पीएमएमएसवाई से मछली उत्पादन 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुँचा, एक साल में 56 लाख टन की छलांग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत देश का मछली उत्पादन 2024-25 में बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है — जबकि 2023-24 में यह आँकड़ा 141.64 लाख टन था। यह एक वर्ष में 56 लाख टन से अधिक की वृद्धि है, जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे तेज़ सालाना बढ़त में से एक मानी जा रही है।
योजना की पृष्ठभूमि और दायरा
केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से पीएमएमएसवाई को लागू किया है। पिछले छह वर्षों की कार्यान्वयन अवधि में इस योजना ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र विकास में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पहले से ही विश्व के शीर्ष मछली उत्पादक देशों में शामिल है।
महिला लाभार्थियों पर विशेष ध्यान
मंत्री ने बताया कि पीएमएमएसवाई में महिला लाभार्थियों को इकाई लागत के 60 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो सामान्य श्रेणी से अधिक है। 2020-21 से 2025-26 के बीच विभिन्न राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में 1,47,654 महिला लाभार्थियों को शामिल करने के लिए ₹4,178.30 करोड़ की मत्स्यपालन विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। गौरतलब है कि यह समावेशी दृष्टिकोण ग्रामीण महिलाओं को आजीविका की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है।
कोल्ड चेन और विपणन अवसंरचना
मत्स्यपालन विभाग ने पीएमएमएसवाई और मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) के तहत अप्रैल 2026 तक ₹2,797 करोड़ के कोल्ड चेन और विपणन प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत देशभर में 775 कोल्ड स्टोरेज एवं आइस प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
मछली परिवहन के लिए 28,489 इकाइयाँ स्वीकृत की गई हैं, जिनमें आइस बॉक्स वाली 13,718 मोटरसाइकिलें, 8,527 साइकिलें, 4,257 ऑटो-रिक्शा, 1,577 इंसुलेटेड ट्रक और 410 रेफ्रिजरेटेड ट्रक शामिल हैं। इसके अलावा 1,394 जीवित मछली बिक्री इकाइयाँ, 6,018 मछली कियोस्क, 117 खुदरा मछली बाजार और 24 थोक मछली बाजार भी इस योजना के तहत आते हैं।
आगे की राह
मंत्रालय के अनुसार, कोल्ड चेन अवसंरचना का विस्तार मछली की बर्बादी घटाने और मछुआरों को बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में अहम कदम है। आँकड़ों के अनुसार, भारत में कटाई के बाद मछली की क्षति को कम करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है, और यह निवेश उसी दिशा में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वितरण तंत्र इसी गति से मज़बूत होता रहा, तो आने वाले वर्षों में निर्यात आँकड़ों में भी सुधार संभव है।