संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस की मांग: प्राकृतिक संसाधन मूल्य श्रृंखला में गरीब देशों को मिले उचित हिस्सा
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 23 जुलाई 2026 को सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान प्राकृतिक संसाधनों की पूरी मूल्य श्रृंखला में न्याय सुनिश्चित करने की जोरदार पैरवी की। उन्होंने कहा कि खनिजों का विकास संसाधन-संपन्न देशों और स्थानीय समुदायों के लिए न्यायसंगत एवं टिकाऊ परिणाम लेकर आना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अफ्रीका और एशिया के कई देश अपने खनिज भंडारों पर वास्तविक आर्थिक संप्रभुता की माँग तेज़ कर रहे हैं।
पुरानी व्यवस्था को बदलने का आह्वान
गुटेरेस ने कहा, "अब समय आ गया है कि उस पुरानी व्यवस्था को समाप्त किया जाए, जिसमें संसाधनों का दोहन एक जगह होता है, उनका आर्थिक लाभ कहीं और पहुँच जाता है, जबकि गरीब समुदायों को पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक नुकसान से जूझने के लिए छोड़ दिया जाता है।" उन्होंने इस असमानता को वैश्विक अस्थिरता की एक बड़ी जड़ बताया।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी देश की अपने प्राकृतिक संसाधनों पर मान्यता प्राप्त संप्रभुता और व्यवहार में उनके वास्तविक संप्रभु अधिकारों के बीच की खाई को पाटा जाना चाहिए। गुटेरेस के अनुसार, अफ्रीका में यह संप्रभुता की कमी सबसे अधिक है।
मूल्य श्रृंखला की जटिलता और पारदर्शिता की ज़रूरत
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का अक्सर एक देश में खनन होता है, दूसरे देश के रास्ते परिवहन, किसी तीसरे देश में प्रसंस्करण और अंततः वैश्विक बाज़ारों में बिक्री होती है। इसलिए, उन्होंने कहा कि प्रभावी कार्रवाई केवल खनन स्थल तक सीमित नहीं होनी चाहिए — पूरी मूल्य श्रृंखला पर ध्यान देना अनिवार्य है।
उन्होंने खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष बल दिया। गुटेरेस ने कहा, "देशों और समुदायों को अपने ही क्षेत्र में मौजूद संसाधनों से लाभ मिलना चाहिए।"
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कानूनी ढाँचे की माँग
गुटेरेस ने नियामक और प्रवर्तन संबंधी कमियों को दूर करने के लिए उत्पादक, ट्रांजिट और उपभोक्ता देशों के बीच ठोस सहयोग को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग सभी की अहम भूमिका है। वे सब मिलकर गैर-कानूनी तरीके से हासिल किए गए संसाधनों को वैध बाज़ारों में आने से रोकने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए मज़बूत कानूनी ढाँचे और बेहतर ट्रेसिबिलिटी, उचित जाँच और सूचना साझा करने की ज़रूरत है।"
संघर्षों को बढ़ावा देने वाले नेटवर्कों पर चोट
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सशस्त्र समूहों और आपराधिक नेटवर्कों को प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय से वंचित करने की भी पुरज़ोर वकालत की। उनके अनुसार, यही आय लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को ईंधन देती है। उन्होंने चेतावनी दी, "अगर हम कार्रवाई करने में नाकाम रहते हैं, तो प्राकृतिक संसाधनों का गैर-कानूनी शोषण असमानता, अस्थिरता और हिंसा को बढ़ावा देता रहेगा।"
गुटेरेस ने अंत में कहा कि संसाधनों का प्रबंधन इस प्रकार होना चाहिए जिससे समावेशी और टिकाऊ विकास को बल मिले, संस्थाएँ मज़बूत हों और सभी के लिए शांति व समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो। आने वाले महीनों में सुरक्षा परिषद इस मुद्दे पर ठोस प्रस्तावों पर विचार कर सकती है।