो गया है, जिससे निवासियों, व्यापारियों और कर्मचारियों पर वित्तीय बोझ पड़ेगा।
पार्टी ने इस कदम को 'मनमाना और राजस्व-प्रेरित' करार दिया और कहा कि ऐसे उपाय अनावश्यक कठिनाई और सार्वजनिक असंतोष पैदा करेंगे।
इसमें भारी जुर्माने और संभावित कारावास सहित कठोर दंडात्मक प्रावधानों को भी आलोचना का विषय बनाया गया, जो असंगत और लोकतांत्रिक मानदंडों के विपरीत बताए गए।
भाजपा ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे दोनों मुद्दों का संज्ञान लें और राज्य सरकार को कमला नेहरू अस्पताल में मौजूदा सेवाओं को बनाए रखने और पास शुल्क में प्रस्तावित वृद्धि को वापस लेने का निर्देश दें।
भाजपा के राज्य महासचिव संजीव कटवाल, मीडिया संयोजक करण नंदा और कोषाध्यक्ष कमल सूद सहित प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भाजपा राज्य सरकार के उन फैसलों के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करेगी जिन्हें उसने 'जनविरोधी' बताया।