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केरल के 'छिपे' कर राजस्व को उजागर करने की योजना: सीएम सतीशन ने पूर्व महालेखाकार से सुना रोडमैप

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केरल के 'छिपे' कर राजस्व को उजागर करने की योजना: सीएम सतीशन ने पूर्व महालेखाकार से सुना रोडमैप

सारांश

केरल पर ₹5 लाख करोड़ का कर्ज और 19 जून को पहला बजट — ऐसे में सीएम सतीशन ने पूर्व महालेखाकार का वह रोडमैप सुना जो कहता है: नया कर नहीं, बल्कि 'छिपे' कर की वसूली करो। 2014 के IS ऑडिट नमूने में ही ₹12,282 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिला था — कुल संग्रह का 55%।

मुख्य बातें

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीशन ने 15 जून को पूर्व प्रधान महालेखाकार डॉ.
बिजू जैकब का वित्तीय रोडमैप सुना।
2014 के IS ऑडिट नमूने में ₹22,414 करोड़ के वास्तविक संग्रह के मुकाबले ₹12,282 करोड़ अतिरिक्त संभावित कर राजस्व — यानी 55% का अंतर — पाया गया था।
केरल पर वर्तमान में ₹5 लाख करोड़ से अधिक का सार्वजनिक ऋण है।
सीएम 19 जून को अपना पहला बजट पेश करने वाले हैं।
केरल में ₹1,170 करोड़ के ITC धोखाधड़ी और ₹580 करोड़ के कर चोरी के बड़े जीएसटी घोटाले सामने आ चुके हैं।
प्रस्तावित संयुक्त ऑडिट टीम में कर अधिकारी, CAG विशेषज्ञ और चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल होंगे।

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार, 15 जून को तिरुवनंतपुरम में राज्य के पूर्व प्रधान महालेखाकार डॉ. बिजू जैकब द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत वित्तीय रोडमैप पर गंभीरता से विचार किया। इस रोडमैप का मूल सुझाव यह है कि केरल नए कर लगाने के बजाय उन्नत डेटा एनालिटिक्स और सूचना प्रणाली (IS) ऑडिट के माध्यम से अपने मौजूदा राजस्व को कहीं अधिक प्रभावी ढंग से वसूल कर सकता है।

बैठक की पृष्ठभूमि

यह बैठक वित्त और कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई। गौरतलब है कि यह ऐसे नाज़ुक समय में आयोजित की गई जब केरल पर ₹5 लाख करोड़ से अधिक का सार्वजनिक ऋण है और मुख्यमंत्री सतीशन 19 जून को अपना पहला बजट पेश करने वाले हैं। डॉ. बिजू जैकब ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और विषय की गहरी समझ प्रदर्शित की।

मुख्य समस्या: वसूली नहीं, स्रोत की कमी नहीं

डॉ. जैकब ने स्पष्ट किया कि केरल की सबसे बड़ी वित्तीय चुनौती नए राजस्व स्रोतों की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि उन करों को पूरी तरह वसूल न कर पाना है जो कानूनी रूप से राज्य को मिलने चाहिए। उनके अनुसार, 'मेरा सुझाव उन करदाताओं और कर-आधार की पहचान करने पर केंद्रित है जो वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली के दायरे से बाहर हैं। इसके लिए तकनीक आधारित जाँच और विश्लेषण की आवश्यकता है।'

2014 के IS ऑडिट का चौंकाने वाला आँकड़ा

डॉ. जैकब ने 2014 में किए गए एक सूचना प्रणाली ऑडिट अध्ययन का हवाला दिया, जिसके अनुसार KVAT, KGST और CST के तहत ₹22,414 करोड़ के वास्तविक कर संग्रह के मुकाबले नमूना विश्लेषण में ₹12,282 करोड़ अतिरिक्त संभावित कर राजस्व की पहचान हुई थी — जो कुल संग्रह का लगभग 55 प्रतिशत था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संपूर्ण डेटा का विश्लेषण किया जाता, तो यह अंतर और भी अधिक हो सकता था।

