14 सितंबर 2026
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UP के अधिवक्ताओं को ₹5 लाख सालाना कैशलेस इलाज: योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान

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UP के अधिवक्ताओं को ₹5 लाख सालाना कैशलेस इलाज: योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान

सारांश

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए ₹5 लाख सालाना कैशलेस इलाज, कल्याण निधि में तीन गुना वृद्धि और ₹700 करोड़ की नई न्यायिक अवसंरचना की सौगात दी — यह कदम प्रदेश में 'ईज ऑफ जस्टिस' को नई दिशा देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर 2026 को प्रयागराज में हाईकोर्ट और जिला अदालतों के अधिवक्ताओं के लिए ₹5 लाख सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की।
अधिवक्ता कल्याण निधि ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख की गई; निधन पर आर्थिक सहायता की आयु सीमा 60 से 70 वर्ष हुई।
10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए ₹700 करोड़ की लागत से चैंबर, पार्किंग, लाइब्रेरी और डाइनिंग हॉल का निर्माण।
400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट; विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि।
जिला स्तर पर पहले चरण में 900 नए न्यायालयों के गठन को मंजूरी; 10 जिलों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स निर्माण जारी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर 2026 को प्रयागराज में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए ₹5 लाख सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की। यह लाभ हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट देने और अधिवक्ता कल्याण निधि को डेढ़ लाख से बढ़ाकर पाँच लाख रुपये करने का भी ऐलान किया।

मुख्य घोषणाएँ और सुविधाएँ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए करीब ₹700 करोड़ की लागत से चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। इस अवसर पर उन्होंने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यालय, चैंबर और अधिवक्ता भवन की चाबी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय और महासचिव अखिलेश शर्मा को सौंपी।

अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है। इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराई गई है।

न्यायिक अवसंरचना का विस्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन 10 जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहाँ इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम तेज़ी से आगे बढ़ा है। इनमें न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएँ, इंडोर स्टेडियम और सस्ती कैंटीन की व्यवस्था भी की जा रही है। त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है।

जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है। साथ ही जिला अदालतों और जेलों को हाई-स्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है, और 'न्याय श्रुति प्रणाली' के माध्यम से वर्चुअल गवाही की सुविधा शुरू की गई है।

न्यायपालिका और सरकार की प्रतिक्रिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि बार एसोसिएशन हाईकोर्ट का अभिन्न अंग है और अधिवक्ताओं को बेहतर सुविधाएँ मिलना प्रसन्नता की बात है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का विशेष आभार जताया। वरिष्ठ जज अरिंदम सिन्हा ने भी इन प्रयासों में प्रदेश सरकार के सहयोग की सराहना की।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है और 'ईज ऑफ जस्टिस' को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पुराने औपनिवेशिक कानून बदले गए हैं और आज आम आदमी का कानून पर भरोसा बढ़ा है।

अधिवक्ताओं को भविष्य के लिए तैयार करने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों के लिए अधिवक्ताओं को स्वयं को अपडेट करना होगा। उन्होंने कहा, 'फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा।'

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय ने कहा कि प्रयागराज की धरती पर कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका का एक मंच पर आना त्रिवेणी के संगम जैसा है। उन्होंने नए भवन को अधिवक्ता समाज के लिए अमूल्य उपहार बताया।

आम जनता और न्याय व्यवस्था पर असर

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है और इसकी पहली शर्त समय पर न्याय है। पारदर्शिता, निर्णयों में ईमानदारी और संस्थाओं की जवाबदेही सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए अनिवार्य है। अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर न्यायालय के सामने रखे जा सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये सुविधाएँ केवल प्रयागराज तक सीमित रहेंगी या राज्य के सभी ज़िला न्यायालयों तक पहुँचेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में लंबित मुकदमों की संख्या लाखों में है और 900 नए न्यायालयों की घोषणा उस दिशा में एक संकेत है — पर क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता ही इसकी सफलता तय करेगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UP के अधिवक्ताओं की कैशलेस चिकित्सा योजना क्या है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 14 सितंबर 2026 को घोषित इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को हर साल ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा अधिवक्ता कल्याण निधि में की गई वृद्धि का हिस्सा है।
अधिवक्ता कल्याण निधि में क्या बदलाव किया गया है?
अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है। इसके अलावा अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में नए बुनियादी ढाँचे पर कितनी राशि खर्च हुई?
10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए करीब ₹700 करोड़ की लागत से चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। इसकी चाबी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को सौंपी गई।
राज्य विधि अधिकारियों के लिए क्या घोषणा हुई?
400 राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टैबलेट दिए जाएँगे, ताकि वे शासन से जुड़े मामलों की जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि भी की गई है।
UP में न्यायिक ढाँचे को सुधारने के लिए और कौन-से कदम उठाए गए हैं?
पहले चरण में जिला स्तर पर 900 नए न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है। जिला अदालतों और जेलों को हाई-स्पीड इंटरनेट व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है, और 'न्याय श्रुति प्रणाली' से वर्चुअल गवाही की सुविधा शुरू की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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