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केरल में 52 दिन का ट्रॉलिंग प्रतिबंध लागू, मछली की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका

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केरल में 52 दिन का ट्रॉलिंग प्रतिबंध लागू, मछली की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका

सारांश

केरल में 9 जून की मध्यरात्रि से 52 दिनों का ट्रॉलिंग प्रतिबंध लागू हो गया है। बड़े मशीनीकृत जहाज़ों के लंगर डालने से मछली की आपूर्ति घटेगी और कीमतें बढ़ेंगी — जबकि मछुआरे आजीविका के संकट से जूझ रहे हैं और पड़ोसी राज्यों से 'अनुचित प्रतिस्पर्धा' की चिंता भी सता रही है।

मुख्य बातें

केरल में 9 जून 2026 की मध्यरात्रि से 52 दिनों का ट्रॉलिंग प्रतिबंध लागू, 31 जुलाई तक जारी रहेगा।
मशीनीकृत ट्रॉलर्स और गहरे समुद्री जहाज़ों पर रोक; पारंपरिक नौकाओं को संचालन की अनुमति।
ऑल केरल फिशिंग बोट ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने पूर्ण प्रतिबंध की माँग की, पड़ोसी राज्यों की नौकाओं के 15 जून बाद प्रवेश की आशंका जताई।
राज्य सरकार ने पंजीकृत मछुआरों के लिए मुफ्त राशन और वित्तीय सहायता की घोषणा की।
प्रमुख बंदरगाहों पर ईंधन-डीजल आपूर्ति बंद; तटीय पुलिस और समुद्री प्रवर्तन अधिकारियों की गश्त तेज़।

केरल में 9 जून 2026 की मध्यरात्रि से 52 दिनों का वार्षिक ट्रॉलिंग प्रतिबंध लागू हो गया है, जो 31 जुलाई तक जारी रहेगा। इस प्रतिबंध के चलते राज्य के बाज़ारों में मछली की आपूर्ति घटने और कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका जताई जा रही है। मानसून के दौरान मछलियों के प्रजनन काल की रक्षा के उद्देश्य से लगाए गए इस प्रतिबंध का सीधा असर केरल के करोड़ों उपभोक्ताओं की थाली पर पड़ सकता है।

प्रतिबंध का दायरा और उद्देश्य

यह प्रतिबंध मशीनीकृत ट्रॉलर्स और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले बड़े जहाज़ों पर लागू है, जिन्हें केरल के जलक्षेत्र से दूर रहने के लिए बाध्य किया गया है। मत्स्य विभाग के अनुसार, यह कदम समुद्री संसाधनों की रक्षा के लिए उठाया गया है — विशेष रूप से व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजाति ऑयल सार्डिन के प्रजनन काल के दौरान। हालाँकि, पारंपरिक मछली पकड़ने वाली छोटी नौकाओं को संचालन की अनुमति दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं को आंशिक राहत मिलने की उम्मीद है।

प्रवर्तन और अनुपालन

अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए मत्स्य विभाग ने विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। अन्य राज्यों की नौकाओं को केरल के जलक्षेत्र से बाहर जाने का निर्देश दिया गया है। समुद्री प्रवर्तन अधिकारी और तटीय पुलिस उल्लंघन रोकने के लिए गश्त तेज़ कर रहे हैं। अवैध मछली पकड़ने को हतोत्साहित करने के लिए प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों पर ईंधन और डीजल की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। पारंपरिक नौकाओं से समुद्र में जाने वाले मछुआरों को सुरक्षा उपकरण और आवश्यक दस्तावेज़ साथ रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मछुआरों की चिंता और आजीविका पर असर

मशीनीकृत नाव संचालकों ने 52 दिनों के प्रतिबंध के दौरान अपनी आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर गहरी चिंता जताई है। ऑल केरल फिशिंग बोट ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने इस पूरी अवधि में मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध की माँग की है। एसोसिएशन का आरोप है कि पड़ोसी राज्यों में प्रतिबंध 15 जून को समाप्त होने के बाद उनकी नौकाएँ केरल के जलक्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे स्थानीय मछुआरों को नुकसान होगा। संचालकों का कहना है कि मछली की घटती उपलब्धता और ईंधन की बढ़ती लागत ने पहले ही उनकी आय को प्रभावित किया है।

