यूपी के 57,000 पंचायत सहायकों को ₹9,000 मासिक मानदेय, मुकदमे वापस और बर्खास्त सहायक होंगे बहाल: राजभर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार, 16 सितंबर को घोषणा की कि राज्य के 57,000 से अधिक पंचायत सहायकों को अब प्रतिमाह ₹9,000 मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान इन सहायकों के विरुद्ध दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे और जिन्हें सेवा से हटाया गया था, उनकी बहाली भी सुनिश्चित की जाएगी। यह ऐलान मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
राजभर ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि पंचायत सहायक 24 तारीख से धरने पर बैठे थे। उन्होंने कहा, 'हमारे पंचायत सहायक 24 तारीख से धरने पर बैठे थे और सोमवार को मैं लखनऊ आया तो कुछ साथियों से बातचीत हुई, इन लोगों की जो मांग थी जायज मांग है। मैंने आज सुबह मुख्यमंत्री से बात की है। बातचीत के बाद सभी हमारे जितने भी पंचायत सहायक हैं, सभी को 9,000 रुपया महीना देने का ऐलान मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद हुआ है।'
मंत्री ने स्पष्ट किया कि शुरुआत में सरकार ₹8,000 प्रतिमाह पर अड़ी थी, परंतु मुख्यमंत्री से सीधी वार्ता के बाद यह राशि बढ़ाकर ₹9,000 कर दी गई। यह बढ़ोतरी सहायकों की लंबे समय से चली आ रही माँग के आंशिक समाधान के रूप में देखी जा रही है।
अन्य घोषणाएँ: कैशलेस सुविधा और बहाली
राजभर ने यह भी बताया कि प्रत्येक पंचायत सहायक के परिवार को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जाएगी। आंदोलन के दौरान जिन सहायकों को सेवा से बर्खास्त किया गया था, उन सभी की पुनः बहाली की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाने की भी घोषणा की गई।
पंचायत सहायकों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 2022 में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कार्यों को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से इन सहायकों की नियुक्ति की थी। इन्हें आधिकारिक रूप से पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-सह-डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात किया गया था। इस पहल का मकसद सेवा वितरण का विकेंद्रीकरण करना और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्यों को सुलभ बनाना था। राज्य में ऐसे सहायकों की कुल संख्या 57,000 से अधिक बताई जाती है।
हाल के दिनों में इन सहायकों ने मानदेय वृद्धि की माँग को लेकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन किए थे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पंचायती राज व्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं।
आम जनता और पंचायती व्यवस्था पर असर
पंचायत सहायक ग्रामीण प्रशासन की एक अहम कड़ी हैं, जो डेटा एंट्री से लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक में सहयोग करते हैं। उनकी बहाली और मानदेय वृद्धि से ग्रामीण स्तर पर सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत अनुबंध आधारित कर्मचारियों के हितों की रक्षा का एक संदेश भी जाता है।
क्या होगा आगे
मंत्री राजभर की घोषणा के बाद अब यह देखना होगा कि मुकदमे वापसी और बहाली की प्रक्रिया कितनी जल्दी अमल में आती है। पंचायत सहायकों के संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन लिखित आदेश जारी होने तक आंदोलन पूरी तरह स्थगित करने पर अंतिम निर्णय लंबित बताया जा रहा है।