3 जुलाई 2026
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कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को ₹7,145 करोड़ की मंजूरी, 117.7 किमी NH-34 से बुंदेलखंड को नई कनेक्टिविटी

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कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को ₹7,145 करोड़ की मंजूरी, 117.7 किमी NH-34 से बुंदेलखंड को नई कनेक्टिविटी

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने कानपुर से कबरई के बीच 117.7 किमी लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे को ₹7,145 करोड़ की मंजूरी दी है। यह परियोजना बुंदेलखंड को कानपुर से जोड़ने वाली उस सड़क की जगह लेगी जो दशकों से जाम और दुर्घटनाओं के लिए बदनाम रही है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 2 जुलाई 2026 को NH-34 के कानपुर-कबरई खंड पर 117.7 किमी लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी दी।
परियोजना की कुल लागत ₹7,145 करोड़ है और यह एक्सेस-कंट्रोल्ड संरचना पर आधारित होगी।
अभी कानपुर से कबरई पहुँचने में साढ़े तीन घंटे लगते हैं; नया हाईवे यह दूरी एक से डेढ़ घंटे में तय कराएगा।
यह मार्ग हमीरपुर , महोबा , बांदा और बरुआ सुमेरपुर से गल्ला, दलहन, तिलहन, मौरंग और गिट्टी के परिवहन की मुख्य धमनी है।
उद्योग जगत ने हाईवे के किनारे इंडस्ट्रियल हब स्थापित होने और मध्य प्रदेश व पश्चिमी राज्यों तक बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद जताई है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों ने स्वीकृति का स्वागत करते हुए निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की माँग की है।

केंद्रीय कैबिनेट ने 2 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के कानपुर-कबरई खंड पर 117.7 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी दे दी है। ₹7,145 करोड़ की इस परियोजना से कानपुर और बुंदेलखंड के बीच औद्योगिक, व्यापारिक और परिवहन संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है। उद्योग, ट्रांसपोर्ट और व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले का व्यापक स्वागत किया है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

यह हाईवे NH-34 के कानपुर-कबरई खंड पर बनेगा और पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड संरचना पर आधारित होगा। अभी इस मार्ग पर कानपुर से कबरई पहुँचने में साढ़े तीन घंटे लगते हैं और सिंगल रोड होने के कारण अक्सर भीषण जाम की स्थिति बनती है — कुछ दिन पहले सात घंटे का जाम दर्ज किया गया था। नए हाईवे के बनने के बाद यह दूरी एक से डेढ़ घंटे में तय होने का अनुमान है। यह मार्ग हमीरपुर, महोबा, बांदा और बरुआ सुमेरपुर जैसे बुंदेलखंड के प्रमुख जिलों को कानपुर से जोड़ेगा।

ट्रांसपोर्ट और व्यापार जगत की प्रतिक्रिया

ट्रांसपोर्ट संगठन के अध्यक्ष रवि शंकर मिश्रा ने कहा कि यह मार्ग गिट्टी, मौरंग और खनन व्यवसाय के लिए जीवनरेखा है, जो मुख्यतः हमीरपुर, महोबा और बांदा से संचालित होता है। उन्होंने स्वीकृति का स्वागत करते हुए कहा कि 'बहुत देर कर दी — बहुत नुकसान हुआ, बहुत समय जाया हुआ।' मिश्रा ने यह भी रेखांकित किया कि यह सड़क देशभर की सर्वाधिक दुर्घटना-प्रवण सड़कों में शुमार रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए हाईवे से डीजल और टायर रखरखाव की लागत में उल्लेखनीय बचत होगी।

राष्ट्रीय व्यापार मंडल के ज्ञानेश मिश्रा ने बताया कि बुंदेलखंड से गल्ला, दलहन और तिलहन का बड़ा व्यापार इसी मार्ग से होता है और कानपुर की गल्ला मंडी तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश की मंडियों तक माल इसी रास्ते पहुँचता है। उन्होंने कहा कि समय की बचत और जाम से मुक्ति से व्यापार की गति में बड़ा बदलाव आएगा।

उद्योग जगत को औद्योगिक विस्तार की उम्मीद

इंडस्ट्री कोऑपरेटिव स्टेट के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि इस हाईवे के किनारे इंडस्ट्रियल हब स्थापित होने से उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि पहले बुंदेलखंड में बड़े उद्योग आए थे, लेकिन सही मार्ग और इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में बंद हो गए। नई कनेक्टिविटी से मध्य प्रदेश तक पहुँच आसान होगी और उद्यमियों के लिए इस कॉरिडोर पर निवेश करना व्यावहारिक बनेगा।

