कोलकाता सिंडिकेट मामला: महीनों फरार रहने के बाद सोना पप्पू ईडी के सामने पेश, ₹2 करोड़ बरामद
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के चर्चित सिंडिकेट मामले में बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू सोमवार, 18 मई 2026 को सॉल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के सामने अचानक पेश हो गया। वह फरवरी से लापता था और जांच एजेंसियाँ उसे देशभर में तलाश रही थीं।
मुख्य घटनाक्रम
फरवरी 2026 में रबींद्र सरोवर में दो गुटों के बीच हुई झड़प में पप्पू का नाम सामने आने के बाद पुलिस उसे खोज रही थी। इस दौरान वह रुक-रुककर सोशल मीडिया पर लाइव आता रहा, लेकिन उसका ठिकाना किसी को नहीं पता चला। ईडी ने सिंडिकेट जांच के तहत उसके घर पर छापेमारी भी की थी। सोमवार को बिना किसी पूर्व सूचना के वह ईडी दफ्तर पहुँच गया।
दफ्तर में प्रवेश के दौरान जब पप्पू से गिरफ्तारी की आशंका के बारे में पूछा गया, तो उसने कहा, 'मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है।' यह दावा उसने एक से अधिक बार दोहराया।
ईडी की जांच और बरामदगी
अप्रैल 2025 में ईडी ने पप्पू के आवास पर तलाशी ली थी, जिसमें करीब ₹2 करोड़ नकद, एक महंगी कार और संपत्ति के कई दस्तावेज जब्त किए गए थे। ईडी सूत्रों के अनुसार, पप्पू के खिलाफ रंगदारी, ज़मीन पर कब्जे और धमकी देने सहित कई मामलों में एफआईआर दर्ज हैं। उस पर आर्म्स एक्ट के तहत भी एक मामला है।
जांच एजेंसी के अनुसार, पप्पू दक्षिण कोलकाता के कस्बा और बालीगंज इलाकों में कई सिंडिकेट संचालित करता है।
अन्य गिरफ्तारियाँ और पुलिस कनेक्शन
इस मामले में ईडी पहले ही कंस्ट्रक्शन कारोबारी जॉय कामदार को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा, जांच में मिले सुरागों के आधार पर ईडी ने फर्न रोड स्थित कोलकाता पुलिस अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर पर छापा मारा। शांतनु को पहले पप्पू मामले में पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
फरारी के दौरान संभावित हवाला नेटवर्क
जांचकर्ताओं का कथित तौर पर मानना है कि पप्पू के लापता रहने के दौरान उसे हवाला नेटवर्क के ज़रिए धन भेजा गया होगा। यह ऐसे समय में आया है जब ईडी कोलकाता में सिंडिकेट-आधारित अवैध वित्तीय गतिविधियों पर शिकंजा कस रही है।
आगे क्या होगा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईडी पप्पू को इस मामले में गिरफ्तार करेगी। पेशी के बाद जांच एजेंसी उससे विस्तृत पूछताछ कर सकती है। सिंडिकेट नेटवर्क और हवाला कड़ियों को उजागर करना अब जांच की प्राथमिकता बताई जा रही है।