कोलकाता: ईडी ने 'सोना पप्पू' की 10 दिन की हिरासत माँगी, भूमि सिंडिकेट और ₹7.7 करोड़ की जमीन ₹1 करोड़ में खरीदने का आरोप

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कोलकाता: ईडी ने 'सोना पप्पू' की 10 दिन की हिरासत माँगी, भूमि सिंडिकेट और ₹7.7 करोड़ की जमीन ₹1 करोड़ में खरीदने का आरोप

सारांश

कोलकाता के कथित भूमि सिंडिकेट सरगना 'सोना पप्पू' को ईडी ने नौ घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। अदालत में 10 दिन की हिरासत माँगी गई, साथ ही ₹7.7 करोड़ की जमीन ₹1 करोड़ में हड़पने, 30 कंपनियों और करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन के आरोप लगाए गए।

मुख्य बातें

ईडी ने 19 मई 2026 को बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' को नौ घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया।
एजेंसी ने अदालत से 10 दिन की हिरासत माँगी; आरोप — रंगदारी, धमकी, जमीन कब्जाना, अवैध हथियार।
2024 में ₹7.7 करोड़ की जमीन कथित तौर पर ₹1 करोड़ में और 2022 में ₹5.42 करोड़ की 18 कट्ठा जमीन ₹1.39 करोड़ में खरीदने का आरोप।
जाँच में पप्पू और परिवार के नाम पर 30 कंपनियाँ और करोड़ों के संदिग्ध बैंक लेनदेन सामने आए।
पप्पू पर बेहाला के कारोबारी जॉय कामदार और कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के लिए काम करने का आरोप।
बचाव पक्ष ने हिरासत माँग का विरोध किया; कहा — व्यापार करना अपराध नहीं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता के कथित भूमि सिंडिकेट सरगना बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' को 19 मई 2026 को अदालत में पेश करते हुए उसकी 10 दिन की हिरासत की माँग की। एजेंसी ने आरोप लगाया कि पप्पू एक संगठित भूमि सिंडिकेट का संचालन करता था, जो बुजुर्ग और कमज़ोर जमीन मालिकों को धमकाकर उनकी संपत्तियाँ बाज़ार मूल्य से बेहद कम कीमत पर हड़प लेता था। सोमवार रात करीब नौ घंटे की पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।

मुख्य आरोप और गिरोह की संरचना

ईडी के वकील ने अदालत को बताया कि पप्पू अकेले नहीं, बल्कि एक तीन सदस्यीय गिरोह के तहत काम करता था। जाँच एजेंसी के अनुसार वह बेहाला के कारोबारी जॉय कामदार और कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के लिए काम करता था और भूमि सिंडिकेट की अहम जिम्मेदारियाँ संभालता था। एजेंसी ने उस पर रंगदारी, धमकी, जमीन कब्जाने और अवैध हथियार रखने जैसे कई संगीन आरोप लगाए हैं।

जमीन की कम कीमत पर खरीद के उदाहरण

ईडी ने अदालत में ठोस उदाहरण प्रस्तुत किए। एजेंसी के अनुसार 2024 में ₹7.7 करोड़ मूल्य की एक जमीन कथित तौर पर केवल ₹1 करोड़ में खरीदी गई। इसी तरह 2022 में ₹5.42 करोड़ मूल्य की 18 कट्ठा जमीन मात्र ₹1.39 करोड़ में हासिल की गई। एजेंसी का कहना है कि इन लेनदेन में 'आपराधिक ताकत' का इस्तेमाल किया गया।

हथियार बरामदगी और कंकुलिया उपद्रव

ईडी ने अदालत को बताया कि पप्पू के घर पर छापेमारी के दौरान एक रिवॉल्वर बरामद हुई, जो कथित तौर पर कारोबारी जॉय कामदार के संगठन के नाम पर खरीदी गई थी। गौरतलब है कि फरवरी में रवींद्र सरोवर थाने के अंतर्गत कंकुलिया इलाके में हुए उपद्रव के बाद पप्पू का नाम सामने आया था, जब स्थानीय लोगों ने दो गुटों के बीच हिंसा और तोड़फोड़ में उसकी संलिप्तता का आरोप लगाया था। हालाँकि पप्पू के वकील ने कहा कि हथियार अधिकृत डीलर से सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए खरीदी गई थी।

