29 जुलाई 2026
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सागरमाला 2.0: महाराष्ट्र ने केंद्र से माँगी प्राथमिकता, नितेश राणे ने सोनोवाल से की मुलाकात

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सागरमाला 2.0: महाराष्ट्र ने केंद्र से माँगी प्राथमिकता, नितेश राणे ने सोनोवाल से की मुलाकात

सारांश

महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने 29 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मुलाकात कर सागरमाला 2.0 के तहत राज्य की परियोजनाओं — बंदरगाह आधुनिकीकरण, मत्स्य अवसंरचना, जलमार्ग और समुद्री पर्यटन — को प्राथमिकता से मंजूरी देने की माँग रखी। महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड विस्तृत प्रस्ताव पहले ही केंद्र को सौंप चुका है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने 29 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से नई दिल्ली में मुलाकात की।
सागरमाला 2.0 के तहत राज्य की परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी देने का अनुरोध किया गया।
प्रस्ताव में 720 किलोमीटर तटीय क्षेत्र के छोटे-मध्यम बंदरगाहों का आधुनिकीकरण शामिल है।
पाँच प्रमुख क्षेत्र : बंदरगाह विस्तार, मत्स्य अवसंरचना, तटीय संपर्क, अंतर्देशीय जलमार्ग और समुद्री पर्यटन।
प्रस्ताव 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप बताए गए हैं; महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड विस्तृत दस्तावेज़ केंद्र को भेज चुका है।

महाराष्ट्र के मत्स्य पालन एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने 29 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से भेंट की और सागरमाला 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत महाराष्ट्र की प्रमुख परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी देने का अनुरोध किया। राज्य सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन से महाराष्ट्र के 720 किलोमीटर लंबे समुद्री तट पर बंदरगाह-आधारित विकास को नई गति मिलेगी।

बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्री नितेश राणे ने बैठक में महाराष्ट्र सरकार के उन प्रस्तावों को केंद्र के समक्ष रखा जो महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड पहले ही केंद्र को भेज चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रस्ताव 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप तैयार किए गए हैं। राणे ने केंद्र सरकार से लगातार सहयोग मिलने का भरोसा भी जताया।

पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर ज़ोर

राज्य के प्रस्तावों में पाँच प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। पहला, छोटे और मध्यम बंदरगाहों का आधुनिकीकरण एवं विस्तार — जिसमें माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल है। दूसरा, मत्स्य पालन से जुड़े बुनियादी ढाँचे का विकास — इसमें मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों, जेट्टी और मछली उतारने वाले केंद्रों का उन्नयन शामिल है।

तीसरा, तटीय संपर्क और माल ढुलाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना — बंदरगाहों तक सड़क और रेल संपर्क को बेहतर बनाने की योजना इसी के तहत है। चौथा, अंतर्देशीय जलमार्ग एवं जल परिवहन को प्रोत्साहन — इसमें पर्यावरण अनुकूल और विद्युत-चालित जल परिवहन को बढ़ावा देना भी शामिल है। पाँचवाँ, समुद्री पर्यटन का विकास — तटीय क्रूज, यात्री टर्मिनल और समुद्र तट पर्यटन के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा विकसित करना।

आर्थिक और रोज़गार पर असर

मंत्री राणे ने कहा कि इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे, निजी निवेश में वृद्धि होगी और महाराष्ट्र की तटीय अर्थव्यवस्था को ठोस मजबूती मिलेगी। प्रस्ताव में तटीय जल परिवहन को औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की योजना भी है, जो तटीय क्षेत्रों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ पहुँचा सकती है।

सागरमाला 2.0 की व्यापक पृष्ठभूमि

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार सागरमाला 2.0 के तहत देशभर के तटीय राज्यों से प्रस्ताव आमंत्रित कर रही है। गौरतलब है कि सागरमाला का पहला चरण 2015 में शुरू हुआ था और उसने बंदरगाह-आधारित विकास की नींव रखी थी। महाराष्ट्र, जो देश के प्रमुख समुद्री केंद्रों में से एक है, अब दूसरे चरण में अपनी भूमिका और विस्तृत करना चाहता है।

राज्य सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र समुद्री बुनियादी ढाँचे में रणनीतिक निवेश के ज़रिये टिकाऊ, समग्र और बंदरगाह-आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महज़ बुनियादी ढाँचे का मामला नहीं, बल्कि तटीय आजीविका की राजनीति भी है। प्रस्तावों में रोज़गार और निजी निवेश के दावे हैं, लेकिन सत्यापन-योग्य लक्ष्य और समयबद्ध मील के पत्थर अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। केंद्र की मंजूरी की गति और शर्तें ही तय करेंगी कि यह बैठक नीतिगत बदलाव की शुरुआत थी या एक और औपचारिक पहल।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सागरमाला 2.0 क्या है और महाराष्ट्र इसमें क्यों शामिल होना चाहता है?
सागरमाला 2.0 केंद्र सरकार का बंदरगाह-आधारित विकास का दूसरा चरण है, जो 2015 में शुरू हुए पहले चरण की नींव पर आगे बढ़ता है। महाराष्ट्र अपने 720 किलोमीटर लंबे तट, बड़े मत्स्य पालन क्षेत्र और समुद्री व्यापार की क्षमता को भुनाने के लिए इस कार्यक्रम में प्राथमिकता चाहता है।
नितेश राणे और सर्बानंद सोनोवाल की बैठक में क्या हुआ?
29 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से सागरमाला 2.0 के तहत राज्य की परियोजनाओं को प्राथमिकता से मंजूरी देने का अनुरोध किया। महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड विस्तृत प्रस्ताव पहले ही केंद्र को सौंप चुका है।
महाराष्ट्र के प्रस्ताव में कौन-कौन सी परियोजनाएँ शामिल हैं?
प्रस्ताव में पाँच क्षेत्र शामिल हैं — बंदरगाहों का आधुनिकीकरण एवं विस्तार, मत्स्य पालन अवसंरचना का विकास, तटीय संपर्क और माल ढुलाई व्यवस्था, अंतर्देशीय जलमार्ग एवं पर्यावरण अनुकूल जल परिवहन, तथा समुद्री पर्यटन के लिए बुनियादी ढाँचा। इसमें सड़क-रेल संपर्क सुधार और विद्युत-चालित जल परिवहन भी शामिल हैं।
इन परियोजनाओं से महाराष्ट्र को क्या फायदा होगा?
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे, निजी निवेश बढ़ेगा और तटीय क्षेत्रों की आजीविका व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे महाराष्ट्र की देश के प्रमुख समुद्री केंद्र के रूप में स्थिति और सुदृढ़ होगी।
केंद्र सरकार से मंजूरी कब तक मिलने की उम्मीद है?
अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड ने विस्तृत प्रस्ताव पहले ही भेज दिए हैं और मंत्री नितेश राणे ने केंद्र से लगातार सहयोग मिलने का भरोसा जताया है।
राष्ट्र प्रेस
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