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पीएमएमएसवाई से मछली उत्पादन 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुँचा, एक साल में 56 लाख टन की छलांग

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पीएमएमएसवाई से मछली उत्पादन 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुँचा, एक साल में 56 लाख टन की छलांग

सारांश

पीएमएमएसवाई के छह साल में मछली उत्पादन 141.64 से उछलकर 197.75 लाख टन पर पहुँचा — एक साल में 56 लाख टन की बढ़त। 1.47 लाख महिला लाभार्थी, ₹2,797 करोड़ की कोल्ड चेन और 28,000 से अधिक परिवहन इकाइयाँ — यह योजना अब सिर्फ उत्पादन नहीं, पूरी आपूर्ति श्रृंखला को बदलने की कोशिश कर रही है।

मुख्य बातें

देश का मछली उत्पादन 2024-25 में बढ़कर 197.75 लाख टन हुआ, जो 2023-24 में 141.64 लाख टन था।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने 21 जुलाई को लोकसभा में यह जानकारी दी।
1,47,654 महिला लाभार्थियों के लिए ₹4,178.30 करोड़ की परियोजनाएँ मंजूर; महिलाओं को इकाई लागत का 60% तक सहायता।
कोल्ड चेन और विपणन अवसंरचना के लिए ₹2,797 करोड़ स्वीकृत; 775 कोल्ड स्टोरेज और 28,489 परिवहन इकाइयाँ शामिल।
6,018 मछली कियोस्क , 117 खुदरा और 24 थोक मछली बाजार भी योजना के दायरे में।

केंद्र सरकार ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत देश का मछली उत्पादन 2024-25 में बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है — जबकि 2023-24 में यह आँकड़ा 141.64 लाख टन था। यह एक वर्ष में 56 लाख टन से अधिक की वृद्धि है, जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे तेज़ सालाना बढ़त में से एक मानी जा रही है।

योजना की पृष्ठभूमि और दायरा

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से पीएमएमएसवाई को लागू किया है। पिछले छह वर्षों की कार्यान्वयन अवधि में इस योजना ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र विकास में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पहले से ही विश्व के शीर्ष मछली उत्पादक देशों में शामिल है।

महिला लाभार्थियों पर विशेष ध्यान

मंत्री ने बताया कि पीएमएमएसवाई में महिला लाभार्थियों को इकाई लागत के 60 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो सामान्य श्रेणी से अधिक है। 2020-21 से 2025-26 के बीच विभिन्न राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में 1,47,654 महिला लाभार्थियों को शामिल करने के लिए ₹4,178.30 करोड़ की मत्स्यपालन विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। गौरतलब है कि यह समावेशी दृष्टिकोण ग्रामीण महिलाओं को आजीविका की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है।

कोल्ड चेन और विपणन अवसंरचना

मत्स्यपालन विभाग ने पीएमएमएसवाई और मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) के तहत अप्रैल 2026 तक ₹2,797 करोड़ के कोल्ड चेन और विपणन प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत देशभर में 775 कोल्ड स्टोरेज एवं आइस प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।

मछली परिवहन के लिए 28,489 इकाइयाँ स्वीकृत की गई हैं, जिनमें आइस बॉक्स वाली 13,718 मोटरसाइकिलें, 8,527 साइकिलें, 4,257 ऑटो-रिक्शा, 1,577 इंसुलेटेड ट्रक और 410 रेफ्रिजरेटेड ट्रक शामिल हैं। इसके अलावा 1,394 जीवित मछली बिक्री इकाइयाँ, 6,018 मछली कियोस्क, 117 खुदरा मछली बाजार और 24 थोक मछली बाजार भी इस योजना के तहत आते हैं।

आगे की राह

मंत्रालय के अनुसार, कोल्ड चेन अवसंरचना का विस्तार मछली की बर्बादी घटाने और मछुआरों को बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में अहम कदम है। आँकड़ों के अनुसार, भारत में कटाई के बाद मछली की क्षति को कम करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है, और यह निवेश उसी दिशा में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वितरण तंत्र इसी गति से मज़बूत होता रहा, तो आने वाले वर्षों में निर्यात आँकड़ों में भी सुधार संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि मछुआरों की आय में भी उसी अनुपात में दिखती है। उत्पादन और आय के बीच की खाई अक्सर कोल्ड चेन की कमज़ोरी और बिचौलियों के दबदबे से पैदा होती है — जिसे पाटने के लिए ₹2,797 करोड़ की अवसंरचना लगाई जा रही है, पर उसका ज़मीनी असर अभी सत्यापित होना बाकी है। महिला लाभार्थियों की संख्या और 60% सब्सिडी का प्रावधान समावेश की दिशा में सकारात्मक है, लेकिन यह देखना ज़रूरी होगा कि इन परियोजनाओं की पूर्णता दर और वास्तविक लाभ हस्तांतरण कितना पारदर्शी है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) क्या है?
पीएमएमएसवाई भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है, जो वित्तीय वर्ष 2020-21 से मत्स्यपालन और जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लागू की गई है। इसका उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, कोल्ड चेन अवसंरचना विकसित करना और मछुआरों — विशेषकर महिलाओं — की आय में सुधार करना है।
2024-25 में मछली उत्पादन कितना बढ़ा?
2024-25 में देश का मछली उत्पादन 197.75 लाख टन रहा, जबकि 2023-24 में यह 141.64 लाख टन था। यह एक वर्ष में 56 लाख टन से अधिक की वृद्धि है।
पीएमएमएसवाई में महिलाओं को क्या विशेष लाभ मिलता है?
योजना के तहत महिला लाभार्थियों को इकाई लागत के 60 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो सामान्य श्रेणी से अधिक है। 2020-21 से 2025-26 के बीच 1,47,654 महिला लाभार्थियों के लिए ₹4,178.30 करोड़ की परियोजनाएँ मंजूर की गई हैं।
कोल्ड चेन और विपणन अवसंरचना के लिए कितना बजट मंजूर हुआ है?
अप्रैल 2026 तक पीएमएमएसवाई और एफआईडीएफ के तहत ₹2,797 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। इनमें 775 कोल्ड स्टोरेज व आइस प्लांट, 28,489 परिवहन इकाइयाँ, 6,018 मछली कियोस्क और 24 थोक मछली बाजार शामिल हैं।
यह जानकारी कहाँ और कब सामने आई?
केंद्रीय मत्स्यपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह आँकड़े साझा किए।
राष्ट्र प्रेस
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