प्रस्तावित IS ऑडिट में क्या शामिल होगा

डॉ. जैकब ने एक व्यापक तकनीक-आधारित IS ऑडिट का प्रस्ताव रखा, जिसमें निम्नलिखित पहलू शामिल होंगे: फर्जी पंजीकरणों की पहचान, शेल कंपनियों के नेटवर्क का पता लगाना, कारोबार छिपाने के मामलों की जाँच, ई-वे बिल में विसंगतियाँ, जीएसटी और आयकर डेटा में अंतर, संदिग्ध रिफंड दावे तथा ERP ऑडिट ट्रेल्स की समीक्षा। उन्होंने केरल में सामने आए बड़े जीएसटी घोटालों का भी उल्लेख किया — जिनमें ₹1,170 करोड़ के फर्जी पंजीकरण और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) धोखाधड़ी का मामला, तथा ₹580 करोड़ के कर चोरी का एक अन्य मामला शामिल है।

आगे की राह

डॉ. जैकब ने मुख्यमंत्री को सुझाया कि कर अधिकारियों, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की एक संयुक्त ऑडिट टीम कुछ ही महीनों में यह ऑडिट पूरा कर सकती है और करोड़ों रुपये की वसूली योग्य राशि की पहचान कर सकती है। 19 जून को पेश होने वाले बजट से पहले यह बैठक राज्य सरकार की राजस्व रणनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल राजनीतिक इच्छाशक्ति का है — केरल में कर चोरी के बड़े नेटवर्क अक्सर प्रभावशाली व्यावसायिक हितों से जुड़े होते हैं। 2014 का IS ऑडिट नमूना एक दशक पहले का है; GST युग में डेटा की जटिलता और भी बढ़ी है, जिससे वास्तविक वसूली का आँकड़ा अनुमान से कम भी हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि 19 जून के बजट में यदि इस रोडमैप को ठोस आवंटन और समयसीमा नहीं मिली, तो यह बैठक भी पिछली सरकारों की उन अनगिनत 'नीतिगत चर्चाओं' की सूची में जुड़ जाएगी जो कागज़ से आगे नहीं बढ़ीं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल के 'छिपे' कर राजस्व को उजागर करने की योजना क्या है?
यह पूर्व प्रधान महालेखाकार डॉ. बिजू जैकब द्वारा प्रस्तुत एक रोडमैप है जिसमें नए कर लगाने की बजाय उन्नत डेटा एनालिटिक्स और IS ऑडिट के ज़रिए उन करों की वसूली का सुझाव है जो कानूनी रूप से राज्य को मिलने चाहिए लेकिन मौजूदा प्रणाली में छूट जाते हैं। 2014 के नमूना ऑडिट में ही ₹12,282 करोड़ का अतिरिक्त संभावित राजस्व पाया गया था।
IS ऑडिट से केरल को कितना अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है?
2014 के IS ऑडिट नमूने के अनुसार, ₹22,414 करोड़ के वास्तविक कर संग्रह के मुकाबले ₹12,282 करोड़ — यानी कुल संग्रह का लगभग 55% — अतिरिक्त वसूली योग्य राजस्व की पहचान हुई थी। डॉ. जैकब का कहना है कि संपूर्ण डेटा के विश्लेषण से यह अंतर और भी बड़ा हो सकता था।
सीएम सतीशन का पहला बजट कब पेश होगा और इस बैठक का उससे क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन 19 जून को अपना पहला बजट पेश करने वाले हैं। यह बैठक बजट से ठीक पहले हुई, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार राजस्व बढ़ाने के वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रही है।
केरल में कौन-से बड़े जीएसटी घोटाले सामने आए हैं?
डॉ. जैकब ने दो प्रमुख मामलों का उल्लेख किया: ₹1,170 करोड़ के फर्जी पंजीकरण और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) धोखाधड़ी का मामला, तथा ₹580 करोड़ के कर चोरी का एक अन्य मामला। ये मामले दर्शाते हैं कि राज्य में कर प्रणाली में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ हैं।
प्रस्तावित संयुक्त ऑडिट टीम में कौन होंगे?
डॉ. जैकब ने सुझाया है कि इस टीम में कर अधिकारी, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के विशेषज्ञ और चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल हों। उनके अनुसार यह टीम कुछ ही महीनों में ऑडिट पूरा कर करोड़ों रुपये की वसूली योग्य राशि की पहचान कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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