यूएन की नई पहल: 6 खनिज-समृद्ध विकासशील देशों को मिलेगी तकनीकी मदद, स्थानीय रोज़गार पर ज़ोर
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 24 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में क्रिटिकल एनर्जी ट्रांज़िशन मिनरल्स पर एक नई देश-समर्थन व्यवस्था — कंट्री सपोर्ट मैकेनिज़्म ऑन क्रिटिकल एनर्जी ट्रांज़िशन मिनरल्स — की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य क्लीन एनर्जी के लिए आवश्यक खनिजों की बढ़ती वैश्विक माँग का लाभ स्थानीय रोज़गार और औद्योगिक विकास के रूप में उन देशों तक पहुँचाना है जिनके पास ये संसाधन मौजूद हैं। इस पहल के पहले चरण में गिनी, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, नाइजीरिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे को चुना गया है।
पहल की पृष्ठभूमि और ज़रूरत
वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की रफ़्तार के साथ कॉपर, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, 2030 तक महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक माँग लगभग तीन गुना हो सकती है। विंड टर्बाइन, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी स्टोरेज सिस्टम — सभी इन्हीं खनिजों पर निर्भर हैं।
गौरतलब है कि अब तक खनिज-संपन्न विकासशील देश मुख्यतः कच्चा माल निर्यात करते रहे हैं, जबकि प्रसंस्करण और मूल्य-संवर्धन का बड़ा हिस्सा विकसित देशों में होता है। यह व्यवस्था उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में निचले पायदान पर रखती है और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सीमित लाभ देती है।
पहल में क्या शामिल है
नई व्यवस्था के तहत चुने गए छह देशों को तकनीकी सहायता, बेहतर नियामक ढाँचा, देश के भीतर खनिज प्रसंस्करण की क्षमता, और स्थानीय समुदायों व पर्यावरण की सुरक्षा में सहयोग दिया जाएगा। प्राथमिकताओं में गवर्नेंस सुधार, स्थानीय औद्योगीकरण और मानवीय-पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
इस तंत्र का नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और संयुक्त राष्ट्र विकास समन्वय कार्यालय संयुक्त रूप से करेंगे, और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों की विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। स्थानीय कार्यालयों के ज़रिए काम करने वाली टीमें प्रत्येक देश की विशिष्ट ज़रूरतों की पहचान कर अनुकूलित सहायता सुनिश्चित करेंगी।
नेताओं और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
जाम्बिया के विदेश मंत्री मुलाम्बो हैम्बे ने कहा, 'हम चाहते हैं कि जाम्बिया के लोग दुनिया में क्लीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी की ओर हो रहे बदलाव में पूरी तरह भागीदार बनें, न कि सिर्फ कच्चा माल सप्लाई करने वाले बने रहें।' उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य के लिए बेहतर प्रशासन, निवेश और मज़बूत साझेदारी अनिवार्य होगी।
यूएनडीपी के प्रशासक अलेक्जेंडर डी क्रू के अनुसार, खनिज संपदा किसी देश की अर्थव्यवस्था को बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकती है, लेकिन इसके लिए आर्थिक लाभ को अधिकतम करना, पर्यावरण सुरक्षा और सुशासन — तीनों को एक साथ सुनिश्चित करना होगा। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि उनकी एजेंसी ज़िम्मेदार खनन, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधन पुनर्चक्रण पर विशेषज्ञता प्रदान करेगी।
महासचिव का संदेश
गुटेरेस ने इस अवसर पर कहा, 'जिन देशों के पास एनर्जी ट्रांज़िशन के लिए ज़रूरी महत्वपूर्ण खनिज मौजूद हैं, फ़ायदा सबसे पहले उन्हीं देशों को मिलना चाहिए।' यह पहल महासचिव के 'क्रिटिकल एनर्जी ट्रांज़िशन मिनरल्स' पर बने पैनल की सिफ़ारिशों के अनुरूप है।
वित्तीय पहलू और आगे का रास्ता
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र की घोषणा में तकनीकी और संस्थागत सहायता का विवरण तो दिया गया है, किंतु इस पहल के लिए आवंटित कुल वित्तीय राशि का कोई आँकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह व्यवस्था क्लीन एनर्जी मिनरल्स पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की व्यापक टास्क फ़ोर्स का हिस्सा है और भविष्य में अन्य देशों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।