सरकार की राहत योजनाएँ

राज्य सरकार ने पंजीकृत मछुआरों और मत्स्य उद्योग से जुड़े श्रमिकों के लिए इस कठिन अवधि के दौरान मुफ्त राशन और वित्तीय सहायता की घोषणा की है। गौरतलब है कि यह वार्षिक प्रतिबंध हर मानसून सीज़न में लागू होता है और राज्य के मत्स्य क्षेत्र के लिए नियमित चुनौती बन चुका है। प्रतिबंध समाप्त होने के बाद आपूर्ति की स्थिति कितनी जल्दी सामान्य होती है, यह केरल के लाखों उपभोक्ताओं की नज़र में रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर साल एक ही विरोधाभास उभरता है — जब केरल के जहाज़ रुकते हैं, पड़ोसी राज्यों की नौकाएँ उनके जलक्षेत्र का फायदा उठाती हैं। 'ऑल केरल फिशिंग बोट ऑपरेटर्स एसोसिएशन' की माँग असल में एक क्षेत्रीय समन्वय की ज़रूरत को रेखांकित करती है, जिसे केंद्र सरकार अब तक ठोस रूप नहीं दे सकी है। मुफ्त राशन और वित्तीय सहायता राहत तो देती है, लेकिन ईंधन लागत और घटती मछली उपलब्धता की दीर्घकालिक समस्या को नहीं सुलझाती। जब तक सभी तटीय राज्यों में एक समान और समकालिक प्रतिबंध नहीं लागू होता, केरल के मछुआरे हर मानसून में दोहरी मार झेलते रहेंगे।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में ट्रॉलिंग प्रतिबंध क्या है और यह कब से कब तक है?
केरल में 9 जून 2026 की मध्यरात्रि से 52 दिनों का वार्षिक ट्रॉलिंग प्रतिबंध लागू हुआ है, जो 31 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा। यह प्रतिबंध मशीनीकृत ट्रॉलर्स और गहरे समुद्री जहाज़ों पर लागू है, ताकि मानसून के दौरान मछलियों के प्रजनन काल की रक्षा की जा सके।
ट्रॉलिंग प्रतिबंध से केरल में मछली की कीमतें कितनी बढ़ सकती हैं?
बड़े मशीनीकृत जहाज़ों के बंद होने से मछली की आपूर्ति में उल्लेखनीय कमी आने की आशंका है, जिससे बाज़ार में कीमतें बढ़ सकती हैं। हालाँकि पारंपरिक नौकाओं को अनुमति है, वे बड़े जहाज़ों की आपूर्ति की पूरी भरपाई नहीं कर सकतीं।
क्या ट्रॉलिंग प्रतिबंध के दौरान सभी मछली पकड़ने पर रोक है?
नहीं, यह प्रतिबंध केवल मशीनीकृत ट्रॉलर्स और गहरे समुद्री जहाज़ों पर है। पारंपरिक मछली पकड़ने वाली छोटी नौकाओं को संचालन की अनुमति दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं को आंशिक राहत मिलती रहेगी।
प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को क्या सरकारी सहायता मिलेगी?
राज्य सरकार ने पंजीकृत मछुआरों और मत्स्य उद्योग से जुड़े श्रमिकों के लिए मुफ्त राशन और वित्तीय सहायता की घोषणा की है। पारंपरिक नौकाओं से जाने वाले मछुआरों को सुरक्षा उपकरण और आवश्यक दस्तावेज़ साथ रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ऑल केरल फिशिंग बोट ऑपरेटर्स एसोसिएशन की माँग क्या है?
एसोसिएशन ने पूरी प्रतिबंध अवधि के दौरान सभी मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध की माँग की है। उनका आरोप है कि पड़ोसी राज्यों में प्रतिबंध 15 जून को समाप्त होने के बाद उनकी नौकाएँ केरल के जलक्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे स्थानीय मछुआरों को नुकसान होगा।
राष्ट्र प्रेस
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