गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा: गांधीनगर में राष्ट्रीय कार्यशाला, 50 लाख मछुआरों को फायदे की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए गुजरात के गांधीनगर में एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करने की घोषणा की है। इस कार्यशाला का उद्देश्य मछुआरों को उच्च मूल्य वाले मत्स्य संसाधनों — विशेष रूप से टूना और टूना जैसी प्रजातियों — के दोहन के लिए प्रेरित करना है। इसमें एक्सेस पास और लेटर ऑफ ऑथराइजेशन धारकों के साथ सीधी बातचीत भी होगी।
कार्यशाला में कौन होगा शामिल
गुरुवार को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और क्षेत्र के अन्य प्रमुख हितधारक उपस्थित रहेंगे। नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, वित्तीय संस्थान, उद्योग प्रतिनिधि, सहकारी समितियाँ और मछुआरे — सभी एक ही मंच पर आकर क्षेत्र की जमीनी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
यह आयोजन एक ऐसा बहु-हितधारक मंच है जो नीतियों को व्यावहारिक धरातल पर उतारने की कोशिश करता है। कार्यशाला से निकलने वाले सुझाव टेक्नोलॉजी, कौशल विकास, वित्त और बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाने में सहायक होने की उम्मीद है।
भारत का मत्स्य क्षेत्र: आंकड़ों की तस्वीर
भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में समुद्री मछली पकड़ने की कुल क्षमता का अनुमान 58.6 लाख मीट्रिक टन आँका गया है। यह क्षेत्र देश के लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका का आधार है और खाद्य सुरक्षा, पोषण, रोज़गार एवं निर्यात आय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग ₹73,890 करोड़ मूल्य के समुद्री भोजन का निर्यात किया। यह देश को दुनिया के अग्रणी मछली एवं एक्वाकल्चर उत्पादकों की श्रेणी में रखता है।
गहरे समुद्र में अवसर, लेकिन पहुँच सीमित
गौरतलब है कि अभी अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियाँ तट से 40-50 नॉटिकल मील के दायरे में ही सिमटी हैं। इसके विपरीत, गहरे पानी और राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के समुद्री इलाकों में उच्च मूल्य वाली प्रजातियों — खासकर टूना और टूना जैसी मछलियों — को पकड़ने के बड़े अवसर मौजूद हैं। यह असंतुलन इस कार्यशाला की ज़रूरत को और प्रासंगिक बनाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार मत्स्य पालन सेक्टर के डिजिटलाइजेशन और मछुआरों के उत्पादक संगठनों तथा सहकारी समितियों को मज़बूत करने पर ज़ोर दे रही है।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र
इस कार्यशाला में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की पूरी वैल्यू चेन को समेटने वाले विशेष तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। इनमें संसाधन क्षमता का आकलन, जहाज़ों का आधुनिकीकरण, कौशल विकास, फाइनेंसिंग, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात बाज़ारों तक पहुँच जैसे विषय शामिल हैं।
आगे की राह
इस कार्यशाला से निकलने वाले सुझाव और सिफारिशें सरकार की नीति-निर्माण प्रक्रिया में इनपुट के रूप में काम आएँगी। यदि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की भागीदारी बढ़ती है, तो इसका सीधा असर मछुआरों की आय और भारत के समुद्री निर्यात दोनों पर पड़ सकता है।