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नेपाल बाढ़: चिलिमे सुरंग में भारतीय बचाव दल सक्रिय, 1,068 शव बरामद, 4,606 अब भी लापता

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नेपाल बाढ़: चिलिमे सुरंग में भारतीय बचाव दल सक्रिय, 1,068 शव बरामद, 4,606 अब भी लापता

सारांश

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में 1,068 शव बरामद, 4,606 अभी भी लापता। भारत की सुरंग बचाव टीम रसुवा के चिलिमे क्षेत्र में दलदली सुरंग के भीतर तक पहुँचने की कोशिश कर रही है, जबकि 19 सदस्यीय फॉरेंसिक दल डीएनए जांच से अपहचाने शवों की पहचान में नेपाल की मदद कर रहा है।

मुख्य बातें

नेपाल पुलिस के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए गए, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले।
अभी भी 4,606 लोग लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
भारत की सुरंग बचाव टीम नेपाली सेना के साथ रसुवा जिले के चिलिमे क्षेत्र में अस्थायी फ्लोट्स की मदद से अभियान जारी रखे हुए है।
भारत की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में डीएनए नमूनों का विश्लेषण कर रही है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा कि शवों का प्रबंधन कानूनी और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है।
भारत और चीन दोनों ने जलविद्युत परियोजना स्थलों पर बचाव के लिए तकनीकी टीमें भेजी हैं।

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि भारत की विशेष सुरंग बचाव (टनल रेस्क्यू) टीम नेपाली सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रसुवा जिले के चिलिमे क्षेत्र में सुरंग के भीतर फंसे लोगों की तलाश में जुटी है। नेपाल पुलिस के अनुसार, मंगलवार शाम तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 1,068 शव बरामद किए जा चुके हैं और अभी भी 4,606 लोग लापता हैं।

सुरंग बचाव अभियान की चुनौतियाँ

राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि भारतीय बचाव दल ने अत्यंत विकट परिस्थितियों के बावजूद अपना अभियान नहीं रोका। सुरंग के भीतर सीमित स्थान, दुर्गम भू-भाग और दलदल जैसी स्थिति के बीच बचाव दल ने अस्थायी फ्लोट्स (तैरने वाले उपकरणों) की सहायता से सुरंग की गहराई तक पहुँचने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम बुधवार को भी यह अभियान जारी रखेगी और सुरंग में फंसे किसी भी जीवित व्यक्ति को बचाने की हर संभव कोशिश की जाएगी।

डीएनए जांच में भारत की फॉरेंसिक टीम

बचाव अभियान के साथ-साथ भारत की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम भी नेपाल में सक्रिय है। यह टीम नेपाल पुलिस सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी और काठमांडू घाटी के खुमलटार स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों का विश्लेषण कर रही है। भारतीय दूतावास के अनुसार, यह प्रयास बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से एकत्र नमूनों के आधार पर मृतकों और लापता व्यक्तियों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।

शवों की पहचान में आ रही कठिनाइयाँ

नेपाल पुलिस के अनुसार, बरामद 1,068 शवों में से 400 शवों के केवल आंशिक अवशेष ही मिले हैं, जिससे उनकी पहचान करना अत्यंत कठिन हो गया है। अधिकारियों ने बताया कि जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उनके डीएनए नमूने सुरक्षित रखे जा रहे हैं। अभी भी 4,606 लोग लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इस स्थिति में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

जलविद्युत परियोजना स्थलों पर भी खोज जारी

रसुवा और नुवाकोट जिलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों के जलविद्युत परियोजना स्थलों पर भी कई लोगों के लापता होने की सूचना है। नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत और चीन दोनों ने इन क्षेत्रों में खोज और बचाव के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं।

नेपाल सरकार की प्रतिक्रिया

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा है कि बाढ़ में जान गंवाने वाले और अपहचाने शवों का प्रबंधन कानूनी और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की सहायता से डीएनए नमूने और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखे जा रहे हैं, जबकि जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें परिजनों को सौंपा जा रहा है। यह त्रासदी इस बात की याद दिलाती है कि हिमालयी क्षेत्र में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन का खतरा हर वर्ष लाखों लोगों की जान को संकट में डालता है — और इस बार का पैमाना असाधारण रूप से बड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 4,606 लापता लोगों में से कितनों तक समय रहते पहुँचा जा सकेगा। 400 शवों के केवल आंशिक अवशेष मिलना इस बात का संकेत है कि बाढ़ की तीव्रता असाधारण थी। हिमालयी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा का सवाल एक बार फिर उठता है — ये स्थल हर मानसून में सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं, फिर भी आपदा तैयारी के मानक अक्सर अपर्याप्त साबित होते हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई और कितने लापता हैं?
नेपाल पुलिस के अनुसार मंगलवार शाम तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 1,068 शव बरामद किए जा चुके हैं और 4,606 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत की सुरंग बचाव टीम नेपाल में क्या कर रही है?
भारत की टनल रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ रसुवा जिले के चिलिमे क्षेत्र में सुरंग के भीतर फंसे लोगों की तलाश में जुटी है। दलदली और संकरी परिस्थितियों में टीम ने अस्थायी फ्लोट्स की मदद से सुरंग की गहराई तक पहुँचने का प्रयास किया है।
भारत की फॉरेंसिक टीम नेपाल में डीएनए जांच क्यों कर रही है?
बाढ़ में बरामद 400 से अधिक शवों के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं, जिससे पहचान करना कठिन है। भारत की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ डीएनए नमूनों का विश्लेषण कर मृतकों और लापता लोगों की शीघ्र पहचान में मदद कर रही है।
नेपाल के किन जिलों में बाढ़ का सबसे अधिक असर पड़ा है?
रसुवा और नुवाकोट जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहाँ भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों के जलविद्युत परियोजना स्थलों पर भी कई लोग लापता हैं। इन क्षेत्रों में भारत और चीन दोनों ने तकनीकी बचाव टीमें भेजी हैं।
नेपाल सरकार अपहचाने शवों का प्रबंधन कैसे कर रही है?
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह के अनुसार, अपहचाने शवों का प्रबंधन कानूनी और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है। नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की मदद से डीएनए नमूने सुरक्षित रखे जा रहे हैं और जिनकी पहचान हो चुकी है उनके शव परिजनों को सौंपे जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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