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि कानपुर अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा है और आगरा, दिल्ली व प्रयागराज की दिशा में फोर-लेन सुविधा उपलब्ध है, लेकिन बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश की ओर यह सुविधा नहीं थी। इस हाईवे के बनने से महाराष्ट्र और पश्चिमी राज्यों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी। उन्होंने बताया कि कंस्ट्रक्शन मटेरियल — विशेषकर मौरंग और गिट्टी — का परिवहन इसी मार्ग से होता है और सागर मार्ग तक पहुँच आसान होने से औद्योगिक भूमि की सस्ती उपलब्धता का लाभ उठाया जा सकेगा।

क्षेत्रीय महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि बुंदेलखंड लंबे समय से अपर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण औद्योगिक निवेश से वंचित रहा है। यह परियोजना ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए कई बड़े अवसंरचना प्रयास कर रही है। NH-34 का यह खंड न केवल उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगा, बल्कि मध्य प्रदेश के सागर तक पहुँच भी सुगम करेगा।

आगे क्या होगा

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और निविदा प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। उद्योग संगठनों ने माँग की है कि निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू हो ताकि व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को राहत मिल सके। यह हाईवे पूरा होने पर कानपुर को बुंदेलखंड के साथ-साथ मध्य और पश्चिमी भारत से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

145 करोड़ की यह परियोजना बुंदेलखंड के लिए एक लंबे समय से लंबित ज़रूरत को पूरा करती है — लेकिन मंजूरी और ज़मीन पर काम शुरू होने के बीच की खाई अक्सर भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सबसे बड़ी बाधा रही है। ट्रांसपोर्ट संगठन का यह कहना कि 'बहुत देर कर दी' महज शिकायत नहीं, बल्कि उस नीतिगत विलंब की स्वीकृति है जिसकी कीमत सड़क दुर्घटनाओं और आर्थिक नुकसान के रूप में चुकाई गई। असली परीक्षा यह होगी कि भूमि अधिग्रहण और निविदा प्रक्रिया बिना विलंब के पूरी हो — क्योंकि बुंदेलखंड में पहले आई बड़ी इंडस्ट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में बंद हो चुकी है, और इतिहास की पुनरावृत्ति रोकना इस परियोजना के क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना क्या है?
यह NH-34 के कानपुर-कबरई खंड पर 117.7 किलोमीटर लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने 2 जुलाई 2026 को ₹7,145 करोड़ की लागत से मंजूरी दी है। यह परियोजना कानपुर को बुंदेलखंड के प्रमुख जिलों — हमीरपुर, महोबा और बांदा — से जोड़ेगी।
इस हाईवे से यात्रा समय में कितना बदलाव आएगा?
अभी कानपुर से कबरई पहुँचने में साढ़े तीन घंटे लगते हैं और सिंगल रोड होने के कारण कई बार सात घंटे तक का जाम लग जाता है। नए हाईवे के बनने के बाद यह दूरी एक से डेढ़ घंटे में तय होने का अनुमान है।
इस परियोजना से बुंदेलखंड के व्यापार को क्या फायदा होगा?
बुंदेलखंड से गल्ला, दलहन, तिलहन, मौरंग और गिट्टी का बड़ा व्यापार इसी मार्ग से होता है। बेहतर कनेक्टिविटी से परिवहन लागत घटेगी, समय की बचत होगी और कानपुर की मंडियों तक माल पहुँचाना आसान होगा।
इस हाईवे से उद्योगों को क्या लाभ मिलेगा?
उद्योग जगत को उम्मीद है कि हाईवे के किनारे इंडस्ट्रियल हब स्थापित होंगे, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मध्य प्रदेश और पश्चिमी राज्यों तक कनेक्टिविटी बेहतर होने से औद्योगिक उत्पादों के परिवहन में भी सुविधा होगी।
परियोजना का अगला कदम क्या होगा?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद भूमि अधिग्रहण और निविदा प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। उद्योग और ट्रांसपोर्ट संगठनों ने माँग की है कि निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू हो ताकि व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को राहत मिले।
राष्ट्र प्रेस
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