केरल के 'छिपे' कर राजस्व को उजागर करने की योजना: सीएम सतीशन ने पूर्व महालेखाकार से सुना रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार, 15 जून को तिरुवनंतपुरम में राज्य के पूर्व प्रधान महालेखाकार डॉ. बिजू जैकब द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत वित्तीय रोडमैप पर गंभीरता से विचार किया। इस रोडमैप का मूल सुझाव यह है कि केरल नए कर लगाने के बजाय उन्नत डेटा एनालिटिक्स और सूचना प्रणाली (IS) ऑडिट के माध्यम से अपने मौजूदा राजस्व को कहीं अधिक प्रभावी ढंग से वसूल कर सकता है।
बैठक की पृष्ठभूमि
यह बैठक वित्त और कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई। गौरतलब है कि यह ऐसे नाज़ुक समय में आयोजित की गई जब केरल पर ₹5 लाख करोड़ से अधिक का सार्वजनिक ऋण है और मुख्यमंत्री सतीशन 19 जून को अपना पहला बजट पेश करने वाले हैं। डॉ. बिजू जैकब ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और विषय की गहरी समझ प्रदर्शित की।
मुख्य समस्या: वसूली नहीं, स्रोत की कमी नहीं
डॉ. जैकब ने स्पष्ट किया कि केरल की सबसे बड़ी वित्तीय चुनौती नए राजस्व स्रोतों की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि उन करों को पूरी तरह वसूल न कर पाना है जो कानूनी रूप से राज्य को मिलने चाहिए। उनके अनुसार, 'मेरा सुझाव उन करदाताओं और कर-आधार की पहचान करने पर केंद्रित है जो वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली के दायरे से बाहर हैं। इसके लिए तकनीक आधारित जाँच और विश्लेषण की आवश्यकता है।'
2014 के IS ऑडिट का चौंकाने वाला आँकड़ा
डॉ. जैकब ने 2014 में किए गए एक सूचना प्रणाली ऑडिट अध्ययन का हवाला दिया, जिसके अनुसार KVAT, KGST और CST के तहत ₹22,414 करोड़ के वास्तविक कर संग्रह के मुकाबले नमूना विश्लेषण में ₹12,282 करोड़ अतिरिक्त संभावित कर राजस्व की पहचान हुई थी — जो कुल संग्रह का लगभग 55 प्रतिशत था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संपूर्ण डेटा का विश्लेषण किया जाता, तो यह अंतर और भी अधिक हो सकता था।
प्रस्तावित IS ऑडिट में क्या शामिल होगा
डॉ. जैकब ने एक व्यापक तकनीक-आधारित IS ऑडिट का प्रस्ताव रखा, जिसमें निम्नलिखित पहलू शामिल होंगे: फर्जी पंजीकरणों की पहचान, शेल कंपनियों के नेटवर्क का पता लगाना, कारोबार छिपाने के मामलों की जाँच, ई-वे बिल में विसंगतियाँ, जीएसटी और आयकर डेटा में अंतर, संदिग्ध रिफंड दावे तथा ERP ऑडिट ट्रेल्स की समीक्षा। उन्होंने केरल में सामने आए बड़े जीएसटी घोटालों का भी उल्लेख किया — जिनमें ₹1,170 करोड़ के फर्जी पंजीकरण और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) धोखाधड़ी का मामला, तथा ₹580 करोड़ के कर चोरी का एक अन्य मामला शामिल है।
आगे की राह
डॉ. जैकब ने मुख्यमंत्री को सुझाया कि कर अधिकारियों, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की एक संयुक्त ऑडिट टीम कुछ ही महीनों में यह ऑडिट पूरा कर सकती है और करोड़ों रुपये की वसूली योग्य राशि की पहचान कर सकती है। 19 जून को पेश होने वाले बजट से पहले यह बैठक राज्य सरकार की राजस्व रणनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।