30 कंपनियाँ और करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन

जाँच में पप्पू और उसके परिवार के नाम पर करीब 30 कंपनियों का पता चला है। बैंक खातों की जाँच में कामदार और पप्पू से जुड़ी कंपनियों के बीच करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। ईडी का दावा है कि पप्पू कामदार की कंपनियों की योजनाओं को ज़मीन पर लागू करने का काम करता था। एजेंसी ने यह भी कहा कि उसे तीन बार समन भेजे गए, लेकिन वह किसी भी सुनवाई में नहीं आया और अचानक सोमवार को उपस्थित हुआ।

बचाव पक्ष के तर्क और आगे की कार्यवाही

पप्पू के वकील ने ईडी की हिरासत माँग का विरोध करते हुए कहा कि व्यापार करना कोई अपराध नहीं है और यह जाँच का विषय है कि कारोबार से कमाया गया पैसा भ्रष्टाचार से जुड़ा है या नहीं। वकील ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जमीन कम कीमत पर खरीदी गई थी, तो जमीन मालिकों ने शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई। उन्होंने दावा किया कि उनके मुवक्किल ने कोई अवैध कमाई नहीं की और उनकी छवि खराब करने के लिए ये आरोप लगाए जा रहे हैं। अदालत का फैसला इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक कारोबारी और एक पुलिस अधिकारी तक फैला है, जो प्रशासनिक-आपराधिक सांठगांठ की ओर इशारा करता है। ₹7.7 करोड़ की जमीन ₹1 करोड़ में खरीदने के आरोप यदि सिद्ध होते हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि एक व्यवस्थागत विफलता की तस्वीर पेश करते हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या जाँच एजेंसी 30 कंपनियों के जाल को उन तक ले जा पाती है जिन्होंने कथित तौर पर इस पूरे तंत्र को संरक्षण दिया।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सोना पप्पू' कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
'सोना पप्पू' कोलकाता के बिस्वजीत पोद्दार का उपनाम है, जिसे ईडी ने 19 मई 2026 को सिंडिकेट और भ्रष्टाचार मामले में नौ घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। उस पर भूमि सिंडिकेट चलाने, जमीन मालिकों को धमकाकर संपत्तियाँ कम कीमत पर हड़पने और अवैध हथियार रखने के आरोप हैं।
ईडी ने अदालत में जमीन खरीद के कौन-से उदाहरण दिए?
ईडी के अनुसार 2024 में ₹7.7 करोड़ मूल्य की एक जमीन कथित तौर पर केवल ₹1 करोड़ में खरीदी गई और 2022 में ₹5.42 करोड़ मूल्य की 18 कट्ठा जमीन मात्र ₹1.39 करोड़ में हासिल की गई। एजेंसी का कहना है कि इन लेनदेन में धमकी और 'आपराधिक ताकत' का इस्तेमाल हुआ।
इस मामले में जॉय कामदार और शांतनु सिन्हा बिस्वास की क्या भूमिका बताई गई है?
जाँच एजेंसी के अनुसार पप्पू बेहाला के कारोबारी जॉय कामदार और कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के लिए काम करता था। ईडी का दावा है कि पप्पू कामदार की कंपनियों की योजनाओं को ज़मीन पर लागू करता था और दोनों के बीच करोड़ों रुपये के बैंक लेनदेन का पता चला है।
पप्पू के घर से क्या बरामद हुआ और बचाव पक्ष का क्या कहना है?
ईडी ने बताया कि पप्पू के घर पर छापेमारी में एक रिवॉल्वर मिली, जो कथित तौर पर जॉय कामदार के संगठन के नाम पर खरीदी गई थी। पप्पू के वकील ने कहा कि हथियार अधिकृत डीलर से सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए खरीदी गई थी और उनके मुवक्किल ने कोई अवैध कमाई नहीं की।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
अदालत ईडी की 10 दिन की हिरासत माँग पर फैसला करेगी। जाँच एजेंसी पप्पू और उसके परिवार के नाम पर मिली 30 कंपनियों तथा करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन की आगे जाँच करना चाहती है। अदालत का आदेश इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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