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गरियाबंद में सागौन तस्करी का भंडाफोड़: ₹6 लाख की लकड़ी जब्त, 1 गिरफ्तार, 7 फरार

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गरियाबंद में सागौन तस्करी का भंडाफोड़: ₹6 लाख की लकड़ी जब्त, 1 गिरफ्तार, 7 फरार

सारांश

गरियाबंद में ओडिशा सीमा के पास सागौन तस्करी का संगठित नेटवर्क उजागर — तालाब और ज़मीन में दफन लकड़ी, साही के अवयव, और घरों में बने फर्नीचर ने बताया कि यह महज तस्करी नहीं, पूरा अवैध उद्योग था। ₹6 लाख की जब्ती, 1 गिरफ्तार, 7 अभी भी फरार।

मुख्य बातें

गरियाबंद पुलिस और वन विभाग ने ओडिशा सीमा के पास सागौन तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
कुल 193 नग सागौन स्लीपर और 4.56 घन मीटर लकड़ी जब्त, अनुमानित कीमत ₹6 लाख ।
1 आरोपी गिरफ्तार ; 7 आरोपी फरार, विशेष टीमें तलाश में जुटीं।
तीन आरोपियों के पास वन्यप्राणी साही (अनुसूची-2) के अवयव और शिकार के फंदे भी मिले।
घरों से सागौन के फर्नीचर बरामद, अवैध लकड़ी से फर्नीचर निर्माण के नेटवर्क का भी खुलासा।
प्रारंभिक जाँच में आरोपियों के ओडिशा के तस्कर गिरोहों से जुड़े होने के संकेत।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में ओडिशा सीमा के निकट सागौन लकड़ी की अवैध तस्करी का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। गरियाबंद पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 1 आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि 7 अन्य आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे। प्रारंभिक जाँच में आरोपियों के ओडिशा के तस्कर गिरोहों से संबंध होने के संकेत मिले हैं।

मुख्य घटनाक्रम

5 जून को पुलिस को सूचना मिली कि परिक्षेत्र दक्षिण उदंती (कोर) के साहेबिनकछार गाँव में सागौन स्लीपर रखा गया है। इस सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने विघाधर नामक व्यक्ति के ठिकाने पर छापा मारा, जहाँ भारी मात्रा में सागौन की लकड़ी बरामद हुई।

9 जून को की गई संयुक्त कार्रवाई में कई संदिग्धों के घरों की तलाशी ली गई। अधिकारियों के अनुसार, पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने लकड़ी को अलग-अलग स्थानों पर छिपा दिया था — कुछ लकड़ियाँ तालाब में फेंकी गईं, जबकि कई हिस्सों को घर के आँगन और बाड़ी में गड्ढे खोदकर दफना दिया गया।

डॉग स्क्वाड की भूमिका और जब्ती का ब्योरा

वन विभाग की डॉग स्क्वाड की सहायता से छिपाई गई लकड़ियों का पता लगाया गया और उन्हें जब्त किया गया। कुल मिलाकर 193 नग सागौन स्लीपर और लगभग 4.56 घन मीटर लकड़ी बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹6 लाख आँकी गई है।

चार आरोपियों के पास से अवैध सागौन लकड़ी जब्त की गई। तीन अन्य आरोपियों के ठिकानों से वन्यप्राणी साही (अनुसूची-2) के अवयव और शिकार में उपयोग होने वाले फंदे भी बरामद किए गए। इसके अलावा मौके से एक आरा मशीन और तीन बड़े हाथ के आरे भी जब्त किए गए।

फर्नीचर नेटवर्क का खुलासा

वन विभाग के अनुसार, आरोपियों के घरों से सागौन से बने सोफा सेट सहित अन्य फर्नीचर भी बरामद हुए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि तस्करी की लकड़ी का उपयोग स्थानीय स्तर पर फर्नीचर निर्माण के अवैध नेटवर्क में भी हो रहा था। यह मामला केवल लकड़ी की तस्करी तक सीमित नहीं, बल्कि संगठित वन अपराध का हिस्सा प्रतीत होता है।

आगे की जाँच और फरार आरोपी

अधिकारियों के अनुसार, वन अपराध प्रकरण के तहत अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं और जाँच जारी है। फरार 7 आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र ओडिशा सीमा से सटा होने के कारण अंतरराज्यीय तस्करी के लिए संवेदनशील माना जाता है, और जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क की व्यापकता का पता लगाने में जुटी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसी छापेमारी केवल निचले स्तर के वाहकों को पकड़ती है और नेटवर्क बरकरार रहता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गरियाबंद सागौन तस्करी मामले में क्या हुआ?
गरियाबंद पुलिस और वन विभाग ने ओडिशा सीमा के पास संयुक्त कार्रवाई में 193 नग सागौन स्लीपर सहित करीब ₹6 लाख की अवैध लकड़ी जब्त की। 1 आरोपी गिरफ्तार हुआ और 7 फरार हैं।
छापेमारी में और क्या-क्या बरामद हुआ?
लकड़ी के अलावा वन्यप्राणी साही (अनुसूची-2) के अवयव, शिकार के फंदे, आरा मशीन, तीन बड़े हाथ के आरे और सागौन से बने सोफा सेट सहित फर्नीचर भी बरामद किए गए। इससे अवैध फर्नीचर निर्माण नेटवर्क का भी खुलासा हुआ।
आरोपियों ने लकड़ी कहाँ छिपाई थी?
अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने लकड़ी तालाब में फेंकी और घर के आँगन व बाड़ी में गड्ढे खोदकर दफना दी। वन विभाग की डॉग स्क्वाड की मदद से इन्हें ढूँढ़कर जब्त किया गया।
क्या इस मामले का ओडिशा के तस्कर गिरोहों से संबंध है?
प्रारंभिक जाँच में आरोपियों के ओडिशा के तस्कर गिरोहों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। आगे की जाँच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।
इस मामले में कितने लोगों पर कार्रवाई हुई?
कुल 8 संदिग्धों पर कार्रवाई हुई — 1 को गिरफ्तार किया गया और 7 फरार हैं। वन अपराध प्रकरण के तहत अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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