सागरमाला 2.0: महाराष्ट्र ने केंद्र से माँगी प्राथमिकता, नितेश राणे ने सोनोवाल से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मत्स्य पालन एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने 29 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से भेंट की और सागरमाला 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत महाराष्ट्र की प्रमुख परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी देने का अनुरोध किया। राज्य सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन से महाराष्ट्र के 720 किलोमीटर लंबे समुद्री तट पर बंदरगाह-आधारित विकास को नई गति मिलेगी।
बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्री नितेश राणे ने बैठक में महाराष्ट्र सरकार के उन प्रस्तावों को केंद्र के समक्ष रखा जो महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड पहले ही केंद्र को भेज चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रस्ताव 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप तैयार किए गए हैं। राणे ने केंद्र सरकार से लगातार सहयोग मिलने का भरोसा भी जताया।
पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर ज़ोर
राज्य के प्रस्तावों में पाँच प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। पहला, छोटे और मध्यम बंदरगाहों का आधुनिकीकरण एवं विस्तार — जिसमें माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल है। दूसरा, मत्स्य पालन से जुड़े बुनियादी ढाँचे का विकास — इसमें मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों, जेट्टी और मछली उतारने वाले केंद्रों का उन्नयन शामिल है।
तीसरा, तटीय संपर्क और माल ढुलाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना — बंदरगाहों तक सड़क और रेल संपर्क को बेहतर बनाने की योजना इसी के तहत है। चौथा, अंतर्देशीय जलमार्ग एवं जल परिवहन को प्रोत्साहन — इसमें पर्यावरण अनुकूल और विद्युत-चालित जल परिवहन को बढ़ावा देना भी शामिल है। पाँचवाँ, समुद्री पर्यटन का विकास — तटीय क्रूज, यात्री टर्मिनल और समुद्र तट पर्यटन के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा विकसित करना।
आर्थिक और रोज़गार पर असर
मंत्री राणे ने कहा कि इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे, निजी निवेश में वृद्धि होगी और महाराष्ट्र की तटीय अर्थव्यवस्था को ठोस मजबूती मिलेगी। प्रस्ताव में तटीय जल परिवहन को औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की योजना भी है, जो तटीय क्षेत्रों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ पहुँचा सकती है।
सागरमाला 2.0 की व्यापक पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार सागरमाला 2.0 के तहत देशभर के तटीय राज्यों से प्रस्ताव आमंत्रित कर रही है। गौरतलब है कि सागरमाला का पहला चरण 2015 में शुरू हुआ था और उसने बंदरगाह-आधारित विकास की नींव रखी थी। महाराष्ट्र, जो देश के प्रमुख समुद्री केंद्रों में से एक है, अब दूसरे चरण में अपनी भूमिका और विस्तृत करना चाहता है।
राज्य सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र समुद्री बुनियादी ढाँचे में रणनीतिक निवेश के ज़रिये टिकाऊ, समग्र और बंदरगाह-आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।